बेंगलुरु। केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने युवाओं से ‘सेवा’ की भावना को नवाचार से जोड़कर वास्तविक जीवन की समस्याओं की पहचान करने और उनके व्यावहारिक व बड़े स्तर पर लागू किए जा सकने वाले समाधान विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इससे युवा विकसित भारत@2047 के निर्माण में अपनी भागीदारी और योगदान दे सकेंगे। जोशी ने भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु में दक्षिण क्षेत्र के लिए ‘सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज’ (SFIC) का उद्घाटन करते हुए यह बात कही। उन्होंने इस पहल की वेबसाइट और पंजीकरण पोर्टल भी लॉन्च किया।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ‘सेवा’ का वास्तविक अर्थ उसे कार्य के रूप में सामने लाना है। किसी समस्या को समझना और उसका ऐसा नवाचार आधारित समाधान तैयार करना, जिसे बड़े स्तर पर लागू किया जा सके, सेवा की महत्वपूर्ण अभिव्यक्ति है। भारत की युवा आबादी का उल्लेख करते हुए जोशी ने कहा कि देश की करीब 65 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम उम्र की है। उन्होंने कहा कि भारत के पास ऐसी पीढ़ी है जो जिज्ञासु है, आत्मविश्वासी है और तकनीक के इस्तेमाल में सहज है। युवाओं की इस जिज्ञासा को उपयोगी कार्य में बदलने के लिए उन्हें उचित अवसर देना जरूरी है।
उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि NEP में आलोचनात्मक सोच, रचनात्मकता, अनुभव आधारित सीखने और समस्या समाधान को शिक्षा के केंद्र में रखा गया है। इसी सोच के तहत विद्यार्थियों को कम उम्र से ही प्रयोग करने, चीजें बनाने और नवाचार करने के अवसर दिए जा रहे हैं।
जोशी ने बताया कि सरकार देश में मजबूत नवाचार व्यवस्था तैयार करने के लिए 10,000 से अधिक अटल टिंकरिंग लैब, करीब 17,300 संस्थान नवाचार परिषद और स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन जैसी पहलों को बढ़ावा दे रही है।
उन्होंने कहा कि ‘सेवा’ की भावना से निर्देशित नवाचार विकसित भारत@2047 के लक्ष्य में सार्थक योगदान दे सकता है। उन्होंने स्टार्टअप और उद्योग जगत के भागीदारों से चैलेंज के जरिए सामने आने वाले युवा नवाचारकर्ताओं के साथ जुड़ने की अपील की।
केंद्रीय मंत्री ने SFIC की वेबसाइट पर एक राष्ट्रीय संग्रह तैयार करने का भी सुझाव दिया, ताकि अच्छे समाधानों के लिए भविष्य में मार्गदर्शन, उन्हें अपनाने और बड़े स्तर पर लागू करने की प्रक्रिया को मदद मिल सके। उन्होंने IISc बेंगलुरु, भाग लेने वाले संस्थानों, शिक्षकों, स्टार्टअप और इस पहल से जुड़े सभी लोगों को बधाई दी। उन्होंने उम्मीद जताई कि दिसंबर 2026 में नई दिल्ली में होने वाले राष्ट्रीय फाइनल में देशभर से मजबूत समाधान सामने आएंगे।
IISc बेंगलुरु को दक्षिण क्षेत्र का नोडल संस्थान बनाया गया है। यह कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, पुडुचेरी, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप में तकनीकी मूल्यांकन और मार्गदर्शन में सहयोग करेगा।
SFIC के तहत स्कूलों, आईटीआई, पॉलिटेक्निक, कॉलेज और विश्वविद्यालयों के विद्यार्थी तथा युवा नवाचारकर्ता पांच राष्ट्रीय विषयों पर समाधान पेश कर सकेंगे। इनमें स्वच्छ और टिकाऊ भारत, समृद्ध किसान-समृद्ध भारत, स्वस्थ और समावेशी भारत, शिक्षित और कुशल भारत तथा सुरक्षित भारत शामिल हैं।
चैलेंज में दो समाधान श्रेणियां भी रखी गई हैं। पहली श्रेणी में उत्पाद या तकनीकी समाधान और दूसरी में कारोबारी मॉडल या शासन से जुड़ा समाधान शामिल है। इसका उद्देश्य अच्छे विचारों को केवल प्रतियोगिता तक सीमित न रखकर मार्गदर्शन, नए उद्यमों को बढ़ावा देने और वास्तविक जीवन में उनके उपयोग के रास्ते उपलब्ध कराना है।
SFIC के लिए पंजीकरण 25 सितंबर से 24 अक्टूबर 2026 तक खुले रहेंगे। राष्ट्रीय फाइनल दिसंबर 2026 में नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा।
कार्यक्रम में IISc बेंगलुरु के निदेशक प्रो. गोविंदन रंगराजन, उच्च शिक्षा विभाग के अतिरिक्त सचिव अनंदराव वी. पाटिल और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के सचिव प्रो. श्यामा रथ समेत NIT और अन्य संस्थानों के निदेशक एवं प्रतिनिधि, शिक्षक, उद्योग और स्टार्टअप क्षेत्र के प्रतिनिधि, विद्यार्थी तथा युवा नवाचारकर्ता मौजूद रहे।
