- ग्रामीण विकास, डेयरी और स्वरोजगार से जनजातीय क्षेत्रों को मिलेगी नई पहचान-कृषि मंत्री
- नैनो यूरिया के उपयोग और फसल विविधिकरण अपनाने का किया आह्वान
रायपुर । आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम ने धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत बलरामपुर में आज आयोजित कार्यक्रम में, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 8 करोड़ 17 लाख 67 हजार की राशि के 4 विभिन्न सड़क निर्माण कार्यों का शिलान्यास किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जनजातीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास के लिए आधारभूत सुविधाओं के विस्तार के साथ-साथ किसानों और ग्रामीणों की आय बढ़ाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।
मंत्री श्री नेताम ने कहा कि विभिन्न योजनाओं के माध्यम से अधिकांश पंचायतों में विकास कार्य स्वीकृत किए जा चुके हैं तथा शेष महत्वपूर्ण कार्यों को भी प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मकरो पीडब्ल्यूडी रोड, परसुवार पीडब्ल्यूडी रोड से करीचल गली, भैरोपुर पीएमजीएसवाई रोड से कोड़ाखूपारा तथा भैरोपुर पीडब्ल्यूडी रोड से चेमी-चबनपुर सहित अनेक सड़क निर्माण कार्य करोड़ों रुपये की लागत से स्वीकृत किए गए हैं। इनमें कुछ सड़कें तकनीकी कारणों से वर्षों से लंबित थीं, जिन्हें भारत सरकार के स्तर पर विशेष प्रयास कर स्वीकृति दिलाई गई। इन सड़कों के निर्माण से दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों में आवागमन सुगम होगा तथा शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार तक लोगों की पहुंच आसान बनेगी।
मंत्री श्री नेताम ने कहा कि क्षेत्र में कॉलेज भवन, थाना एवं चौकी के निर्माण कार्य भी स्वीकृत हो चुके हैं। भूमि संबंधी प्रक्रिया पूर्ण होते ही कॉलेज भवन का निर्माण प्रारंभ किया जाएगा, जिससे क्षेत्र के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा की बेहतर सुविधा उपलब्ध होगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने बलरामपुर जिले को राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) की डेयरी विकास योजना से जोड़ते हुए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। प्रारंभिक चरण में रामचंद्रपुर एवं बलरामपुर विकासखंड में दूध संग्रहण केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि डेयरी गतिविधियों से किसानों, महिलाओं और युवाओं की आय में वृद्धि होगी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
मंत्री श्री नेताम ने स्व-सहायता समूहों की महिलाओं एवं ग्रामीणों से डेयरी, बकरी पालन, देसी एवं कड़कनाथ मुर्गी पालन तथा सुअर पालन जैसे आजीविका आधारित व्यवसाय अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इन गतिविधियों के माध्यम से ग्रामीण परिवार आत्मनिर्भर बनेंगे और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। उन्होंने किसानों से मौसम की अनिश्चितता को देखते हुए धान पर पूर्ण निर्भरता कम करने तथा मक्का, अरहर, उड़द, तिल सहित कम पानी में तैयार होने वाली दलहनी एवं तिलहनी फसलों की खेती को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने कहा कि बदलती जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप फसल विविधीकरण अपनाकर किसान संभावित नुकसान से बच सकते हैं।
