रेत खदानों को अब राजधानी से मिलेगी मंजूरी


जगदलपुर। जिला स्तर पर पांच हेक्टेयर तक की खदानों के लिए पर्यावरण मंजूरी देने वाली जिला स्तरीय पर्यावरण कमेटी और जिला स्तरीय पर्यावरण मूल्यांकन समिति के अधिकार राष्ट्रीय हरित ट्रिब्यूनल ने छीन लिए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार राष्ट्रीय हरित ट्रिब्यूनल ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने अपने आदेश में रेत खदान को मंजूरी देने का अधिकार छग राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव आंकलन प्राधिकरण (सिया) को प्रदान किये हैं।  इस संबंध में उपसंचालक खनिज आरसी नेताम ने बताया कि रेत खदानों के संचालन की अनुमति प्राप्त करने के लिए अब संबंधित समितियों व ठेकेदारों को रायपुर स्थित माइनिंग कार्यालय जाना पड़ेगा। अब खदानों को चालू करने व रखने की अनुमति जिला स्तरीय पर्यावरण कमेटी (डिया) और जिला स्तरीय पर्यावरण मूल्यांकन समिति (डेक) नहीं दे पाऐंगी।  इस संबंध में यह विशेष तथ्य है कि राज्य स्तर से मिलने वाली अनुमति में समय लगता था, इसलिए 2016 में इसे जिला स्तर पर लागू किया गया था। जिससे स्थानीय स्तर पर खदानों के शुरू करने और संचालित करने की अनुमति यहीं कम समय में मिल पा रही थी। इस संबंध में रेत खदानों से मिलने वाली रायल्टी टैक्स को ग्राम पंचायत और नगरीय निकाय के द्वारा वसूला जा रहा है। इस राशि से ग्राम विकास के कई काम हो रहे हैं। लेकिन पिछले कुछ सालों से रायल्टी वसूली में लगातार कमी आ रही थी।
इस संबंध में खनिज इंस्पेक्टर दीपक तिवारी ने बताया कि एनजीटी द्वारा रोक लगा देने के बाद माइनिंग प्लान और पर्यावरणीय स्वीकृति के लिए ठेकेदारों को रायपुर ही जाना पड़ेगा।