छत्तीसगढ़

गुरुवार, 24 सितंबर 2020

भाजपा के सांसद षड्यंत्र कर रहे हैं : शैलेश नितिन

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रायपुर। केंद्रीय मंत्रियों से भाजपा सांसदों (BJP MPs from Union Ministers) द्वारा की जा रही शिकवा शिकायतों (Complaint) के दौर पर तीखी प्रतिक्रिया (Shrill reaction) व्यक्त करते हुए कांग्रेस के संचार प्रमुख शैलेश नितिन त्रिवेदी (Communications chief Shailesh Nitin Trivedi) ने कहा है कि मनरेगा प्रधानमंत्री आवास योजना और केंद्र सरकार की अन्य योजनाओं से लाभान्वित हो रहे छत्तीसगढ़ वासियों के खिलाफ भाजपा के सांसद षड्यंत्र कर रहे हैं राजनैतिक फायदा उठाने की मानसिकता के चलते भाजपा के सांसद इतना गिर गए हैं कि केंद्र सरकार से झूठी शिकायतें करके केंद्र सरकार की योजनाओं के लाभ से छत्तीसगढ़वासियों को वंचित करने की चाल चलना शुरू कर दिया है।

प्रदेश की जनता के हक और अधिकार की लड़ाई लडऩा हर जनप्रतिनिधि का कर्तव्य होता है । लेकिन मानसिक कुंठा के शिकार भाजपा सांसद करोना आपदा काल में बहुत बेहतर काम कर रही राज्य सरकार पर तथ्यहीन और तर्कहीन झूठी शिकायत कर रहे हैं। कांग्रेस का विरोध करते-करते अब भाजपा सांसदों का रवैया छत्तीसगढ़ और छत्तीसगढिय़ा विरोधी बन चुका है!

विपदा के समय भी भाजपा सांसद केवल राज्य सरकार की शिकायत करने और मोदी के झूठे महिमा गायन में लगे हुए हैं। राजनीतिक स्वार्थ के चलते संवेदनहीन हो चुके भाजपा सांसद छत्तीसगढ़ के गरीबों मजदूरकिसानों गाँववालों के दुखदर्द के प्रति संवेदनहीन बन चुके हैं।

एक ओर केंद्र सरकार के समक्ष छत्तीसगढ़ सरकार ने और संसद में कांग्रेेेस के सभी सांसदों ने छत्तीसगढ़ के हकों और हितों की बात को पुरजोर तरीके से उठाया है।
वहीं भाजपा सांसद केंद्रीय मंत्रियों से मिलकर झूठी शिकायत और चुगल खोरी करके राज्य में संचालित गिने-चुने केंद्रीय योजनाओं को भी बंद करवाने प्रयासरत रहे।

करोना के संकट काल में लॉक डाउन होने के बावजूद छत्तीसगढ़ सरकार ने देश में सबसे अच्छा काम किया और यह बात केंद्र सरकार के आंकड़ों से प्रमाणित हुई है। भाजपा के सांसद अपनी ही केंद्र सरकार के आंकड़ों को झूठलाते हुए छत्तीसगढ़ सरकार की झूठी शिकायत मनरेगा के मामले में करने लगे। इससे स्पष्ट है कि छत्तीसगढ़ में यदि मजदूरों को मनरेगा में काम मिला तो यह भाजपा के सांसदों को बर्दाश्त नहीं हो रहा है।

भाजपाई सांसदों ने पहले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से मिलकर छत्तीसगढ़ में कोरोना से लड़ाई को कमजोर करने झूठी शिकायत की, यही नहीं केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से मुलाकात कर छत्तीसगढ़ के भाजपा सांसदों के द्वारा केंद्रीय योजनाओं में लापरवाही का झूठा आधारहीन आरोप प्रदेश सरकार पर लगाया गया!

14वें वित्त आयोग की राशि जिसका उपयोग रमन सिंह जी के कार्यकाल में भारतीय जनता पार्टी के द्वारा राजनैतिक रैलियों में भीड़ जुटाने और सभाओं के लिए गाडिय़ों और डीजल पेट्रोल में फूकने के लिए किया जाता रहा, उस 14वें वित्त आयोग की राशि का उपयोग आपदाकाल के विपरीत हालात में 7 लाख 14 हज़ार से अधिक वापस लौटे छत्तीसगढ़ के प्रवासी मजदूरों के लिए क्वारंटाइन सेंटरों की व्यवस्था और गौ सेवा की दिशा में स्थापित किए जा रहे गौठानों पर खर्च किए जाने पर आपत्ती किया जाना भाजपा सांसदों के मानसिक दिवालियापन का प्रमाण है!

