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चक्रवात तूफान का 'तितली' नाम, ऐसे होता है तूफानों का नामकरण





भुवनेश्वर । ओडिशा के गंजम और गजपति जिलों में आज सुबह दस्तक देने के बाद बेहद प्रचंड चक्रवात तितली के कारण पेड़ और खंभे उखड़ गए तथा कच्चे मकान क्षतिग्रस्त हो गए। तितली तूफान के चलते ओडिशा के तीन राज्यों में भारी बारिश हुई। तितली के ओडिशा तट पर आने के बाद 145 किलोमीटर/घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं। वहीं तितली तूफान को लेकर एक सवाल जो सभी के जेहन में है वो यह कि इस चक्रवर्ती तूफान का नाम तितली किसने रखा। तो आपको बता दें कि इस चक्रवात तूफान का तितली नाम पाकिस्तान ने रखा है।

इसलिए होता है नामकरण
चक्रवात तूफान का नामकरण इसलिए किया जाता है ताकि लोगों को इसके बारें में आसानी से चेतावनी दी जा सके। इससे होने वाले खतरे के बारे में लोगों को जल्द से जल्द सतर्क किया जा सके और संदेश आसानी से लोगों तक पहुंचाया जा सके ताकि सरकार और लोग इसे लेकर बेहतर प्रबंधन और तैयारियां कर सकें। इन तूफानों का नाम छोटा रखा जाता है ताकि ये याद रहें।

ये 8 देश रखते हैं नाम
1953 से मायामी नेशनल हरीकेन सेंटर और वर्ल्ड मेटीरियोलॉजिकल ऑर्गनाइजेशन (डब्लूएमओ) तूफ़ानों और उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के नाम रखता रहा है। लेकिन उत्तरी हिंद महासागर में उठने वाले चक्रवातों का कोई नाम नहीं रखा गया था। ऐसे में भारत की पहल पर 2004 में हिंद महासागर क्षेत्र के आठ देशों ने तूफानों के नामकरण की व्यवस्था शुरू की। बांग्लादेश, भारत, मालदीव, म्यांमार, ओमान, पाकिस्तान, थाईलैंड और श्रीलंका इनमें शामिल हैं। भारत ने अब तक 32 तूफानों में से चार को नाम दिया है- लहर, मेघ, सागर और वायु। वहीं पाकिस्तान की तरफ से मंजूर नामों में फानूस, नर्गिस है।

ये नाम रहे चर्चा में
हुदहुद, लैला, निलोफर, वरदा, कैटरीना, नीलम, फैलीन, हेलन।

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