गरीब कल्याण योजनाओं से 25 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर निकले : केंद्र सरकार


नई दिल्ली । पिछले 12 वर्षों में केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं और सामाजिक सुरक्षा उपायों के विस्तार से देश में गरीबों के जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। सरकार के अनुसार, इस अवधि में लगभग 25 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर निकले हैं। वित्तीय समावेशन, स्वास्थ्य सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा, आवास, शिक्षा, स्वच्छता और आजीविका से जुड़ी योजनाओं के माध्यम से गरीब परिवारों को मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया गया है। साथ ही, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं तक पहुंच बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया।

जल, स्वच्छता और स्वच्छ ईंधन पर विशेष फोकस

सरकार के अनुसार, जल जीवन मिशन के तहत अगस्त 2019 में 3.23 करोड़ ग्रामीण घरों तक सीमित नल जल कनेक्शन मई 2026 तक बढ़कर 15.84 करोड़ घरों तक पहुंच गए। स्वच्छ भारत मिशन के तहत 12.11 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण किया गया, जिससे ग्रामीण स्वच्छता कवरेज 39% से बढ़कर 100% हो गई। वहीं प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत 10.57 करोड़ से अधिक मुफ्त एलपीजी कनेक्शन वितरित किए गए, जिससे महिलाओं के स्वास्थ्य और जीवन गुणवत्ता में सुधार हुआ।

स्वास्थ्य सुरक्षा के दायरे में करोड़ों परिवार

आयुष्मान भारत योजना के तहत मई 2026 तक 43.93 करोड़ से अधिक आयुष्मान कार्ड जारी किए गए। इस योजना के माध्यम से करोड़ों लोगों को कैशलेस स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिला। सरकार का दावा है कि डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के विस्तार से स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच और अधिक आसान हुई है। इसके साथ ही मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रमों के कारण मातृ मृत्यु अनुपात में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है।


खाद्य सुरक्षा और डिजिटल वितरण प्रणाली मजबूत


प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत 81 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को मुफ्त खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली में डिजिटलीकरण और आधार आधारित वितरण व्यवस्था लागू होने से पारदर्शिता बढ़ी है। ‘एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड’ योजना के जरिए प्रवासी श्रमिकों को भी देशभर में राशन प्राप्त करने की सुविधा मिली है।


शिक्षा में बढ़ी भागीदारी, घटी ड्रॉपआउट दर


समग्र शिक्षा अभियान और अन्य योजनाओं के तहत स्कूलों में डिजिटल सुविधाओं, स्मार्ट क्लासरूम और छात्राओं के लिए अलग शौचालयों का विस्तार किया गया। सरकार के अनुसार, प्राथमिक स्तर पर लड़कियों की ड्रॉपआउट दर 2013-14 के 4.6% से घटकर 2024-25 में 0.3% रह गई है। वहीं माध्यमिक स्तर पर भी स्कूल छोड़ने वाली छात्राओं की संख्या में कमी दर्ज की गई है।


आवास और आधारभूत ढांचे में तेजी


प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में करोड़ों घरों का निर्माण किया गया है। सरकार के मुताबिक, मई 2026 तक प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत 3.03 करोड़ घर पूरे किए जा चुके हैं। वहीं प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत लगभग सभी पात्र बस्तियों को हर मौसम में उपयोगी सड़कों से जोड़ा गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली, सड़क और डिजिटल कनेक्टिविटी के विस्तार से विकास को गति मिली है।


महिलाओं और ग्रामीण आजीविका को मिला बढ़ावा


दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं की संख्या बढ़कर 10 करोड़ तक पहुंच गई है। ‘लखपति दीदी’ और ‘नमो ड्रोन दीदी’ जैसी पहलें महिलाओं को उद्यमिता और आधुनिक तकनीक से जोड़ने में मदद कर रही हैं। इसके अलावा कौशल विकास योजनाओं के माध्यम से युवाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण उपलब्ध कराया गया है।


सामाजिक सुरक्षा और वित्तीय समावेशन का विस्तार


अटल पेंशन योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना और ई-श्रम पोर्टल जैसी पहलों के माध्यम से करोड़ों असंगठित श्रमिकों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को सामाजिक सुरक्षा कवरेज प्रदान किया गया है। डिजिटल भुगतान प्रणाली और यूपीआई के विस्तार ने वित्तीय समावेशन को नई गति दी है।


समावेशी विकास की दिशा में आगे बढ़ता भारत


सरकार का कहना है कि कल्याणकारी योजनाओं, डिजिटल शासन और बुनियादी सेवाओं के विस्तार ने गरीबों को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। महिलाओं, किसानों, श्रमिकों, आदिवासी समुदायों और वंचित वर्गों को केंद्र में रखकर लागू की गई योजनाओं ने समावेशी विकास को मजबूती दी है। सरकार के अनुसार, ये प्रयास ‘अंत्योदय से सर्वोदय’ और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार तैयार कर रहे हैं।

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