छत्तीसगढ़ की उपेक्षा और भेदभाव के खिलाफ संसद में आवाज उठानेे के बजाय
मोदी सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ के 25 लाख़ किसानों को किसान सम्मान निधि के लाभ से दुर्भावना पूर्वक वंचित किए जाने पर भी भारतीय जनता पार्टी के सांसद प्रदेश सरकार पर अनर्गल आरोप लगा रहे हैं!

हकीकत यह है कि भारतीय जनता पार्टी की नीति किसान विरोधी है मजदूर विरोधी है युवा और बेरोजगार विरोधी है आदिवासियों और महिला विरोधी है पूंजीवाद की समर्थक अधिनायक वादी मोदी सरकार का प्रत्येक निर्णय जनविरोधी निर्णय है!

संघीय व्यवस्था में सांसद (लोकसभा और राज्यसभा सदस्य) राज्य की जनता के केंद्र में प्रतिनिधि होते हैं! प्रदेश के हित और हक की लड़ाई लडऩा, उनकी मांगों को प्रभावी तरीके से केंद्र सरकार के समक्ष रखना इनकी राजनैतिक और नैतिक जिम्मेदारी है! आपदा काल में कांग्रेस के सांसद लगातार केंद्र की मोदी सरकार से प्रदेश की जनता की हक और अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं!

15 साल के कुशासन में छत्तीसगढ़ को गरीबी रेखा में नंबर वन पर पहुंचाने के जिम्मेदार भारतीय जनता पार्टी के द्वारा दुर्भावना पूर्वक प्रधानमंत्री गरीब कल्याण रोजगार योजना में शामिल नहीं किए जाने पर कांग्रेस के सांसदों ने पुरजोर आपत्ति की लेकिन भाजपा सांसद मौन बने रहकर मेजें ही थपथपाते रहे।

किसान संगठनों का 25 सितम्बर को 'छत्तीसगढ़ बंद'

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 रायपुर। मोदी सरकार द्वारा बनाये गए कॉर्पोरेट परस्त तीन किसान कानूनों  के खिलाफ छत्तीसगढ़ के बीस से ज्यादा किसान संगठनों ने 25 सितम्बर को 'छत्तीसगढ़ बंद' (chhattisgarh band on 25th September) का आह्वान किया है और जनता के सभी तबकों, राजनैतिक दलों और संगठनों से खेती-किसानी, खाद्यान्न आत्मनिर्भरता(atmnirbhar bharat)

और देश की संप्रभुता को बचाने के लिए इस आह्वान का पुरजोर समर्थन करने की अपील की है।

Corona: कोरोना के सक्रिय मामलों में लगातार कमी

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 नई दिल्ली। देश (country) में कोरोना वायरस (Corona virus) के सक्रिय मामले गत छह दिन से लगातार कम (Less than six consecutive days) हो रहे हैं और पिछले 24 घंटों (24 hours) के दौरान इन मामलों में 1,995 की कमी दर्ज की गयी जिससे मरीजों की कुल संख्या 9,66,382 रह गयी।

केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से गुरुवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले 24 घंटे में कोरोना संक्रमण के 86,508 नये मामले सामने आये हैं जिससे संक्रमितों की कुल संख्या 57,32,519 पर पहुंच गयी है।

इसी अवधि में 87,374 मरीज स्वस्थ हुए हैं जिसके साथ ही अब तक कोरोना मुक्त होने वालों की संख्या 46,74,988 हो गयी है।

संक्रमण के नये मामलों की तुलना में स्वस्थ होने वालों की संख्या अधिक होने से पिछले 24 घंटों में सक्रिय मामलों की संख्या में 1,995 की कमी आयी है।

सक्रिय मामले शनिवार को 3790, रविवार को 3140, सोमवार को 7525, मंगलवार को 27,438 और बुधवार को 7,484 कम हुए थे। छत्तीसगढ़ में सबसे अधिक 2,348 और त्रिपुरा में सबसे कम 48 सक्रिय मामले घटे हैं।

इसी अवधि में 1,129 मरीजों की मौत हो गयी जिससे संक्रमण से जान गंवाने वालों की संख्या 91,149 पर पहंच गयी है।

देश में सक्रिय मामले 16.86 प्रतिशत और मृत्यु दर 1.59 फीसदी रह गये हैं जबकि, रोगमुक्त होने वालों की दर 81.55 प्रतिशत हो गयी है।




मंगलवार, 15 सितंबर 2020

​​​​​​​कोरोना संकट काल में स्कूली बच्चों को मध्यान्ह भोजन देने में छत्तीसगढ़ देश में अव्वल

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राज्य के 90 प्रतिशत से अधिक स्कूली बच्चों को मिला सूखा राशन का लाभ


