गुरुवार, 9 अप्रैल 2020

कोई भी विराट के प्रति नरम नहीं था : टिम पेन

मेलबोर्न। ऑस्ट्रेलिया की टेस्ट टीम के कप्तान टिम पेन ने पूर्व कप्तान माइकल क्लार्क के ऑस्ट्रेलियाई खिलाडिय़ों के भारतीय कप्तान विराट कोहली पर स्लेजिंग करने से डरने के आरोपों का सिरे से खंडन किया है। क्लार्क ने एक विवादास्पद बयान दिया था कि आईपीएल में अच्छी कीमत हासिल करने की वजह से ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी भारतीय कप्तान विराट के प्रति नरम रहते हैं और उनकी स्लेजिंग करने से डरते हैं। पेन की टीम को अपनी जमीन पर भारत के खिलाफ पिछली टेस्ट सीरीज में 1-2 से हार का सामना करना पड़ा था। भारत को अगली गर्मियों में टेस्ट सीरीज के लिए ऑस्ट्रेलिया का दौरा करना है। पूर्व कप्तान क्लार्क ने दरअसल एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि विराट के प्रति नरम रवैये की वजह से टिम के नेतृत्व वाली ऑस्ट्रेलियाई टीम टेस्ट सीरीज में हार गयी थी। क्लार्क ने कहा था कि यह ऐसा दौर था जब ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी विराट की स्लेजिंग करने से बच रहे थे क्योंकि वे शायद आईपीएल में अच्छी कीमत हासिल करना चाहते थे।
टिम ने क्लार्क के बयान का जवाब देते हुए कहा, "मैंने इस बारे में कभी सोचा ही नहीं कि कौन विराट के साथ नरमी से पेश आ रहा था या कौन विराट को आउट नहीं करना चाहता था। मुझे लगता है जिसके हाथ में गेंद थी या जो बल्लेबाजी कर रहा था, सभी का एक उद्देश्य अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर ऑस्ट्रेलिया के लिए मुकाबला जीतना था। टिम ने हाल ही में आयी 'द टेस्टÓ डाक्यूमेंट्री में टीम को बातचीत के दौरान विराट को अधिक न उकसाने की सलाह दी थी। उन्होंने कहा था कि भारतीय कप्तान को शांत रखने के अलावा और कोई बेहतर विकल्प नहीं था और क्लार्क ने भी यही सुझाव दिया था।टेस्ट कप्तान ने कहा, "वर्तमान स्थिति में आईपीएल मेरे लिए कोई बड़ी बात नहीं है इसलिए मेरे पास खोने के लिए कुछ नहीं है। हमारे खिलाड़ी जितनी बार भी मैदान पर खेलने के लिए जाते है, हमेशा अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देते है और मुझे पूरा विश्वास है कि कोई भी खिलाड़ी विराट के सामने खेलते हुए आईपीएल के बारे में नहीं सोचता है। पेन ने कहा, "आप जो मैदान पर एक दूसरे के खिलाफ जो बोलते है वो अधिकतर 99 फीसदी गलत होता है। कभी कभार आप किसी खिलाड़ी का ध्यान भटकाने में कामयाब हो जाते हो लेकिन अगर आप अच्छी गेंदबाजी या बल्लेबाजी नहीं कर रहे हो तो किसी भी बात का कोई फर्क नहीं पड़ता है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि हमारा पहला ध्यान अपनी प्रतिभा को मैदान पर लागू करना और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना होता है और इसके बाद मैदान पर अपनी रणनीति बदलना या एक-दूसरे का कुछ कहना होता है। उन्होंने कहा, "पिछले 12-18 महीने के दौरान हम दूसरे साथ हमेशा खड़े रहे है और अभी भी यही करते हैं। हम ऑस्ट्रेलियाई टीम की तरह कड़ी टक्कर देते है लेकिन कभी कभार हमें स्थिति के अनुसार आगे भी बढऩा होता और जिस तरह से हमने क्रिकेट खेला है मुझे उस पर बहुत गर्व है।

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