88 हजार को गैस सिलेंडर मिला पर रिफिलिंग सिर्फ 20 प्रतिशत


मुंगेली। उज्जवला योजना के तहत जिले में अभी तक 88 हजार परिवारों को योजना के तहत गैस सिलेंडर दिया गया है। जिसमें से मात्र 20 प्रतिशत ही रिफलिंग हो पा रही है। उज्जवला योजना का लक्ष्य पूरा करने में खाद्य विभाग फिसड्डी नजर आ रहा है। योजना के पहले साल अधिकारियों ने शतप्रतिशत लक्ष्य पूरा कर लिया था, पर दूसरे ही साल लक्ष्य पूरा करने में अफसरों का पसीना छूटने लगा है। वर्ष 2017-18 से लेकर अब तक 80 प्रतिशत से अधिक पूरा नहीं कर पाया है। अब इस योजना में हितग्राही भी रूचि नहीं ले रहे है। इसके कारण तीन साल के लक्ष्य में विभाग सिर्फ 40 प्रतिशत ही लक्ष्य तक पहुंचा है। तीन साल से जिले को स्मोकलैस बनाने का प्रयास किया जा रहा है, पर केन्द्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना अब जिले में फिसड्डी साबित हो रही है। वर्ष 2016-17 में योजना की शुरूआत होने पर विभाग के अफसरों ने जमकर दौैड़धूप कर योजना को शतप्रतिशत लक्ष्य तक पहुंचाने का प्रयास किया था। वर्ष 2016-17 में विभाग को 73 हजार 250 कनेक्शन देने का लक्ष्य रखा गया था। विभाग पहले साल शतप्रतिशत लक्ष्य पूरा कर लिया है, पर वर्ष 2017-18 में लगभग 88 हजार कनेक्शन का लक्ष्य दिया गया था। इसमेें सिर्फ 59 हजार 629 कनेक्शन ही विभाग हितग्राहियों को उपलब्ध करा पाया है। इसी तरह वर्ष 2018-19 के लिए 88 हजार  कनेक्शन उपलब्ध कराने का लक्ष्य शासन ने विभाग को दिया है। इस लक्ष्य को चार तिमाही में अलग-अलग कर योजना को संचालित करने का प्रयास विभाग ने किया हैै, पर पहले तिमाही में विभाग 44 प्रतिशत दूसरे तिमाही में 90 प्रतिशत व तीसरे तिमाही में सिर्फ 30 प्रतिशत ही लक्ष्य को पूरा कर पाया है। इस योजना में हितग्राहियों का रूचि नहीं होने के कारण अधिकारियों को लक्ष्य पूरा करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सरकार गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों को मुफ्त गैस चूल्हा व सिलेंडर का वितरण कर रही है। केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री उज्जवला योजना कमजोर वर्ग के परिवारों खासकर महिलाओं को चूल्हे से निकलने वाले धुएं से राहत पहुंचाने के लिए 1 मई 2016 से प्रारंभ किया था। योजना के तहत सरकार गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों को घरेलू रसोई गैस का कनेक्शन देती है। यहां योजना पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सहयोग से चलाई जा रही है। ग्रामीण इलाके में खाना पकाने के लिए लकड़ी और गोबर के उपले का इस्तेमाल किया जाता रहा है।
इससे निकलने वाले धुएं का इसका खराब असर महिलाओं के स्वास्थ्य पर पड़ता है। इस योजना के शुरू होने से महिलाओं को चूल्हे से निकलने वाले धुएं से मुक्ति मिलने की उम्मीद थी। ऐसा होता दिखाई नहीं दे रहा है। एक ओर जहां योजना के तहत आधा लक्ष्य पूरा नहीं किया जा सका है, तो दूसरी ओर रिफलिंग की दर बहुत कम है। अब तक योजना के तहत जिले में 88 हजार कनेक्शन बांटे जा चुके है। इन कनेक्शनों के बराबर भी रिफिलिंग का आंकड़ा नहीं पहुंचा सकता है। मात्र 40 प्रतिशत लोग रिफलिंग कराये है। जो योजना के तहत दिए गए कनेक्शन का आधा भी नहीं है। जिले में संचालित गैस एजेंसियों के माध्यम से योजना के तहत गैस वितरण किया जा रहा है। जिले में 6 गैस एजेंसीयां संचालित है। शासकीय योजना के तहत मुफ्त एलपीजी कनेक्शन दिया जा रहा है। लेकिन क्षेत्र र्में इंधन के रूप में जलाऊ लकड़ी का प्रयोग परंपरागत रूप से किया जाता रहा है। आज भी ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ शहरी क्षेत्रों में भी इस पर निर्भरता कम नहीं हुई है। दूसरी ओर जलाऊ लकड़ी सरल व सस्ते दरों पर उपलब्ध होने के कारण लोग मुफ्त में मिले सिलेंडरों की रिफिलिंग कराने में रूचि नहीं दिखा रहे है। गृहिणियों ने बताया कि रसोई गैस का दाम बढऩे से रिफिलिंग नहीं करा पा रहे है। रसोई गैस है, जब कभी लकड़ी नहीं मिलता तब कभी-कभी गैस सिलेंडर का उपयोग करते है। गैस का रेट कम होने से उपयोग करते बनेगा। जबकि इसका दाम दिनों-दिन बढ़ रहा है।