रायपुर । कोरोना संकट काल में भी मध्यान्ह भोजन योजना के क्रियान्वयन में छत्तीसगढ़ देश में अव्वल रहा है। छत्तीसगढ़ में लॉकडाउन के दौरान 90 प्रतिशत से अधिक बच्चों को मध्यान्ह भोजन का लाभ मिला है, जबकि इस दौरान अन्य राज्यों में मध्यान्ह भोजन वितरण की स्थिति काफी खराब रही। आक्सफैम इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार स्कूल बंद होने से देश के 27 करोड़ बच्चे प्रभावित हुए हैं, जबकि नेशनल फूड सिक्यूरिटी एक्ट 2013 के तहत मध्यान्ह भोजन प्रत्येक बच्चे का अधिकार है। लोकसभा में विगत 14 सितंबर को एक प्रश्न के उत्तर में केन्द्र सरकार ने यह माना कि मध्यान्ह भोजन योजना के लाभ से बहुत से बच्चों को वंचित रहना पड़ा।

आक्सफैम इंडिया के सर्वेक्षण में छत्तीसगढ़ का देश में सबसे अच्छा प्रदर्शन रहा है। छत्तीसगढ़ में 90 प्रतिशत से अधिक बच्चों को मध्यान्ह भोजन योजना का लाभ मिला है। जबकि उत्तर प्रदेश में 92 प्रतिशत बच्चों को मध्यान्ह भोजन से वंचित रहे। सर्वेक्षण में यह भी बताया गया है कि उत्तर प्रदेश में जहां खाद्यान्न सुरक्षा भत्ता प्रदान करने पर ध्यान केन्द्रित किया गया वहीं छत्तीसगढ़ में राशन की होम डिलिवरी पर ध्यान केन्द्रित किया गया। लॉकडाउन के दौरान पिछले मार्च में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य में स्कूलों के बंद होने के बीच मध्यान्ह भोजन की आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। इसके तारतम्य में छत्तीसगढ़ ने तत्काल कदम उठाते हुए स्कूली बच्चों को स्कूलों और बच्चों के घरों तक पहुंचाकर मध्यान्ह भोजन उपलब्ध कराने के इंतजाम किए। 


मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने 21 मार्च 2020 को सभी कलेक्टरों और जिला शिक्षा अधिकारियों मध्यान्ह भोजन योजना के तहत स्कूली बच्चों को सूखा राशन वितरण के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए। गांव-गांव में इसकी मुनादी करायी गई। देश के अन्य राज्यों में सूखा राशन वितरण की प्रक्रिया काफी बाद में शुरू कराई गई। छत्तीसगढ़ में लॉकडाउन के पहले 40 दिनों के लिए स्कूली बच्चों को सूखा राशन दिया गया। इसके बाद एक मई से 15 जून तक 45 दिनों के लिए, 16 जून से 10 अगस्त तक 45 दिन का सूखा राशन वितरित किया गया। इस प्रकार अब तक 130 दिन का सूखा राशन वितरण किया जा चुका है। इस योजना से राज्य के लगभग 43 हजार स्कूलों में 29 लाख बच्चों को मध्यान्ह भोजन योजना के तहत सूखा राशन वितरण से लाभ मिला है।

मध्यान्ह भोजन योजना के तहत सूखा राशन के घर-घर वितरण की व्यवस्था स्कूल शिक्षा विभाग के माध्यम से की गई। वितरित किए गए सूखा राशन पैकेट में चावल, तेल, सोयाबीन, दाल, नमक और अचार शामिल हैं। राज्य सरकार द्वारा स्थानीय स्तर पर स्कूली बच्चों और पालकों की सुविधा को देखते हुए यह व्यवस्था भी की गई कि यदि माता-पिता पैकेट लेने के लिए स्कूल नहीं जा सकते हैं तो स्व-सहायता समूह और स्कूल स्टाफ के माध्यम से घर घर जाकर सूखा राशन के पैकेटों की होम डिलवरी की जाए।


सामुदायिक शौचालय के उत्कृष्ट ड्राइंग-डिजाइन तैयार कर जीत सकते हैं 1.75 लाख तक के पुरस्कार

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  • राज्य स्वच्छता पुरस्कार-2020 के तहत सामुदायिक शौचालय के सर्वश्रेष्ठ मॉडल को एक लाख, सवा लाख और पौने दो लाख का पुरस्कार
  • 20 सितम्बर तक कर सकते हैं आवेदन, स्वच्छ भारत मिशन द्वारा 2 अक्टूबर को दिए जाएंगे पुरस्कार




