मंगलवार, 3 सितंबर 2019

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महिला प्रत्याशी व कर्मा-मंडावी परिवार का राजनैतिक भविष्य तय करेगा दंतेवाड़ा उपचुनाव


  • कांग्रेस ने तीसरी बार उतारा महिला प्रत्याशी,जबकि भाजपा ने पहली बार महिला प्रत्याशी पर लगाया दांव

जगदलपुर । दंतेवाड़ा विधानसभा उपचुनाव सीट के लिए इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है जब दो प्रमुख राष्ट्रीय राजनैतिक दल भाजपा-कांग्रेस दोनों ओर से महिला प्रत्याशी कर्मा-मंडावी परिवार से चुनावी रण में उतारा गया है। दोनों ही महिला प्रत्याशी होने के साथ ही नक्सलियों के द्वारा दोनों के पति महेंद्र कर्मा और भीमा मंडावी की हत्या कर दी गई थी, जिसके बाद शहीद महेंद्र कर्मा की पत्नी देवती कर्मा और शहीद भीमा मंडावी की पत्नी ओजस्वी मंडावी का राजनीति में इनका पदार्पण हुआ।  दंतेवाड़ा उपचुनाव 2019 में कांग्रेस की प्रत्याशी देवती कर्मा जहां तीसरी बार विधानसभा के चुनावी मैदान में उतरी हैं, वही ओजस्वी मंडावी पहली बार दंतेवाड़ा उपचुनाव में अपना भाग्य आजमा रही है। यह चुनाव दोनों ही महिला प्रत्याशी देवती कर्मा और ओजस्वी मंडावी के परिवार का राजनीतिक भविष्य भी तय करने जा रहा है।
कॉन्ग्रेस ने वर्ष 2013 में महेंद्र कर्मा के झीरम कांड में नक्सलियों  द्वारा  हत्या कर दिए जाने के बाद देवती कर्मा को अपना प्रत्याशी बनाकर विधानसभा चुनाव में उतारा था और वे सहानुभूति बटोरने में सफल हुईं तथा विधायक बनी थी। तत्पश्चात वर्ष 2018 विधानसभा चुनाव के कड़े मुकाबले में देवती कर्मा भाजपा के भीमा मंडावी से बहुत कम अंतर 2071 वोटों से हार गई थीं। भीमा मंडावी के नक्सली बारूदी विस्फोट में हत्या कर दिए जाने के बाद भाजपा द्वारा भीमा मंडावी की पत्नी ओजस्वी मंडावी को उपचुनाव में अपना प्रत्याशी बनाकर पहली बार महिला प्रत्याशी पर दांव खेला है। जबकि कांग्रेस ने देवती कर्मा पर तीसरी बार प्रत्याशी बनाकर कर्मा परिवार पर विश्वास जताया है।
बस्तर संभाग के राजनैतिक इतिहास में यह पहली बार हो रहा है कि दोनों ही राष्ट्रीय राजनीतिक दल भाजपा-कांग्रेस ने महिला प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है। बस्तर का राजनैतिक इतिहास भी पारिवारिक राजनैतिक घरानों से सामान्य तौर पर चलता रहा है, यही कारण है कि कर्मा-मंडावी परिवार के सदस्यों का नक्सलवाद की भेंट चढ़ जाने के बाद उनकी पत्नियों को सहानुभूति के लाभ के साथ ही राजनीतिक परिवारवाद को महत्व दिया गया है।
बस्तर के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में जहां विधानसभा की 12 में से 11 सीटें आरक्षित हैं। वहां परिवारवाद का बोल-बाला चलता है। भले ही भाजपा परिवारवाद के खिलाफ मुखर होकर अपना पक्ष रखती है, लेकिन बस्तर की राजनीति में परिवारवाद का महत्व हमेशा से स्वीकार किया जाता रहा है। इसका मुख्य कारण है, आदिवासी बाहुल्य बस्तर संभाग का यह क्षेत्र अशिक्षा, गरीबी और पिछड़ेपन से राजनैतिक गलियारे में पहचान बनाने वाले नेताओं का अभाव प्रमुख रूप से रहा है। इसीलिए आज भी राजनैतिक पृष्ठभूमि में स्थापित मनकूराम सोढ़ी, महेंद्र कर्मा, बलिराम कश्यप का परिवार बस्तर संभाग की राजनीति में अपना दखल बनाए हुए है। इसी कड़ी में भीमा मंडावी भी दक्षिण बस्तर की राजनीति में महेंद्र कर्मा को पराजित कर अपना एक अलग स्थान बनाने में कामयाब हुए थे, जिसे भीमा मंडावी की पत्नी ओजस्वी मंडावी उपचुनाव में अपने परिवार की प्रतिष्ठा को बनाए रखने के लिए मैदान में है। दंतेवाड़ा विधानसभा उपचुनाव 2019 महिला प्रत्याशी के साथ ही कर्मा-मंडावी परिवार के राजनैतिक भविष्य की दिशा-दशा तय करने वाला चुनाव होगा, जिसमें कौन अपने परिवार की प्रतिष्ठा को प्रतिस्थापित करता है यह देखना दिलचस्प होगा। 

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