वॉशिंगटन/तेहरान/तेल अवीव। पश्चिम एशिया में मंडरा रहे विश्व युद्ध के बादलों के बीच राहत की बड़ी खबर है। पिछले तीन दिनों से एक-दूसरे पर मिसाइलें और बम बरसा रहे अमेरिका और ईरान आखिरकार अस्थायी तौर पर सैन्य हमले रोकने पर सहमत हो गए हैं। दोनों देशों ने तनातनी को भूलकर अब बातचीत की टेबल पर लौटने का फैसला किया है। इसी कड़ी में आज कतर में दोनों महाशक्तियों के बीच तकनीकी स्तर की बेहद अहम वार्ता होने जा रही है।
इस शांति समझौते की सबसे बड़ी राहत दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक जलमार्ग 'होर्मुज स्ट्रेटÓ को मिली है, जहां से व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही बिना किसी रोक-टोक के जारी रहेगी। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, दोनों देश 17 जून को हुए समझौते के सभी बिंदुओं पर आगे की चर्चा जारी रखेंगे।
तीन दिन तक चला बारूदी खेल: अमेरिका ने दागे बम, ईरान का पलटवार बता दें कि इस शांति समझौते से ठीक पहले दोनों देशों के बीच भीषण सैन्य टकराव देखने को मिला था।
अमेरिका की एयरस्ट्राइक: अमेरिकी वायुसेना ने लगातार दूसरे दिन ईरान के भीतर घुसकर हवाई हमले किए। अमेरिकी जेट विमानों ने ईरान के 'किश्म द्वीपÓ, 'सिरिकÓ और 'बंदर-ए-लेंगेहÓ स्थित मिसाइल व रडार ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया।
ईरान का जवाबी प्रहार: अमेरिकी हमले से बौखलाए ईरान ने भी तुरंत पलटवार किया। ईरान ने खाड़ी देशों—कुवैत और बहरीन में बने अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर भारी बमबारी की, जिसके बाद दोनों देशों के बीच युद्ध जैसी स्थिति बन गई थी।
होर्मुज जलमार्ग पर जंग: ईरान की 30 दिन की डेडलाइन
भले ही दोनों देश बातचीत की मेज पर आ रहे हैं, लेकिन कड़वाहट अभी कम नहीं हुई है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने दो टूक शब्दों में कहा, अगले 30 दिनों तक होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह से ईरान के सैन्य नियंत्रण में रहेगा। अगर अमेरिका ने दोबारा हिमाकत की, तो इसके अंजाम बेहद गंभीर और भयानक होंगे।
अंदर सुलग रही है आग: ट्रम्प की महाविनाश की धमकी, आईआरजीसी बोला- भुगतना होगा अंजाम। शांति वार्ता के बीच दोनों तरफ से जुबानी जंग और धमकियों का दौर भी चरम पर है, जिसने तनाव को पूरी तरह खत्म नहीं होने दिया है।
ट्रम्प की दो टूक: 'ईरान सुधरा नहीं, तो वजूद मिटा देंगेÓ
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को अब तक की सबसे सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर ईरान अपनी हरकतों से बाज नहीं आया, तो उसका अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा। ट्रम्प ने साफ किया कि अगर जरूरत पड़ी, तो अमेरिका अपने शुरू किए गए इस सैन्य अभियान को पूरी ताकत से अंजाम तक पहुंचाएगा।
ईरान का पलटवार: 'अमेरिकी ठिकानों को श्मशान बना देंगेÓ
दूसरी ओर, ईरान की सबसे ताकतवर सेना 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉप्र्सÓ ने भी पीछे हटने से इनकार किया है। आईआरजीसी ने खुलेआम धमकी दी है कि आने वाले दिनों में खाड़ी क्षेत्र में मौजूद तमाम अमेरिकी सैन्य ठिकानों को ऐसा भारी नुकसान उठाना पड़ेगा जिसे अमेरिका कभी भूल नहीं पाएगा।
