नई दिल्ली। स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाइ पार्मेलीन अपनी तीन दिवसीय राजकीय यात्रा पर भारत पहुंच चुके हैं। सोमवार को राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में उनका औपचारिक रूप से भव्य स्वागत किया गया, जहां राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी गर्मजोशी से अगवानी की। यह दौरा दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के उद्देश्य से बेहद अहम माना जा रहा है।
- निमंत्रण: पीएम मोदी के विशेष निमंत्रण पर तीन दिवसीय राजकीय यात्रा।
- फोकस: व्यापार, निवेश, विज्ञान-प्रौद्योगिकी, नवाचार और मोबिलिटी को बढ़ावा देना।
- प्रमुख कार्यक्रम: 7 अक्टूबर को दूसरे 'भारत-EFTA प्रॉस्पेरिटी समिट' में भागीदारी।
- पिछला दौरा: इसी साल फरवरी 2026 में 'AI इम्पैक्ट समिट' के लिए नई दिल्ली आए थे।
भव्य स्वागत और उच्च स्तरीय बैठकें
राष्ट्रपति पार्मेलीन के साथ वरिष्ठ अधिकारियों और व्यापारिक दिग्गजों का एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है। सोमवार को दिन के समय उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ विस्तृत द्विपक्षीय वार्ता निर्धारित है। इस बैठक में दोनों नेता द्विपक्षीय सहयोग की प्रगति की समीक्षा करेंगे और क्षेत्रीय व वैश्विक मुद्दों के साथ-साथ बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग को लेकर भी चर्चा करेंगे।
इसके अतिरिक्त, स्विस राष्ट्रपति का भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात का कार्यक्रम है, जो उनके सम्मान में एक आधिकारिक भोज की मेजबानी करेंगी। यात्रा के दौरान विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर भी राष्ट्रपति पार्मेलीन से विशेष मुलाकात करेंगे।
व्यापार, निवेश और तकनीक पर रहेगा जोर
इस राजकीय यात्रा का प्राथमिक उद्देश्य भारत और स्विट्जरलैंड के बीच आर्थिक और तकनीकी संबंधों को और प्रगाढ़ करना है। व्यापार, निवेश, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार (इन्नोवेशन) जैसे क्षेत्रों में नई संभावनाओं को तलाशने पर विशेष जोर दिया जाएगा। इसके साथ ही दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क (People-to-people contact) और मोबिलिटी (आवाजाही) को सुगम बनाने पर भी चर्चा होगी।
भारत-EFTA प्रॉस्पेरिटी समिट की अहमियत
यह दौरा 7 अक्टूबर को होने वाले दूसरे 'भारत-EFTA प्रॉस्पेरिटी समिट' के लिहाज से भी बेहद खास है। स्विस राष्ट्रपति इस समिट में हिस्सा लेंगे, जो भारत-EFTA व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते (TEPA) के लागू होने की पहली वर्षगांठ का प्रतीक है। विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) देशों में स्विट्जरलैंड भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक और निवेश भागीदार है, जो इस समझौते को दोनों देशों के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण बनाता है।
भारत और स्विट्जरलैंड के बीच हमेशा से मधुर और दोस्ताना संबंध रहे हैं। नियमित उच्च-स्तरीय दौरों ने इन संबंधों को और मजबूत किया है। इससे पहले भारत के राष्ट्रपति ने 2019 में स्विट्जरलैंड की राजकीय यात्रा की थी, जबकि प्रधानमंत्री मोदी 2016 और 2018 में आधिकारिक दौरे पर वहां जा चुके हैं। यह वर्तमान दौरा आपसी हितों के नए क्षेत्रों में साझेदारी के नए दरवाजे खोलने का काम करेगा।
