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77 दिन बाद काम पर लौटे CBI निदेशक आलोक वर्मा, सेलेक्ट कमेटी में CJI गोगोई शामिल नहीं


नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आज आलोक वर्मा ने फिर से सीबीआई डायरेक्टर का पदभार ग्रहण किया। छुट्टी पर भेजे जाने के विवाद के 77 दिन बाद वर्मा सुबह सीबीआई कार्यालय पहुंचे और अपना कार्यभार संभाला। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तहत वर्मा सलेक्ट कमेटी के फैसले तक बतौर निदेशक किसी भी तरह के कोई नीतिगत फैसले नहीं ले सकते हैं। वर्मा जब सीबीआई दफ्तर पहुंचे तो नागेश्वर राव ने उनको रिसीव किया। नागेश्वर राव ने वर्मा की अनुपस्थिति में अंतरिम डायरेक्टर के पद को संभाला था। कोर्ट के फैसले के बाद राव की अंतरिम डायरेक्टरके तौर पर नियुक्ति रद्द कर दी गई है।




सेलेक्ट कमेटी गठित
सुप्रीम कोर्ट ने वर्मा पर आगे का फैसला सुनाने के लिए सेलेक्ट कमेटी गठित कर दी है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई सेलेक्ट कमेटी की बैठक में शामिल नहीं होंगे। सेलेक्ट कमेटी में सीजेआई, प्रधानमंत्री और नेता विपक्ष को होना था लेकिन सीजेआई रंजन गोगोई ने खुद को इससे अलग कर लिया है। उन्होंने इस हाईपावर कमेटी की बैठक के लिए जस्टिस एके सीकरी को नामांकित किया है। अब सेलेक्ट कमेटी की बैठक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विपक्षी नेता मल्लिकार्जुन खगड़े और जस्टिस सीकरी के बीच होगी। यह कमेटी ही आलोक वर्मा का भविष्य तय करेगी कि वे सीबीआई प्रमुख के पद पर रहेंगे या नहीं।



यह है पूरा मामला
वर्मा और उप विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ एजेंसी ने भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया था और दोनों अधिकारियों को छुट्टी पर भेजने वाला अक्टूबर का यह आदेश एजेंसी के इतिहास में सरकार के हस्तक्षेप का यह अपनी तरह का पहला मामला था। सरकार ने न्यायालय में यह कहकर अपने निर्णय को सही ठहराने की कोशिश की कि एजेंसी के दो वरिष्ठतम अधिकारी एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे थे ऐसे लड़ाई झगड़े में यह कदम उठाना आवश्यक था लेकिन शीर्ष अदालत ने उनकी यह दलील खारिज कर दी। आलोक कुमार वर्मा का केन्द्रीय जांच ब्यूरो के निदेशक के रूप में दो वर्ष का कार्यकाल 31 जनवरी को पूरा हो रहा है।

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