रायपुर पुलिस की ऐतिहासिक पहल: ऑटो और ई-रिक्शा में क्यूआर कोड लगाने की शुरुआत


  • 15 दिनों में 15,047 वाहनों का डिजिटल रजिस्ट्रेशन कर रायपुर ने रचा इतिहास
  • 'गोल्डन बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉड्र्स में नाम दर्ज

रायपुर । छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर देश का ऐसा पहला जिला बन गया है, जिसने अपने पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम को पूरी तरह से डिजिटल कर दिया है। रायपुर पुलिस कमिश्नरेट द्वारा शहर के ऑटो और ई-रिक्शा को सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने के लिए चलाए जा रहे अभियान के दूसरे चरण में वाहनों पर 'क्यूआर कोडÓ (क्तक्र ष्टशस्रद्ग) चस्पा करने की शुरुआत की गई। कालीबाड़ी स्थित यातायात कार्यालय परिसर में आयोजित एक गरिमामय कार्यक्रम में पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला ने इस तकनीक-आधारित सुरक्षा प्रणाली का शुभारंभ किया। इस दौरान जन-जागरूकता के लिए साइबर, यातायात और महिला सुरक्षा से जुड़ी शॉर्ट फिल्मों की स्क्रीनिंग और उन्हें जारी भी किया गया।

क्यूआर कोड से बढ़ेगी सुरक्षा, सफर होगा बेहद आसान

पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला ने बताया कि किसी भी शहर की पहचान वहां के पब्लिक ट्रांसपोर्ट से होती है। ऑटो और ई-रिक्शा में आए दिन होने वाली आपराधिक गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए यह कदम उठाया गया है। अब कोई भी नागरिक सफर शुरू करने से पहले या सफर के दौरान अपने मोबाइल कैमरे से क्यूआर कोड स्कैन कर चालक और वाहन की पूरी कुंडली देख सकेगा।

यातायात पुलिस की अपील: नागरिक केवल क्यूआर कोड लगे ऑटो या ई-रिक्शा में ही सफर करें। यात्रा से पहले क्यूआर कोड का फोटो खींचकर रख लें, ताकि सामान गुम होने या किसी भी आपात स्थिति में वाहन मालिक से तुरंत संपर्क किया जा सके। बिना क्यूआर कोड वाले वाहनों में सफर करना असुरक्षित हो सकता है।

15 दिन में वल्र्ड रिकॉडर्: मिला सर्टिफिकेट और मेडल

रायपुर जिला पब्लिक ट्रांसपोर्ट के डिजिटल रजिस्ट्रेशन के मामले में देश का नंबर वन जिला बन गया है। ऑटो यूनियन और यातायात पुलिस के समन्वित प्रयासों से मात्र 15 दिनों के भीतर 15,047 ऑटो व ई-रिक्शा का ऑनलाइन पंजीयन पूरा किया गया। इस अभूतपूर्व उपलब्धि के लिए 'गोल्डन बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉड्र्सÓ की टीम ने रायपुर पुलिस कमिश्नरेट के अधिकारियों को सर्टिफिकेट और मेडल प्रदान कर सम्मानित किया।

शॉर्ट फिल्मों से फैलेगी अवेयरनेस, अगले चरण में मिलेंगे आई-कार्ड

सुरक्षा को और पुख्ता करने के लिए पुलिस कमिश्नर के मार्गदर्शन में यातायात, साइबर, महिला अपराध और सड़क सुरक्षा पर आधारित शॉर्ट फिल्में बनाई गई हैं। इन्हें शहर के मॉल्स, पीवीआर, सोशल मीडिया और सार्वजनिक एलईडी स्क्रीन्स पर दिखाया जाएगा। पुलिस की इस योजना के अगले चरण में सभी चालकों को आधिकारिक परिचय पत्र (आईडी कार्ड) दिए जाएंगे और शहर में ऑटो स्टैंड्स का चिन्हांकन कर सुविधाएं बढ़ाई जाएंगी।

कार्यक्रम में ये रहे मौजूद

कार्यक्रम के अंत में सहायक पुलिस आयुक्त (यातायात) श्रीमती सीमा अहिरवार ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर अमित तुकाराम कांबले, डीसीपी (उत्तर) मयंक गुर्जर, डीसीपी (पश्चिम) संदीप पटेल, डीसीपी (क्राइम) स्मृतिक राजनाला, एडीसीपी (मुख्यालय) अर्चना झा, डीसीपी (ट्रैफिक) विवेक शुक्ला सहित श्री नारायणा हॉस्पिटल के सीईओ युवराज खेमका, सुधीर सुल्तानिया (विश्व गीता इस्पात), प्रकाश अग्रवाल (हीरा इस्पात), पंकज अग्रवाल (सागर टीएमटी) और ऑटो यूनियन के पदाधिकारी कमल पांडेय व नारायण सोनी विशेष रूप से उपस्थित थे।


मुख्य आंकड़े 

  • कुल पंजीकृत वाहन: 15,047 ऑटो और ई-रिक्शा (मात्र 15 दिनों में)।
  • बना रिकॉर्ड: देश का पहला जिला जिसने पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इतनी तेजी से डिजिटल रजिस्ट्रेशन किया (Óगोल्डन बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉड्र्स' में दर्ज)।
  • अभियान की शुरुआत: प्रथम चरण (पंजीयन) 20 मई 2026 से शुरू हुआ था।
  • दूसरा चरण: जून 2026 से क्यूआर कोड चस्पा करने की शुरुआत।
  • सुरक्षा के तीन स्तंभ: यातायात अनुशासन, अपराध नियंत्रण और महिला सुरक्षा।
  • प्रचार के माध्यम: सोशल मीडिया, शहर के मॉल्स, पीवीआर और प्रमुख चौराहों की एलईडी स्क्रीन्स।

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