नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने उपराष्ट्रपति भवन में इंडियन डिफेंस एस्टेट्स सर्विस (2025 बैच) के प्रोबेशनर्स से बातचीत की और उनसे देश की सेवा के इस अवसर का पूरी लगन, ईमानदारी और सार्वजनिक जिम्मेदारी की मजबूत भावना के साथ सर्वोत्तम उपयोग करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि रक्षा संपदा प्रशासन राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिकों पर केंद्रित शासन के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी है।
छोटे शहरों से आने वाले युवाओं के लिए प्रेरक अवसर
उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रोबेशनर्स में से कई छोटे शहरों से आए हैं, जो यह दर्शाता है कि लगन और कड़ी मेहनत के जरिए कथित बाधाओं को पार किया जा सकता है। उन्होंने युवा अधिकारियों से अपनी उपलब्धि पर गर्व करने के साथ-साथ लोक सेवक के रूप में उन्हें सौंपी गई जिम्मेदारियों के प्रति हमेशा सजग रहने को कहा।
18 लाख एकड़ रक्षा भूमि के प्रबंधन की जिम्मेदारी
देशभर में लगभग 18 लाख एकड़ रक्षा भूमि के प्रबंधन में डिफेंस एस्टेट्स ऑर्गनाइज़ेशन की महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि इसकी जिम्मेदारी केवल राष्ट्रीय संपत्तियों की सुरक्षा तक सीमित नहीं है। इसमें नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराना, रक्षा बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाना और सशस्त्र बलों की ऑपरेशनल तैयारी में सहयोग करना भी शामिल है।
ई-छावनी से स्मार्ट गवर्नेंस को बढ़ावा
सी. पी. राधाकृष्णन ने डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में डिफेंस एस्टेट्स ऑर्गनाइज़ेशन की पहल, विशेष रूप से ‘ई-छावनी’ की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस पहल ने छावनियों में स्मार्ट गवर्नेंस और एकीकृत जन-सेवा वितरण को मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), जीआईएस, ड्रोन सर्वे, सैटेलाइट इमेजिंग, ऑटोमेटेड चेंज डिटेक्शन और 3-डी विजुअलाइजेशन जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल रक्षा भूमि प्रबंधन की सटीकता, पारदर्शिता और कार्यक्षमता को काफी बेहतर बना सकता है।
तकनीक जवाबदेही की जगह नहीं ले सकती
तकनीक के साथ मानवीय जिम्मेदारी की जरूरत पर जोर देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा, “तकनीक को जवाबदेही को मजबूत करना चाहिए, न कि उसकी जगह लेनी चाहिए।” उन्होंने प्रोबेशनर्स से अपने कर्तव्यों के निर्वहन में अडिग रहने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि तकनीक भले ही फेल हो जाए, लेकिन एक अधिकारी की जिम्मेदारी की भावना और दृढ़ता कभी कम नहीं होनी चाहिए।
लगातार सीखने और क्षमता निर्माण पर जोर
तेजी से बदलते तकनीक और विज्ञान के माहौल का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने युवा अधिकारियों से अपने ज्ञान और कौशल को लगातार बेहतर बनाने का आह्वान किया। उन्होंने निरंतर क्षमता निर्माण के लिए आईजीओटी कर्मयोगी को महत्वपूर्ण मंच बताया और प्रोबेशनर्स को नए विचारों तथा नवाचार के प्रति खुला नजरिया रखने के लिए प्रोत्साहित किया।
कानून की जानकारी के साथ चरित्र और नैतिकता भी जरूरी
मशहूर तमिल कवि और दार्शनिक तिरुवल्लुवर का उल्लेख करते हुए सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि शिक्षा का वास्तविक अर्थ तभी सामने आता है, जब उसका प्रभाव व्यक्ति के व्यवहार में दिखाई दे। उन्होंने कहा कि कानूनों, प्रक्रियाओं और शासन के ढांचे की जानकारी के साथ चरित्र, दयालुता, ईमानदारी और नैतिक आचरण भी जरूरी है। उन्होंने युवा अधिकारियों को सलाह दी कि वे अपने वरिष्ठों की बात मानें, लेकिन किसी अनुचित दबाव के बिना स्वतंत्र रूप से काम करें। साथ ही उन्होंने फाइलों का समय पर निपटारा सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।
