विकसित भारत 2047′ के लिए मजबूत डिजिटल इकोसिस्टम जरूरी : विशेषज्ञ



 नई दिल्ली । भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था देश की भविष्य की आर्थिक और सामाजिक प्रगति का मजबूत आधार बन चुकी है। राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित डिजिटल पेमेंट्स कॉन्क्लेव में विशेषज्ञों ने कहा कि डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई), डिजिटल पेमेंट और नई तकनीकों का प्रभावी उपयोग भारत को विकसित अर्थव्यवस्था बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।

डिजिटल इकोनॉमी को बताया भविष्य का प्रमुख स्तंभ

राष्ट्रीय राजधानी में चिंतन रिसर्च फाउंडेशन (सीआरएफ) ने इकिगाई लॉ और कोआन एडवाइजरी ग्रुप के साथ मिलकर डिजिटल पेमेंट्स कॉन्क्लेव का आयोजन किया। कार्यक्रम में सीआरएफ के सदस्य संजीव अहलूवालिया ने कहा कि डिजिटल अर्थव्यवस्था भारत की आर्थिक और सामाजिक प्रगति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुकी है। उन्होंने वित्तीय समावेशन बढ़ाने और आर्थिक दक्षता में सुधार के लिए डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल पेमेंट्स की अहम भूमिका पर जोर दिया।

मानव पूंजी और संस्थागत भरोसा जरूरी

इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकोनॉमिक रिलेशंस (आईसीआरआईईआर) के विजिटिंग प्रोफेसर दीपक मिश्रा ने कहा कि डिजिटलाइजेशन केवल तकनीक अपनाने से संभव नहीं है। इसके लिए मानव पूंजी, संस्थागत भरोसे और लगातार निवेश की मजबूत नींव जरूरी है। उन्होंने कहा कि आज एआई का इस्तेमाल करने वाले लोग ही भविष्य के इनोवेटर बनेंगे और उभरती तकनीकों के साथ समझदारी से जुड़ना समय की मांग है।

भरोसे पर आधारित है भारत का डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर

शिव नादर यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ ह्यूमैनिटीज एंड सोशल साइंसेज के डीन रजत कथुरिया ने कहा कि भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर भरोसे पर आधारित है। उन्होंने कहा कि रिसर्च, डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर और हाई-वैल्यू डिजिटल सेवाओं के जरिए उत्पादकता बढ़ाने की बड़ी संभावना है। हालांकि उन्होंने आगाह किया कि तकनीकी प्रगति समावेशी होनी चाहिए और इसमें पहचान की सुरक्षा, सहमति तथा एक्सेसिबिलिटी से कोई समझौता नहीं होना चाहिए।

यूपीआई के अगले चरण में सुरक्षा पर होगा जोर

नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) के पूर्व चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर बालाकृष्णन महादेवन ने कहा कि यूपीआई का पहला दशक इंटरऑपरेबिलिटी और बड़े पैमाने पर विस्तार का रहा है। अब अगले चरण में सिस्टम की मजबूती, बैकअप व्यवस्था और एआई आधारित धोखाधड़ी पहचान तकनीकों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

वैश्विक विस्तार और साइबर सुरक्षा पर फोकस

पूर्व वित्त सचिव अशोक लवासा ने भारत के पेमेंट सिस्टम को वैश्विक स्तर पर विस्तार देने और सुरक्षित क्रॉस-बॉर्डर ट्रांजैक्शन के लिए एकीकृत इंफ्रास्ट्रक्चर, समान मानकों और स्पष्ट कानूनी ढांचे की आवश्यकता बताई। वहीं, विशेषज्ञों ने डिजिटल धोखाधड़ी और साइबर अपराध के बढ़ते खतरे पर चिंता जताते हुए मजबूत संस्थागत समन्वय, उपभोक्ता जागरूकता और प्रोएक्टिव साइबर सुरक्षा उपायों को अपनाने पर जोर दिया।

‘विकसित भारत 2047’ के विजन को मिलेगा बल

विशेषज्ञों ने कहा कि कॉन्क्लेव से मिले सुझाव ‘विकसित भारत 2047’ के विजन के अनुरूप सुरक्षित, समावेशी और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम तैयार करने से जुड़ी नीतियों को मजबूती देंगे।

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