रायपुर । सामुदायिक शौचालय के उत्कृष्ट ड्राइंग-डिजाइन तैयार कर आर्किटेक्ट और इंजीनियर पौने दो लाख रूपए तक का पुरस्कार जीत सकते हैं। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) द्वारा राज्य स्वच्छता पुरस्कार-2020 के अंतर्गत साढ़े तीन लाख रूपए, साढ़े चार लाख रूपए और साढ़े पांच लाख रूपए लागत के सामुदायिक शौचालय के सर्वश्रेष्ठ मॉडल को क्रमशः एक लाख रूपए, सवा लाख रूपए और पौने दो लाख रूपए का नगद पुरस्कार दिया जाएगा। इसके लिए 20 सितम्बर तक आवेदन किए जा सकते हैं।



विजेताओं को गांधी जयंती पर 2 अक्टूबर को पुरस्कार दिए जाएंगे। प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए राज्य स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की वेबसाइट www.sbmgcg.in पर सीधे प्रविष्टि की जा सकती है। मिशन कार्यालय की ई-मेल आईडी sbmg.cg@gov.in पर या राज्य मिशन कार्यालय, नीर भवन, सिविल लाइंस, रायपुर में डाक के द्वारा या स्वयं उपस्थित होकर भी आवेदन जमा किया जा सकता है।

स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अधिकारियों ने बताया कि मिशन के पहले चरण (अक्टूबर-2014 से मार्च-2020) के तहत ग्रामीण क्षेत्रों को खुले में शौचमुक्त घोषित किया जा चुका है। खुले में शौचमुक्त की स्थिति को बनाए रखने के लिए सार्वजनिक स्थलों पर सामुदायिक शौचालयों की आवश्यकता महसूस की जा रही है। राज्य में ऐसे सामुदायिक शौचालयों के निर्माण का लक्ष्य है जो सभी वर्गों एवं समुदायों के लोगों के लिए सहज व सुविधाजनक हो। इन सामुदायिक शौचालयों में तृतीय लिंग व्यक्तियों सहित दिव्यांगों, महिलाओं एवं पुरूषों के लिए अलग-अलग शौचालय, मूत्रालय एवं हाथ धुलाई की सुविधा सुनिश्चित की जाएगी।

ग्रामीण क्षेत्रों में हाट-बाजारों, बस-स्टैण्डों, धार्मिक स्थलों, तालाब के किनारे, हाई-वे के किनारे तथा अनुसूचित जाति एवं जनजाति की बसाहटों में सामुदायिक शौचालय बनाए जाएंगे। राज्य स्वच्छता पुरस्कार-2020 के अंतर्गत समावेशी सामुदायिक शौचालयों के ड्राइंग एवं डिजाइन आमंत्रित किए जा रहे है। इस प्रतियोगिता में कोई भी इंजीनियर या आर्किटेक्ट भाग ले सकता है। प्रतिभागियों से तीन तरह साढ़े तीन लाख रूपए, साढ़े चार लाख रूपए और साढ़े पांच लाख रूपए की लागत के सामुदायिक शौचालयों के ड्राइंग एवं डिजाइन आमंत्रित किए गए हैं।

सामुदायिक शौचालयों के सर्वश्रेष्ठ मॉडल का चयन दो चरणों में किया जाएगा। पहले चरण में प्रतिभागियों को सबसे पहले ड्राइंग एवं डिजाइन के साथ ऑनलाइन आवेदन करना होगा। इसमें चयनित पांच सर्वश्रेष्ठ मॉडलों में प्रत्येक को पांच हजार रूपए की राशि प्रदान की जाएगी। पहले चरण के विजेताओं को दूसरे चरण में प्रस्तावित ड्राइंग एवं डिजाइन के प्रस्तुतिकरण के साथ थ्री-डी मॉडल (3-D Model) प्रस्तुत करना होगा। द्वितीय चरण में सर्वश्रेष्ठ ड्राइंग एवं डिजाइन का चयन नामांकित जूरी द्वारा किया जाएगा।


सोमवार, 14 सितंबर 2020

मुख्यमंत्री ने हाईवे पेट्रोलिंग के लिए 15 वाहनों को हरी झंडी दिखा कर रवाना किया

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  • सुगम, सुरक्षित और निर्बाध आवागमन के साथ सड़क दुर्घटना पीड़ितों को मिलेगी तत्काल राहत और सहायता

