कैंसर और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ाता है पटाखों का धुआं



दीवाली फेस्टिव पर पटाखों की आवाज सुनाई ना दे यह हो नहीं सकता क्योंकि लोगों का मानना है कि बिना पटाखे चलाए उनकी दीवाली अधूरी है लेकिन शायद आप इस बात की ओर इतनी सजगता से ध्यान नहीं दे रहे कि बिना सांस के जीना मुश्किल ही नामुमकिन है। पटाखों से निकला धुआ वातावरण को इस कद्र दूषित करता है। दूषित वातावरण का सीधा असर आपकी सेहत पर पड़ता है। इस समय दिल्ली व पंजाब जैसे साथ लगते राज्य बढ़ते वायु प्रदूषण की चपेट में हैं, जिसके चलते दमा, कैंसर, स्किन प्रॉब्लम जैसी कई बीमारियां सामने आ रही हैं। इसके अलावा भी लोग कई तरह की हैल्थ प्रॉब्लम से जूझ रहे हैं।
- धुएं के दुष्परिणाम
वातावरण में पटाखों के धुएं से एक दूषित सतह बन जाती हैं जिससे सांस लेने में दिक्कत, आंखों में लालगी, जलन, स्किन इरीटेशन जैसे प्रॉब्लम सबसे ज्यादा सामने आती हैं। बच्चे, बूढ़े, गर्भवती महिला और दिल व दमा के मरीज इसके जल्दी शिकार हो जाते हैं।

1. अस्थमा अटैक का खतरा
दमा या किसी भी तरह की सांस व स्किन की एलर्जी से पीड़ित मरीज पटाखों से दूर रहें। पटाखों में मौजूद छोटे-छोटे कण सांस फूलने के साथ फेफड़ों में सूजन भी करते हैं। पटाखों के धुएं में मौजूद विषाक्त कणों के फेफड़ों तक पहुंचने से अस्थमा या दमा का अटैक आ सकता है। दमा मरीजों को ऐसे वातावरण में सतर्क रहने की जरूरत है।

2. हार्टअटैक का बढ़ता खतरा
पटाखों में लैड नामक रसायन मौजूद होता है, जिससे हार्टअटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। पटाखों से निकलने वाला धुएं का सांस के जरिए शरीर में जाने से खून के प्रवाह में रुकावट आने लगती है। दिमाग तक पर्याप्त मात्रा में खून न पहुंचने के कारण व्यक्ति स्ट्रोक का शिकार हो सकता है। ऐसे में हार्ट अटैक के मरीजों को भी खास एहतियात बरतने की जरूरत होती है।

3. बच्चे और गर्भवती महिलाएं भी रहें दूर
बच्चे और गर्भवती महिलाओं को पटाखों के शोर व धुएं से बचकर रहना चाहिए। जहां पटाखों से निकला धुआं छोटे बच्चों में सांस की समस्याएं पैदा करता है। वहीं इससे गर्भपात की संभावना भी बढ़ जाती है। इसलिए बच्चों और गर्भवती महिलाओं को भी ऐसे समय में घर पर ही रहना चाहिए।

4. कैंसर का खतरा
पटाखे को रंग-बिरंगा बनाने के लिए रेडियोएक्टिव और जहरीले पदार्थों का इस्तेमाल किया जाता है। ये पदार्थ धुएं मिलकर सांस के जरिए शरीर में चले जाते हैं, जिससे कैंसर होने की आशंका बढ़ जाती है।

5. आंख और गले की समस्याएं
धुएं से हवा में पीएम बढ़ जाता है और जब लोग इसके संपर्क में आते हैं तो उन्हें आंख, नाक और गले की समस्याएं हो सकती हैं। पटाखों का धुआं, सर्दी जुकाम और एलर्जी का कारण भी बन सकता है। इसके अलावा इससे छाती व गले में कन्जेशन भी हो सकता है।

6. तनाव और हाई ब्लड प्रेशर का कारण
दीवाली में पटाखों का धुआं और शोर तनाव, अवसाद, हाई ब्लड प्रेशर, सुनने में परेशानी, कमजोर याददाश्त, अनिद्रा आदि का कारण भी बन सकता है। दरअसल, पटाखों का हानिकारक धुआं और शोर दिल व दिमाग के लिए अचअछी नहीं है इसलिए इससे इन सभी बीमारियों का खतरा 10 गुणा बढ़ जाता है।



धुआरहित पटाखों का करें चुनाव
अगर आप बच्चों को खुश करने या शौक के लिए कुछ समय के लिए पटाखे चलाना चाहते हैं तो मार्कीट में इको-फ्रैंडली पटाखे उपलब्ध हैजिसमें धुआ ना के बराबर निकलता हो। बड़े पटाखें होंगे तो धुआं और धमाका भी उतना ही अधिक होगा इसलिए इन्हें चलाने से परहेज करें और वातावरण को शुद्ध रखने में अपना योगदान दें।