नई दिल्ली। अमेरिका की फेडरल ट्रेड कमीशन (FTC) की पूर्व प्रमुख लीना खान ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कंपनियों के स्व-नियमन (Self-Regulation) को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। उनका कहना है कि बिग टेक कंपनियों को खुद अपनी निगरानी करने की छूट देना एक "नाकाम साबित हो चुका" तरीका है। उन्होंने AI के बढ़ते जोखिमों से निपटने के लिए नई जांच, मौजूदा कानूनों के सख्ती से पालन और नए कानूनों के निर्माण की आवश्यकता पर जोर दिया है।
स्व-नियमन का पुराना मॉडल और सोशल मीडिया की विफलता
लीना खान ने स्पष्ट किया कि उन्नत AI प्रणालियों के दौर में स्व-नियमन की गलती को दोहराना बेहद खतरनाक होगा।
इतिहास से सबक: करीब एक दशक पहले सोशल मीडिया कंपनियों ने भी तर्क दिया था कि उन पर मौजूदा नियम लागू नहीं होते और वे अपनी निगरानी खुद करेंगी।
मेटा (Meta) का उदाहरण: खान ने बताया कि इस स्व-नियमन के कारण मेटा जैसी कंपनियों ने अपने उत्पादों से बच्चों को होने वाले गंभीर नुकसान के सबूत छिपाए। बिना पर्याप्त सरकारी निगरानी के तकनीकी विस्तार ने समाज को कई तरह के नुकसान पहुंचाए हैं।
स्वैच्छिक व्यवस्था बनाम कानूनी बाध्यता
यह बहस ऐसे समय में तेज हुई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में प्रमुख तकनीकी नेताओं से मुलाकात के बाद AI सुरक्षा के लिए स्वैच्छिक व्यवस्था का समर्थन किया है। ट्रंप का मानना है कि कंपनियां खुद और एक-दूसरे की निगरानी कर AI को सुरक्षित रखेंगी। तकनीकी कंपनियों ने आंतरिक नियंत्रण और बाहरी ऑडिट लागू करने पर सहमति तो जताई है, लेकिन यह समझौता कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है।
स्वायत्त (Autonomous) AI प्रणालियों का बढ़ता खतरा
AI के तेजी से स्वायत्त होने से चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं।
- ओपनएआई (OpenAI) का कदम: हाल ही में OpenAI ने अपने नवीनतम मॉडल की रिलीज को रोक दिया था क्योंकि यह कंपनी के निर्धारित सुरक्षा मानकों और अनुमति के दायरे में खरा नहीं उतरा था।
- सुरक्षा में सेंध: ऐसे कई शोध सामने आए हैं जिनमें AI एजेंटों द्वारा सरकारी वेबसाइटों में सेंध लगाने की कोशिश की गई है।
OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन ने भी माना है कि AI के स्वचालन (Automation) की गति बढ़ने के साथ ही इसके व्यापक जोखिमों को लेकर बेहद सावधानी बरतने की जरूरत है।
मौजूदा कानूनों के इस्तेमाल और नए नियमों की मांग
लीना खान के अनुसार, वाशिंगटन को कार्रवाई करने के लिए किसी नई नियामक व्यवस्था के तैयार होने का इंतजार नहीं करना चाहिए।
मौजूदा कानूनों का प्रयोग: उत्पाद दायित्व (Product liability), उपभोक्ता संरक्षण, साइबर सुरक्षा और सार्वजनिक उपद्रव से जुड़े मौजूदा कानूनों को AI कंपनियों पर तुरंत लागू किया जाना चाहिए। केवल नई तकनीक होने के कारण कंपनियों को जवाबदेही से छूट नहीं दी जा सकती।
अधिकारियों की जांच: यदि AI एजेंट खतरनाक व्यवहार करते हैं, तो कंपनियों और उनके अधिकारियों की जांच होनी चाहिए कि उन्हें इन खतरों की कितनी पूर्व जानकारी थी।
संसद से अपील: खान ने अमेरिकी कांग्रेस से नए कानून बनाने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि अमेरिका को रेल, दवा और परमाणु ऊर्जा जैसे जोखिमपूर्ण लेकिन परिवर्तनकारी क्षेत्रों को रेगुलेट करने का पुराना अनुभव है।
सीनेटर बर्नी सैंडर्स, सांसद प्रमिला जयपाल और ग्रेग कैसर जैसे नेता पहले से ही AI से जुड़े संभावित कानूनों पर काम कर रहे हैं। इसके अलावा, राज्य स्तर के अटॉर्नी जनरल भी AI कंपनियों की जवाबदेही तय करने में एक अहम भूमिका निभा सकते हैं।