रायपुर  । मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज यहां अपने निवास कार्यालय में हाईवे पेट्रोलिंग हेतु 15 वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री बघेल ने कहा कि नागरिकों को इससे सुगम, सुरक्षित और निर्बाध आवागमन की सुविधा मिलेगी साथ ही सड़क दुर्घटना पीड़ितों को भी तत्काल राहत और सहायता मिल सकेगी। उन्होंने कहा कि शासन दुर्घटनाओं को नियंत्रित करने के लिये प्रतिबद्ध है। दुर्घटनाजन्य स्थलों की पहचान कर हाईवे पेट्रोलिंग वाहनों के माध्यम से घायलों को शीघ्र ही मदद मिल पाएगी। शीघ्र मदद मिलने से सड़क दुर्घटना में घायल लोगों की जान बच सकेगी और दुर्घटनाओं में भी कमी आएगी। मुख्यमंत्री श्री बघेल द्वारा दस जिलों बलौदाबाजार, धमतरी, बालोद, बेमेतरा, कोरिया, जशपुर, सूरजपुर, बलरामपुर, कांकेर और कोण्डागांव के लिये 15 हाईवे पेट्रोल वाहनों को रवाना किया गया।
इस अवसर पर गृह मंत्री श्री ताम्रध्वज साहू, पुलिस महानिदेशक श्री डी.एम. अवस्थी, पुलिस महानिदेशक जेल श्री संजय पिल्ले, विशेष पुलिस महानिदेशक श्री आर के विज और श्री अशोक जुनेजा सहित पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। दस जिलों के राजमार्गों पर ब्लैक स्पॉट के आधार पर 15 सड़क खण्ड चिन्हित किये गये हैं, जिनकी लंबाई करीब 25 किलोमीटर है। इस मार्ग पर 24 घंटे तीन पालियों में एएसआई, हेड कॉन्सटेबल, कॉन्सटेबल और ड्राईवर उपलब्ध रहेंगे। हाईवे पेट्रोलिंग टीम सड़क दुर्घटना होने पर तत्काल घटना स्थल पर पहुंचेगी और दुर्घटना पीड़ित को 108 वाहन या हाईवे पेट्रोलिंग वाहन से तत्काल नजदीकी शासकीय अस्पताल हेतु रवाना करेगी। इसके साथ ही दुर्घटना पीड़ित व्यक्तियों के परिजनों को तुरंत सूचना दी जाएगी। टीम द्वारा हाईवे के किनारे खड़े खराब, दुर्घटनाग्रस्त, अवैध पार्किंग के वाहनों को हटवाया जाएगा। हाईवे पेट्रोलिंग के संचालन एवं नियंत्रण पर संबंधित पुलिस अधीक्षक का पूर्ण दायित्व होगा।
इस संसाधनों से लैस हैं हाईवे पट्रोलिंग वाहन- हाइवे पेट्रोलिंग वाहन सभी अतिआधुनिक एवं तकनीकि संसाधनों से लैस हैं। इनमें जीपीएस सिस्टम, ब्रीथ एनालाईजर(एल्कोमीटर), स्मार्ट फोन, रिफ्लेक्टर जैकेट, रेनकोट, एलईडी बेटन, एलईडी लाईट, पी.ए. सिस्टम एवं सायरन, वायरलेस सेट, डिजिटल कैमरा, फर्स्ट एड बॉक्स, अग्नि शमन यंत्र, सर्ट लाईट, टूल किट (टोइंग हेतु), स्ट्रैचर की सुविधा उपलब्ध है।
उल्लेखनीय है कि वर्तमान में वाघनदी बॉर्डर से उड़ीसा बॉर्डर तक 322 किमी तक 15 हाईवे पेट्रोलिंग गाड़ियां चल रही है। इससे सड़क दुर्घटनाओं और घायलों को समय पर उपचार मिलने में अत्यधिक सहायता मिली है। नई 15 हाईवे पेट्रोलिंग गाड़ियों के लिये यातायात पुलिस और अंतर्विभागीय समिति द्वारा नये 15 सड़क खण्डों में उन दुर्घटनाजन्य स्थलों को चिह्नित किया गया है जहां डायल 112 की गाड़ियां नहीं चल रही हैं। एआईजी यातायात श्री संजय शर्मा ने बताया कि हाईवे पेट्रोलिंग गाड़ियों की त्वरित प्रतिक्रिया की वजह से विगत वर्ष की तुलना में पिछले 8 माह में सड़क दुर्घटनाओं में 24 प्रतिशत और सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु में 20 प्रतिशत की कमी आई है।

मुख्यमंत्री ने बस्तर विशेष बल के गठन के दिए निर्देश, संवेदनशील क्षेत्रों की ग्राम पंचायतों के स्थानीय युवाओं की होगी भर्ती

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  • जेल में बंद आदिवासियों की रिहाई और चिटफण्ड मामलों की हर माह की जाए समीक्षा

