- -40 लोगों का किया गया रेस्क्यू; कई की हालत गंभीर, मैक्स अस्पताल में 8 मरीज वेंटिलेटर पर
- -6 कमरों की अनुमति पर चल रहे थे 25 कमरे, होटल के पास नहीं थी फायर एनओसी
- -बचाव कार्य के दौरान झुलसे दिल्ली पुलिस के 10 जवान भी अस्पताल में भर्ती
नई दिल्ली/ए.। राजधानी दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में बुधवार सुबह एक रूह कंपा देने वाला हादसा सामने आया। यहाँ प्रेस एन्क्लेव रोड पर स्थित 'फ्लरिश स्टेÓ नाम के एक 6 मंजिला होटल में सुबह भीषण आग लग गई। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 21 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें से अधिकांश विदेशी नागरिक बताए जा रहे हैं। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, मृत विदेशी नागरिक मुख्य रूप से सेंट्रल एशिया और अफ्रीकी देशों के रहने वाले थे। फिलहाल मारे गए विदेशी नागरिकों की सटीक संख्या और उनकी पहचान की जांच की जा रही है। दिल्ली फायर सर्विस को सुबह 8:50 बजे आग लगने की सूचना मिली थी, जिसके बाद दमकल की गाडिय़ों और स्थानीय लोगों ने मिलकर करीब 40 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। हादसे में गंभीर रूप से घायल लोगों का इलाज जारी है, जिससे मौतों का आंकड़ा बढऩे की आशंका जताई जा रही है।
जान बचाने के लिए तीसरी-चौथी मंजिल से कूदे लोग
आग इतनी तेजी से फैली कि ऊपरी मंजिलों पर मौजूद लोगों को बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिला। घटना के सामने आए विचलित करने वाले वीडियो में कुछ लोग जान बचाने के लिए जलती हुई इमारत की तीसरी और चौथी मंजिल से नीचे कूदते नजर आए। नीचे मौजूद स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए जमीन पर गद्दे बिछा दिए थे, जिससे कुछ लोगों की जान बच सकी। दमकल कर्मियों ने होटल के बेसमेंट से भी 6 से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला।
रेस्टोरेंट से भड़की आग, अस्पतालों के पास होने से ठहरते थे मरीज के परिजन
बताया जा रहा है कि आग सबसे पहले इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर बने 'बी-एन-बी रेस्टोरेंटÓ में लगी। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और पूरी 6 मंजिला इमारत, कमरों और बेसमेंट को अपनी चपेट में ले लिया। यह होटल जिस रोड पर स्थित है, वहाँ मैक्स हॉस्पिटल और एम्स बेहद नजदीक हैं। इन बड़े अस्पतालों में इलाज कराने आने वाले मरीजों के तीमारदार और परिजन अक्सर इस होटल में ठहरा करते थे।
नियमों की धज्जियां उड़ाकर चल रहा था मौत का खेल
लाइसेंस 6 कमरों का, बना दिए 25 कमरे
जांच में सामने आया है कि 'फ्लरिश स्टेÓ गेस्टहाउस को 'बेड एंड ब्रेकफास्टÓ कॉन्सेप्ट के तहत सिर्फ 6 कमरे संचालित करने का लाइसेंस मिला था। लेकिन लालच में आकर होटल प्रबंधन ने नियमों को ताक पर रखकर 25 कमरे बना दिए थे।
न फायर एनओसी, न निकलने का रास्ता
इस बहुमंजिला इमारत के पास फायर डिपार्टमेंट की एनओसी नहीं थी। पूरी इमारत में आने-जाने और आपातकालीन निकास (एग्जिट) के लिए केवल एक ही बेहद संकरा रास्ता था। रेस्टोरेंट के बेसमेंट में भी सिंगल एंट्री-एग्जिट होने के कारण लोग वहीं फंस गए।
ÓचिमनीÓ बन गई थी इमारत: फायर ब्रिगेड
दिल्ली अग्निशमन सेवा के पीआरओ ए.के. मलिक ने बताया, "इस तरह की संकरी और बंद इमारतें आग लगने पर एक 'चिमनीÓ की तरह काम करती हैं। इससे हीट और जहरीला धुआं बहुत तेजी से ऊपर की तरफ फैलता है। ऐसे में कमरों के अंदर मौजूद लोगों को संभलने और बाहर निकलने का बिल्कुल भी समय नहीं मिल पाता।"
धुएं से घुट गया दम: मैक्स अस्पताल
मैक्स हेल्थकेयर के ग्रुप मेडिकल डायरेक्टर डॉ. संदीप बुधिरजा ने मेडिकल बुलेटिन जारी कर बताया, अस्पताल में कुल 39 मरीजों को लाया गया था, जिनमें से 18 मरीजों को मृत अवस्था में ही लाया गया था। शुरुआती जांच में मौत की वजह 'एस्फिक्सिएशनÓ (जहरीले धुएं के कारण दम घुटना) पाई गई है। कुछ लोग गंभीर रूप से झुलसे भी हैं। बचे हुए मरीजों में से 15 इस समय आईसीयू में हैं, जिनमें से 8 की हालत बेहद नाजुक है और वे वेंटिलेटर पर हैं।
देवदूत बनकर घुसे 10 पुलिसकर्मी भी घायल
हादसे की सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस के जवान स्थानीय लोगों के साथ सबसे पहले जलती हुई इमारत के भीतर घुसे। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान धुएं और आंच की चपेट में आने से 10 पुलिसकर्मी भी गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया। घायल जवानों में 5 हेड कांस्टेबल और 5 कांस्टेबल शामिल हैं, जिनकी बहादुरी की सराहना की जा रही है।
6 महीने में 66 मौतें: सुलगती दिल्ली पर उठे सवाल
इस हादसे ने एक बार फिर दिल्ली में व्यावसायिक इमारतों और होटलों में सुरक्षा मानकों की पोल खोल कर रख दी है। आंकड़ों के मुताबिक, पिछले महज 6 महीनों के भीतर दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में आग लगने की घटनाओं में अब तक 66 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। फिलहाल मालवीय नगर थाना पुलिस ने होटल मालिक और प्रबंधन के खिलाफ लापरवाही का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है कि आखिर बिना एनओसी के इतने समय से यह अवैध कारोबार कैसे फल-फूल रहा था।
