- - देर से आएगा मानसून, अब केवल दो 'नेचुरल सिस्टम' से ही भारत को बड़ी उम्मीदें
- -केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने सभी राज्यों को जिला स्तर पर 'एक्शन प्लान' लागू करने का सख्त निर्देश
- - प्रशांत महासागर में बढ़ा तापमान, 80' हुई 'अल नीनो' की आशंका
- -केंद्र ने कहा- तुरंत लागू करें इमरजेंसी प्लान
नई दिल्ली। देश और दुनिया पर आगामी तीन महीनों के लिए गंभीर सूखे का संकट मंडरा रहा है। भारतीय मौसम विभाग के बाद अब संयुक्त राष्ट्र की मौसम एजेंसी 'विश्व मौसम विज्ञान संगठनÓ ने भी वैश्विक जलवायु को लेकर रेड अलर्ट जारी कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रशांत महासागर का पानी तेजी से गर्म हो रहा है, जिससे जून से अगस्त के बीच विनाशकारी 'अल नीनोÓ के एक्टिव होने की आशंका 80' से बढ़कर नवंबर तक 90' से पार जा सकती है। इस खतरे को भांपते हुए केंद्र सरकार तुरंत एक्शन में आ गई है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने सभी राज्यों को जिला स्तर पर 'एक्शन प्लानÓ लागू करने का सख्त निर्देश दिया है।
स्थिति क्यों है चिंताजनक
6 डिग्री तक उबला समंदर: वैज्ञानिकों के अनुसार, प्रशांत महासागर की सतह के नीचे का पानी सामान्य से 6 डिग्री सेल्सीयस से ज्यादा गर्म हो चुका है। यही गर्मी अल नीनो को खतरनाक रफ्तार दे रही है।
देरी से दस्तक देगा मानसून:
इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून अपनी सामान्य तारीख (1 जून) से पिछड़कर 4 जून तक केरल पहुंच सकता है। इस बार देश में सामान्य से कम बारिश का अनुमान है।
मल्टी-क्राइसिस का खतरा:
अल नीनो के मजबूत होने से भारत समेत पूरी दुनिया में केवल सूखा ही नहीं, बल्कि भीषण हीटवेव, बेमौसम बाढ़ और मौसम के जानलेवा रूप देखने को मिल सकते हैं।
कंट्रोल रूम और डिजिटल सपोर्ट:
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने निर्देश दिए हैं कि किसानों को मौसम और फसलों से जुड़ी सटीक जानकारी देने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म और कॉल सेंटर्स को 24 घंटे सक्रिय रखा जाए।
ये 2 सिस्टम बचा सकते हैं भारत का मानसून
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अल नीनो के इस चक्रवात के बावजूद भारत में मानसून पूरी तरह फेल नहीं होगा, यदि प्रकृति के ये दो सुरक्षा कवच (सिस्टम) एक्टिव हो जाते हैं:
पॉजिटिव आईओडी: इसे 'हिंद महासागर का अल नीनोÓ कहते हैं। अगर यह पॉजिटिव फेज में रहा, तो प्रशांत महासागर से आने वाले सूखे के असर को पूरी तरह बेअसर कर भारत में अच्छी बारिश करा सकता है।
एमजेओ : यह भूमध्य रेखा पर घूमने वाला बादलों और हवाओं का एक ग्लोबल सिस्टम है। कमजोर मानसून के दौरान भी जब यह भारत के ऊपर से गुजरता है, तो झमाझम बारिश के लंबे दौर लेकर आता है।
क्या है 'अल नीनोÓ जिसने तोड़े रिकॉर्ड?
जब प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय क्षेत्र में समुद्री हवाएं कमजोर पड़ती हैं, तो दक्षिण अमेरिकी तट का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है। इसी भौगोलिक बदलाव को 'अल नीनोÓ कहते हैं। यह पूरी दुनिया के मौसम तंत्र को तहस-नहस कर देता है। इससे पहले साल 2023-24 का अल नीनो इतिहास के 5 सबसे भीषण दौर में शामिल था, जिसने दुनिया भर में गर्मी के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए थे।
डब्ल्यूएमओ की चेतावनी: 'युद्ध स्तर पर काम करने का समयÓ
विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने सख्त लहजे में कहा है कि अब सोचने का समय नहीं बल्कि युद्ध स्तर पर तैयारी करने का है। प्रभावित देशों की सरकारों, कृषि, स्वास्थ्य और ऊर्जा विभागों को आपस में तालमेल बिठाकर काम करना होगा। समय पर मिली सटीक चेतावनी और प्रशासनिक मुस्तैदी से ही लाखों लोगों की जान और फसलों को बचाया जा सकता है।
