भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच ऐतिहासिक 'दोस्ती! 5,000 भारतीयों को सीधे नौकरी के मौके, क्या हैं बड़े फ़ायदे?



नई दिल्ली। आज भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक ऐतिहासिक दिन रहा है। भारत और न्यूज़ीलैंड ने सोमवार को एक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर साइन किए। इस एग्रीमेंट से न केवल सामान और सेवाओं के व्यापार को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि न्यूज़ीलैंड अगले 15 सालों में भारत में $20 बिलियन (लगभग 1.6 लाख करोड़ रुपये) का भारी निवेश भी करेगा।

'डेयरी' सेक्टर को सुरक्षा मिली

भारत ने भारतीय किसानों और एमएसएमई सेक्टर के हित में बहुत सावधानी से कदम उठाया है। हालांकि न्यूज़ीलैंड डेयरी प्रोडक्ट्स का एक बड़ा प्रोड्यूसर है, लेकिन भारत ने इस एग्रीमेंट से दूध, दही, पनीर, चीज़ और दूसरे डेयरी प्रोडक्ट्स को बाहर रखा है। साथ ही, चीनी, दालें और प्याज जैसी सेंसिटिव चीज़ों पर कोई इम्पोर्ट ड्यूटी में छूट नहीं दी गई है।


भारत के लिए इसके बड़े फायदे क्या हैं?


  • ज़ीरो इंपोर्ट ड्यूटी: भारत से एक्सपोर्ट होने वाले टेक्सटाइल, प्लास्टिक, लेदर के सामान और इंजीनियरिंग प्रोडक्ट अब न्यूज़ीलैंड में ड्यूटी-फ्री होंगे।
  • इन्वेस्टमेंट की बाढ़: न्यूज़ीलैंड अगले 15 सालों में भारत में $20 बिलियन का इन्वेस्टमेंट करने वाला है। अभी यह इन्वेस्टमेंट सिफऱ् $89 मिलियन है।
  • वीज़ा और रोजग़ार: अच्छी खबर यह है कि 5,000 स्किल्ड भारतीयों को 'टेम्पररी एम्प्लॉयमेंट एंट्री वीज़ाÓ के तहत न्यूज़ीलैंड में 3 साल तक काम करने का मौका मिलेगा।
  • सर्विस सेक्टर को मज़बूत करना: न्यूज़ीलैंड का मार्केट ढ्ढञ्ज, एजुकेशन, टूरिज़्म और फाइनेंशियल सर्विस सेक्टर में भारतीय कंपनियों के लिए खुल जाएगा। इससे भारत में इस सेक्टर को बहुत फ़ायदा होगा।


यह एग्रीमेंट एग्रीकल्चर, मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी सेक्टर को मज़बूत करेगा। इससे किसानों, युवाओं, महिलाओं, छोटे एंटरप्रेन्योर और स्टार्टअप को फायदा होगा। - नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री


न्यूज़ीलैंड का क्या?

भारत ने न्यूज़ीलैंड को 70' प्रोडक्ट कैटेगरी में छूट दी है। ऊन, कोयला, लकड़ी जैसे सामान भारत में ड्यूटी-फ्री आ सकेंगे। सेब, कीवी की पहुंच सीमित होगी।


समझौते का इतिहास

  • 2010: दोनों देशों के बीच बातचीत शुरू हुई।
  • 2015: बातचीत रुक गई
  • 16 मार्च 2025: नई शुरुआत
  • 22 दिसंबर 2025: समझौता फाइनल हुआ

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