कोविड की वापसी? ईरान युद्ध के कारण उपजे ऊर्जा संकट से निपटने के लिए एशिया ने निकाला 'पुराना नुस्खा'



  • -दक्षिण कोरिया में छोटे शावर और पाकिस्तान में स्कूल बंद
  • -कई देशों में वर्क फ्रॉम होम पर विचार शुरू

नई दिल्ली/रायटर्स। दुनिया भर में गहराते तेल संकट ने एशियाई देशों को एक बार फिर से उन नीतियों की ओर लौटने पर मजबूर कर दिया है, जो कोविड-19 महामारी के दौरान अपनाई गई थीं। मध्य-पूर्व में जारी युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी के कारण तेल की किल्लत इतनी बढ़ गई है कि कई देश अब 'वर्क फ्रॉम होमÓ और ऊर्जा बचत के कड़े नियमों को लागू कर रहे हैं। गौरतलब है कि एशिया अपनी जरूरत का 80त्न कच्चा तेल इसी मार्ग से मंगवाता है, जो 28 फरवरी से लगभग बंद है।

 संकट से निपटने के लिए विभिन्न देशों के अनोखे कदम:

  • दक्षिण कोरिया: सरकार ने जनता से अपील की है कि वे नहाने के समय में कटौती करें, फोन केवल दिन में चार्ज करें और वैक्यूम क्लीनर जैसे भारी उपकरणों का उपयोग केवल वीकेंड पर करें।
  • पाकिस्तान: ऊर्जा बचाने के उद्देश्य से स्कूलों को दो सप्ताह के लिए बंद कर दिया गया है और दफ्तरों को घर से काम करने के निर्देश दिए गए हैं।
  • थाईलैंड: प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को सूट और टाई पहनने से बचने को कहा है ताकि एयर कंडीशनर का तापमान 25 डिग्री से ऊपर रखा जा सके। साथ ही लिफ्ट की जगह सीढिय़ों के इस्तेमाल की सलाह दी गई है।
  • फिलीपींस और श्रीलंका: फिलीपींस ने 'ऊर्जा आपातकाल' घोषित कर दिया है, वहीं श्रीलंका ने ईंधन बचाने के लिए हर बुधवार को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है।

महंगाई से राहत के लिए सरकारी खजाना खुला

ईंधन की आसमान छूती कीमतों से जनता को बचाने के लिए सरकारों ने भारी सब्सिडी का एलान किया है:

जापान: पेट्रोल की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए 800 अरब येन का फंड जारी किया गया है।

न्यूजीलैंड: कम आय वाले परिवारों को हर हफ्ते 50 डॉलर की नकद सहायता देने का फैसला किया गया है।

ऑस्ट्रेलिया: पेट्रोल पंपों पर तेल खत्म होने और 'पैनिक बाइं (घबराहट में खरीदारी) को देखते हुए मुनाफाखोरी करने वालों पर भारी जुर्माना लगाने का कानून लाया गया है।

भारत की स्थिति: 'चिंताजनक पर नियंत्रण में

भारत में घरेलू रसोई गैस के लिए वेटिंग पीरियड बढ़कर 35 दिन तक पहुंच गया है। केंद्र सरकार का कहना है कि स्थिति चिंताजनक जरूर है, लेकिन फिलहाल नियंत्रण में है। भारत की नजरें भी होर्मुज जलमार्ग के खुलने पर टिकी हैं।

कोविड और अब में बड़ा अंतर ब्याज दरें

महामारी के दौरान अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए बैंकों ने ब्याज दरें घटाई थीं, लेकिन इस बार महंगाई के खतरे को देखते हुए ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों के केंद्रीय बैंक ब्याज दरें बढ़ा रहे हैं, जिससे आम आदमी पर दोहरा बोझ पड़ सकता है।

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