मेहमान पक्षियों के आगमन के सुमधुर कलरव से गूंजी बस्तर की फिजा


  •  पूरे मध्यभारत में अब बस्तर ही वह क्षेत्र बन गया है, जहां प्रवासी पक्षियों की सबसे ज्यादा 349 प्रजातियां देखने को मिल रही हैं
जगदलपुर । बस्तर के सुहावने मौसम के अनुसार इन दिनों संभाग के जंगल में विदेशी पक्षियों का तेजी से आगमन हो रहा है और उनके सुमधुर कलरवों से बस्तर की फिजा मनोरम हो उठी है। प्राणी विशेषज्ञों की मानें तो अब तक बस्तर में करीब डेढ़ सौ प्रवासी पक्षी डेरा डाल चुके हैं। आदिवासी बाहुल्य बस्तर साल द्वीपों का गढ़ माना जाता रहा है। अब साल वन रहे नहीं, जिसके चलते वन्य प्राणियों की संख्या में भारी कमी आयी है, इसीलिए यहां विदेशी मेहमान पक्षियों का जमावाड़ा हो रहा है।
बर्ड काउंट इंडिया के छत्तीसगढ़ प्रोजेक्ट असिस्टेंट और क्रो फ ाउंडेशन से ऑर्निथोलॉजिस्ट रवि नायडू ने बताया कि मध्यभारत में बस्तर प्रवासी पक्षियों के लिए अपार संभावनाएं हैं। यहां का वातावरण उनके लिए मुफ ीद है। कई ऐसे पक्षी भी मिले हैं, जो सरकारी दस्तावेजों में विलुप्त करार दे दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि भले ही कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में वन्यप्राणी न हों, लेकिन यह क्षेत्र पक्षियों के लिए मध्यभारत का सबसे अधिक समृद्धशाली क्षेत्र है। इन दिनों बस्तर में कड़ी ठंड पड़ रही है, इसीलिए सैकड़ों किमी का सफर तय कर यहां आने वाले विदेशी मेहमानों के लिए यह तापमान वातानुकूलित है। यही कारण है कि बस्तर में अब तक करीब डेढ़ सौ प्रवासी पक्षी पहुंच चुके हैं। ये पक्षी यूरोप, अफ्रीका, साइबेरिया, मंगोलिया, चीन, पेसिफि क पोल, उत्तरी-दक्षिणी धु्रव से पहुंचे हैं। बस्तर में अलग-अलग जगहों पर देखे गए इन पक्षियों का एक बड़ा जमावड़ा कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में भी देखा गया है।
पक्षी विशेषज्ञ राकेश पांडे ने बताया कि इनमें दुनिया के सबसे ऊंची उड़ान भरने वाले राजहंसों का झुंड, जिसे बार हैडेड गूस भी कहा जाता है, हिमालय को पार कर बस्तर पहुंचा है, जहां से वे ओडिशा की तरफ से आगे रवाना हो जाएंगे। पूरे मध्यभारत में अब बस्तर ही वह क्षेत्र बन गया है, जहां प्रवासी पक्षियों की सबसे ज्यादा प्रजातियां देखने को मिल रही हैं। पूरे छत्तीसगढ़ में प्रवासी पक्षियों की करीब 387 प्रजातियां देखने को मिली हैं, जिसमें से अकेले बस्तर में 349 प्रजातियों की आमद हुई है।
बत्तख की प्रजाति के गडवाल, गारगेनी, नॉर्थन पिनटेल, पाइड कक्कू (चातक), टैम्निक स्टिंट, कॉमन टील, रूडी सेल डक, टफ्टेड डक भी इन दिनों बस्तर में अपना बसेरा बनाए हुए हैं। साइबेरिया-मंगोलिया के साथ ही उत्तरी-दक्षिणी धु्रव से भी आते हैं पक्षी, इनके शिकारी परिंदे भी पहुंच जाते हैं। बस्तर यूरोप, अफ्र ीका, साइबेरिया, मंगोलिया, चीन, पेसिफि क पोल, उत्तरी-दक्षिणी धु्रव से आने वाले पक्षियों में कैंटिश प्लोवर, कॉमन ग्रीन शैंक, स्पॉटेड रेड शैंक, कॉमन रेड शैंक, यूरेशियन कल्र्यू, वाइट वैक्टेल, येलो वैक्टेल, साइबेरियन स्टोन चौट, कॉमन कक्कू, ब्लैक टेल्ड गॉडविट, कॉमन सैंडपाइपर, ग्रीन सैंडपाइपर, मार्श सैंडपाइपर, पेसिफि क गोल्डन प्लोवर, रिवर टर्न सहित अन्य शामिल हैं।
इन पक्षियों के शिकारी माने जाने वाले पक्षी बूटेड ईगल, मार्श हैरियर, पाइड हैरियर, मोतंगू हैरियर, पैराग्रीन फॉल्कन, जो यूरोपीय देशों से आते हैं यह दुनिया का सबसे तेज उडऩे वाला पक्षी माना जाता है, पहुंच जाता है। यही कारण है कि बस्तर में ठंड के दिनों में बड़ी संख्या में पक्षियों का कलरव जंगलों में गूंजता है।