  • सीमावर्ती राज्यों से अवैध शराब की तस्करी पर लगाई जाए सख्ती से रोक

  • वरिष्ठ अधिकारी पुलिस कर्मियों की समस्याओं का संवेदनशीलता के साथ करें निराकरण

रायपुर । मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज यहां अपने निवास कार्यालय में आयोजित पुलिस विभाग की समीक्षा बैठक में बस्तर विशेष बल के गठन के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए त्वरित कार्रवाई की जाए। इस विशेष बल में बस्तर के संवेदनशील क्षेत्रों की ग्राम पंचायतों के स्थानीय युवाओं की भर्ती की जाए, इससे स्थानीय लोगों को राहत मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर अंचल की कठिन भौगोलिक परिस्थितियां और स्थानीय भाषा की जानकारी पुलिस के लिए बड़ी चुनौती है। यदि अंदरूनी गांवों के युवाओं की बल में भर्ती की जाएगी तो पुलिस का काम और ज्यादा आसान हो जाएगा। पुलिस मुख्यालय द्वारा विशेष बल के गठन का प्रस्ताव तैयार कर जल्द ही शासन को भेजा जाएगा। बैठक में गृह मंत्री श्री ताम्रध्वज साहू भी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने समीक्षा बैठक में कहा कि कोविड संकट काल में पुलिस विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने सराहनीय कार्य किया है, जिसकी हर तरफ प्रशंसा की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पटनायक समिति के माध्यम से छोटे-छोटे प्रकरणों में जेल में बंद आदिवासियों की रिहाई के लिए तेजी से कार्रवाई की जाए। हर माह इन प्रकरणों की वापसी की समीक्षा की जाए। बैठक में बताया गया कि पटनायक समिति के समक्ष 625 प्रकरण प्रस्तुत किए गए थे, जिनमें 404 प्रकरणों में समिति ने अनुशंसा की है। न्यायालय से 206 प्रकरण निराकृत किए गए हैं। इसी तरह मुख्यमंत्री ने चिटफण्ड कम्पनियों के प्रकरणों को तेजी से निराकृत कर संबंधित लोगों को राशि की वापसी की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने इन प्रकरणों की हर माह समीक्षा करने के निर्देश दिए। बैठक में जानकारी दी गई कि चिटफण्ड से संबंधित 17 प्रकरणों में नीलामी की कार्यवाही कर 9 करोड़ 4 लाख 40 हजार 220 रूपए शासन की खाते में जमा किया गया है। रायपुर और दुर्ग में दो प्रकरणों में नीलामी की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। दुर्ग जिले मेें संबंधित लोगों को कुल 16.04 लाख रूपए, राजनांदगांव जिले में 1.88 लाख रूपए, बिलासपुर जिले में 2.80 लाख रूपए और बेमेतरा जिले में 2.22 लाख रूपए की राशि वापस की गई है। श्री बघेल ने कहा कि न्यायालय के निर्देशानुसार विभाग द्वारा आरक्षक भर्ती का टाईम टेबल घोषित किया जाए। उन्होंने कहा कि पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी संवेदनशीलता के साथ पुलिस कर्मियों की समस्याओं का त्वरित निराकरण करें और पुलिस कर्मियों के साथ सीधा संवाद स्थापित करंे। उनके प्रमोशन, स्थानांतरण और छुट्टी के आदि मामलों पर त्वरित कार्यवाही करें। श्री बघेल ने कहा कि पिछले 18 माह में और विशेष रूप से कोविड संकट काल में आम जनता के बीच पुलिस की अच्छी छवि बनी है। मुख्यमंत्री ने सीमावर्ती राज्यों से शराब की तस्करी और सट्टे पर कठोरता के साथ अंकुश लगाने के निर्देश पुलिस अधिकारियों को दिए। उन्होंने कहा कि नक्सल प्रभावित दुर्गम क्षेत्रों में प्री फेब्रिकेटेड पुल-पुलिया बनाए जाएं।

गृह मंत्री श्री ताम्रध्वज साहू ने कहा कि पुलिस की कार्यप्रणाली से आम जनता में उनके प्रति सम्मान और अपराधियों में डर का भाव हो। उन्होंने सभी जिलों में पुलिस के पेट्रोल पंप प्रारंभ करने के लिए प्रयास करने के निर्देश देते हुए कहा कि इससे होने वाली आय की राशि पुलिस वेलफेयर में खर्च की जाए। उन्होंने सूचना तंत्र को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता बतायी। बैठक में मुख्य सचिव श्री आर.पी. मंडल, अपर मुख्य सचिव गृह श्री सुब्रत साहू, पुलिस महानिदेशक श्री डी.एम. अवस्थी, पुलिस महानिदेशक जेल श्री संजय पिल्ले, विशेष पुलिस महानिदेशक श्री आर. के. विज और श्री अशोक जुनेजा, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक श्री अरूण देव गौतम, श्री पवन देव और श्री हिमांशु गुप्ता सहित पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ पुलिस के मोबाईल एप से नागरिकों के बीच बढ़ेगा विश्वास: मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

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  • मुख्यमंत्री श्री बघेल ने किया सीजी-कॉप मोबाईल एप को लॉंन्च


