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दोपहर साढ़े 12 बजे ली 24 दिन के बच्चा हाथी ने अंतिम सांस


  • पोस्टमार्टम करने वाले डाक्टरों ने कहा-हेड इंजूरी से हुई मौत
महासमुंद । जिले के पासिद (सिरपुर) गांव के कैंप में रखे गए गंभीर रूप से घायल बच्चा हाथी की मंगलवार दोपहर करीब साढ़े 12 बजे उपचार के दौरान मौत हो गई। वन्य जीव संरक्षण से जुड़े चिकित्सकों के अधिकतम प्रयास के बावजूद हाथी के बच्चे को नहीं बचाया जा सका । बच्चा हाथी के अंतिम सांस लेने तक उपचार करने वाले चिकित्सक डा योगेश्वर पटेल (वीएएस) का कहना है कि करीब 24 दिन उम्र के इस बच्चा हाथी के सिर में अंदरूनी चोटें थी । सिर का हड्डी टूटा हुआ था। यही मौत का कारण बना । बच्चा हाथी की मौत के बाद डा योगेश्वर पटेल, डा सीएस चंद्राकर और डा जगमोहन चंद्राकर की तीन सदस्यी टीम ने पोस्टमार्टम किया । जिसमें बच्चा हाथी के बुरी तरह से जख्मी होने का खुलासा हुआ । चार दिन तक लगातार उपचार के बावजूद बच्चा हाथी को डाक्टर बचा नहीं पाए। इधर, महासमुंद वनमंडलाधिकारी आलोक तिवारी ने बताया कि पीएम के बाद बच्चा हाथी को पासिद के जंगल में दफना दिया गया है।
महानदी को पार करने से हुआ गंभीर
23-24 नवंबर की दरम्यानी रात सिरपुर के जंगल से आगे बढ़ते हुए अछरीडीह होते हुए हाथियों का दल समोदा बैराज के पास महानदी को पार कर रायपुर की ओर बढ़ रहे थे। आरंग ब्लाक के चपरीद गांव के पास महानदी पार करके हाथियों का दल रायपुर जिला में प्रवेश किया। इस बीच सुबह-सुबह कीचड़ में फंसे इस बच्चा हाथी को गंभीर हालत में ग्रामीणों ने निकाला । तब तक बच्चा हाथी बहुत ज्यादा पानी पी चुका था। अनुमान लगाया जा रहा है कि महानदी पार करते समय गहरे पानी में चले जाने से वह डूबते-डूबते बचा था। खेत-खार पार करते हुए नवजात हाथी किसानों के खदेड़े जाने से बड़े हाथियों के दल के साथ भाग रहा था। इससे खेत के मेड़ अथवा किसी पेड़ आदि से टकराने से उसके सिर में गंभीर चोट आने का अनुमान वन अमला लगा रहा है। पैर में भी जगह-जगह गहरे जख्म थे। जिसमें कीड़े बिलबिला रहे थे। इससे पहले दिन ही वन्य जीव चिकित्सक डा जेके जडिय़ा ने बच्चा हाथी की हालत चिंताजनक घोषित कर दिया था। बावजूद, चिकित्सकों की टीम ने हार नहीं मानी और उपचार निरंतर जारी रखा। चार दिन के नियमित उपचार के बावजूद बच्चा हाथी को बचाया नहीं जा सका ।
बढ़ गई किसानों की मुसीबत
उधर, सिरपुर क्षेत्र के हाथी प्रभावित गांव कुकराडीह, लहंगर और परसाडीह के खेतों में 26-27 नवंबर की दरम्यानी रात हाथियों के 16 सदस्यी दल ने जमकर उत्पात मचाया। तीनों गांव के आधा दर्जन से अधिक किसानों के खेतों में धान फसल को पूरी तरह से नष्ट कर दिया। हाथी भगाओ फसल बचाओ समिति के संयोजक राधेलाल सिन्हा ने बताया कि बीते कुछ दिनों से लहंगर-पीढ़ी के जंगल में 16 हाथियों का दल डेरा जमाए हुए हैं। 27 नवंबर मंगलवार को भी शाम सात बजे तक हाथियों को लहंगर के बघर्रा नाला के पास देखा गया है। किसानों का कहना है कि अपने बच्चे को ढूंढते हुए हाथियों का यह दल इस क्षेत्र में लंबे समय तक डेरा डालकर उनकी फसल को चौपट करते रहेगा, इसे लेकर किसान बहुत परेशान हैं।
जान जोखिम में डालकर कर रहे पहरेदारी
हाथियों के दल के लहंगर में होने की खबर मिलने के बाद ग्राम लहंगर के 40 व्यक्ति खेत-खार की ओर जाने वाले रास्ते पर रातभर पहरेदारी कर रहे हैं। जान जोखिम में डाल रतजगा कर किसान अपनी फसल को बचाने में लगे हैं। किसान मिट्टी तेल, जले आइल और टॉर्च लेकर रखवाली कर रहे हैं। रखवाली करने वालों के लिए गांव में आपस में चंदा करके राशि एकत्र की गई है। सामुदायिक सहभागिता से फसल बचाने किसान जूझ रहे हैं। सिरपुर क्षेत्र में मानव और हाथियों के बीच का यह संघर्ष अंतहीन हो गया है। इसे लेकर ग्रामीणों में वन विभाग के प्रति आक्रोश पनपते जा रहा है।  

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