- -मालदीव बना चीन का नया ठिकाना
- -भारतीय पनडुब्बी मार्गों और सामरिक ठिकानों की जासूसी का खतरा
नई दिल्ली । पूरी दुनिया का ध्यान इस समय होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी तनाव और तेल आपूर्ति पर टिका है, लेकिन इसी बीच चीन ने बेहद चतुराई से भारतीय समुद्री सीमा के पास अपनी सक्रियता को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है। रक्षा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि चीन का एक और अत्याधुनिक 'अनुसंधान जहाज 'शी यान 6 हिंद महासागर क्षेत्र में प्रवेश कर चुका है। यह इस क्षेत्र में सक्रिय चीन का तीसरा बड़ा जहाज है, जो भारत की समुद्री सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती पेश कर रहा है।
ड्रैगन की 'डीप-सी जासूसी
'शी यान 6 ने सुंडा जलडमरूमध्य (इंडोनेशिया) के रास्ते प्रवेश किया है और अपना गंतव्य मालदीव की राजधानी माले बताया है। हाल के वर्षों में मालदीव चीनी जहाजों के लिए एक प्रमुख 'लॉजिस्टिक्स हबÓ के रूप में उभरा है।
तीन जहाजों की घेराबंदी
- -शी यान 6: समुद्र तल की मैपिंग (मैपिंग) के लिए।
- -दा यांग हाओ: अफ्रीकी तट के पास सक्रिय।
- -दा यांग यी हाओ: दिसंबर से अरब सागर और भारतीय तट के पास चक्कर लगा रहा है।
पनडुब्बी युद्ध की तैयारी
विशेषज्ञों का मानना है कि ये जहाज केवल वैज्ञानिक शोध नहीं कर रहे, बल्कि समुद्र के नीचे के रास्तों का नक्शा तैयार कर रहे हैं। इससे युद्ध की स्थिति में चीनी पनडुब्बियों को भारतीय सीमा के पास सुरक्षित छिपने और हमला करने में मदद मिलेगी।
भारत की चिंता और जवाबी कदम
श्रीलंका द्वारा भारतीय दबाव में चीनी जहाजों के रुकने पर पाबंदी लगाने के बाद अब चीन ने अपना पूरा ध्यान मालदीव और डिएगो गार्सिया जैसे रणनीतिक क्षेत्रों पर केंद्रित कर दिया है।
- चीन: लगभग 50 अनुसंधान जहाज (नौसेना से सीधे जुड़े)।
- भारत: मात्र 10 से 12 जहाज (नागरिक संस्थाओं द्वारा संचालित)।
भारत का जवाब: चीन की इस चुनौती से निपटने के लिए भारत अपने 'मत्स्य 6000Ó प्रोजेक्ट में तेजी ला रहा है। यह एक 'डीप-सीÓ सबमर्सिबल है जो 6,000 मीटर की गहराई तक जाकर भारत की सामरिक पकड़ को मजबूत करेगा।