रायपुर । मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल ने आज यहां अपने निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ पुलिस के सीजी-कॉप मोबाईल एप को लॉंन्च किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा विकसित मोबाईल एप आम नागिरकों को पुलिस के नजदीक लाने और पुलिस से सहायता प्राप्त करने के लिये परस्पर विश्वास को विकसित करने में मदद करेगा। अपराध नियंत्रण की दिशा में यह एप नागरिकों और पुलिस के बीच एक सेतु का काम करेगा।

सीजी-कॉप एप को डाउनलोड कर नागरिक अपराध की सूचनाएं देने या प्रकरणों संबंधित सभी सूचनाएं एक क्लिक पर ही पा सकेंगे। नागरिक इस एप के माध्यम से कुल 14 प्रकार की सेवाओं का लाभ बिना थाना जाये ही ले सकेंगे। सीजी-कॉप एप के माध्यम से नागरिक एफआईआर, ऑनलाईन शिकयात, चोरी, गुम, जब्त वाहन, अज्ञात शव, पुलिस से क्लू साझा करें, केस स्टेटस खोजें, पुलिस टेलीफोन निर्देशिका, चोरी, गुम, जब्त मोबाईल, गुमशुदा व्यक्ति, सहायता केंद्र, गिरफ्तार व्यक्ति का विवरण, नजदीकी पुलिस थाना, गुमशुदा व्यक्ति की खोज और हेल्पलाईन सेवा का लाभ उठा सकेंगे। इस अवसर पर गृहमंत्री श्री ताम्रध्वज साहू, मुख्य सचिव श्री आर.पी. मण्डल, अपर मुख्य सचिव श्री सुब्रत साहू, पुलिस महानिदेशक श्री डी.एम. अवस्थी, पुलिस महानिदेशक जेल श्री संजय पिल्ले, विशेष पुलिस महानिदेशक श्री आर.के. विज और श्री अशोक जुनेजा सहित पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

ऑक्सीजन की आवश्यकता वाले कोरोना मरीजों का अनिवार्य रूप से कराए सीटी स्कैन: मंत्री अकबर

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  • केन्द्र सरकार के गाइडलाइन के अनुसार जांच रिपोर्ट नेगेटिव आने पर मरीजों को किया जाए डिस्चार्ज

  • वनमंत्री ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से राजनांदगांव जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था की समीक्षा की


रायपुर । वन एवं परिवहन और राजनांदगांव जिले के प्रभारी मंत्री श्री मोहम्मद अकबर ने आज यहां अपने शासकीय निवास कार्यालय से वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था की समीक्षा की। श्री अकबर ने कहा कि राज्य सरकार कोरोना कोविड-19 महामारी के रोकथाम के लिए काफी गंभीर है। उन्होंने कोरोना के बढ़ रहे मरीजों के संबंध में समीक्षा की और कहा कि सभी ऑक्सीजन की आवश्यकता वाले मरीजों का अनिवार्य रूप से सीटी स्कैन कराया जाए। उन्होंने कहा कि जिन कोरोना केयर सेंटर में सीटी स्कैन की व्यवस्था नहीं है वहां के मरीजों को एम्बुलेंस के जरिए जिला अस्पताल में ले जाकर सीटी स्कैन कराया जाए। श्री अकबर ने कहा कि भारत सरकार के गाइडलाइन के अनुसार कोरोन मरीजो को तीन दिन तक बुखार नहीं आने और 10 दिन केयर सेंटर में रखने के बाद सात दिन तक होम आइसोलेशन के लिए सलाह देकर डिस्चार्ज किया जाए। वीडियो कान्फ्रेंसिंग में राजनांदगांव के कलेक्टर श्री टोपेश्वर वर्मा, जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी सहित जिला स्तर के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

मंत्री श्री अकबर ने वीडियों कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुए समीक्षा बैठक के दौरान मेडिकल कॉलेज कोविड केयर सेंटर, कोविड केयर सेंटर खैरागढ़ और कोविड केयर सेंटर डोंगरगांव में उपचार करा रहे मरीजों से चर्चा कर वहां की व्यवस्था के संबंध में जानकारी प्राप्त की। मेडिकल कॉलेज कोविड सेंटर में इलाज करा रहे श्री चन्द्रशेखर घृतलहरे ने कहा कि वहां की व्यवस्था से वे संतुष्ट है। वहां साफ-सफाई, समय पर नास्ता और खाना मिल रहा है। डॉक्टरों और मेडिकल स्टॉफ द्वारा भी अच्छे से उपचार किया जा रहा हैं। समय-समय पर डॉक्टरो द्वारा परीक्षण की जाती है। खैरागढ कोरोना केयर सेंटर में इलाज करा रहे श्री राजू पटवा ने भी चर्चा के दौरान मंत्री को बताया कि वे वहां की व्यवस्था से संतुष्ट है। डोगंरगांव कोराना सेंटर में मरीज श्री प्रियेस जैन से चर्चा के दौरान सेंटर में खान-पान, मास्क, सेनेटाइजर, पीपीईकीट अव्यवस्था के संबंध में बताए जाने पर तत्काल व्यवस्था दुरूस्थ कराने कलेक्टर को निर्देशित किए। उन्होंने कहा कि प्रभारी अधिकारियों को नियमित रूप से कोविड केयर सेंटर का दौरा करने और मरीजों से उचित माध्यम से मिलकर उनका हौसला अफजाई करने के भी निर्देश दिए।

वीडियों कांफ्रेसिंग के माध्यम से हुए समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने बताया कि जिलें में कुल 15 कोविड केयर सेंटर स्थापित किए हैं मेंडिकल कॉलेज कोविड केयर सेंटर में 15 वेन्टिलेटर उपलब्ध है। जिसमें आक्सीजन की जरूरत वाले मात्र दो मरीज ही तीन दिन से वेन्टिलेटर पर है। जिले के अन्य कोरोना केयर सेंटर में गंभीर लक्षण वाले मरीजों को तत्काल मेडिकल कॉलेज राजनांदगांव केयर सेंटर में रिफर कर दिया जाता है। वर्तमान में जिले में कोरोना मरीजों के लिए 1345 बिस्तर उपलब्ध हैं। अभी एक्टिव मरीजों की संख्या 772 है। जिलें में आरटीपीसीआर, ट्रू-नॉट और रैपिड एन्टिजन जांच के जरीए 47 हजार 719 सैम्पल लिए गए हैं। इनमें चार हजार 786 मरीज कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। पीपीईकिट, दवाईयां पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। मंत्री श्री अकबर ने कोरोना स्थिति को ध्यान में रखते हुए मेन पावर बढ़ाने डीएमएफ मद का उपयोग करने के निर्देश अधिकारियों को दिए।

स्वास्थ्य मंत्री श्री सिंहदेव ने कोविड अस्पतालों में ऑक्सीजन सुविधा वाले बिस्तरों और वेंटिलेटर्स की संख्या बढ़ाने के निर्देश

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रायपुर । स्वास्थ्य मंत्री टी.एस. सिंहदेव ने आज स्टेट कोविड कंट्रोल एंड कमांड सेंटर में कोविड-19 के नियंत्रण के उपायों और व्यवस्था की समीक्षा की। स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक में उन्होंने कोविड-19 के गंभीर मरीजों के इलाज के लिए कोविड अस्पतालों में ऑक्सीजन सुविधा वाले बिस्तरों और वेंटिलेटर्स की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कोविड केयर सेंटर्स में भी आपात स्थिति के लिए पर्याप्त ऑक्सीजन सिलेंडरों की व्यवस्था करने कहा। उन्होंने बैठक में ऑक्सीजन संयंत्र स्थापित करने के लिए संभावित अस्पतालों की भी जानकारी ली।

श्री सिंहदेव ने बिना लक्षण और हल्के लक्षण वाले कोरोना संक्रमितों के इलाज के लिए कोविड केयर सेंटर्स में बिस्तरों की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने इन सेंटर्स में गुणवत्तापूर्ण भोजन और पेयजल सहित सभी बुनियादी सुविधाओं के पुख्ता इंतजाम करने कहा। उन्होंने गंभीर लक्षण वाले ज्यादा से ज्यादा मरीजों के इलाज के लिए निजी अस्पतालों का सहयोग लेने कहा। स्वास्थ्य मंत्री ने होम आइसोलेशन में रहकर इलाज लेने के इच्छुक मरीजों के लिए प्रक्रिया को सहज-सरल बनाते हुए उनके स्वास्थ्य की नियमित निगरानी के निर्देश दिए। उन्होंने कोरोना संक्रमितों की पहचान के लिए लक्ष्य के अनुसार प्रदेश भर में रोजाना 20 हजार सैंपलों की जांच करने कहा।



स्वास्थ्य मंत्री श्री सिंहदेव ने कहा कि प्रदेश में कोविड-19 के नियंत्रण के लिए विभिन्न विभागों के समन्वय से स्वास्थ्य विभाग अच्छा काम कर रहा है। हमें इस चुनौतीपूर्ण समय में आगे भी धैर्य के साथ काम करते हुए कोरोना से लड़ाई जीतनी है। कोरोना संक्रमण के खतरों के बीच खुद का ख्याल रखते हुए सभी सावधानियों और प्रोटोकॉल का पालन कर सुरक्षित भी रहना है। समीक्षा बैठक में स्वास्थ्य विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती रेणु जी. पिल्ले, संचालक स्वास्थ्य सेवाएं श्री नीरज बंसोड़ और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की संचालक डॉ. प्रियंका शुक्ला सहित स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

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