पुरी । ओडिशा के पवित्र धाम पुरी में सोमवार को देव स्नान पूर्णिमा के साथ ही विश्व प्रसिद्ध 'जगन्नाथ रथयात्रा महोत्सव' का शंखनाद हो गया है। धार्मिक परंपरा के अनुसार, ज्येष्ठ पूर्णिमा के पावन अवसर पर महाप्रभु जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा को 108 कलशों के पवित्र जल से शाही स्नान कराया गया। इस अलौकिक दृश्य के गवाह बनने के लिए पुरी में देश-दुनिया से लाखों श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी महाप्रभु के दरबार में पहुंचकर साष्टांग दंडवत कर आशीर्वाद लिया।
स्नान के बाद 'अणसर गृह' पधारे भगवान, लगेगा औषधियों का भोग
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अत्यधिक स्नान करने के कारण भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और देवी सुभद्रा को 'ज्वर' (तेज बुखार) आ गया है। इस वजह से वे अगले 15 दिनों तक एकांतवास में चले गए हैं, जिसे 'अनवसर' या 'अणसर गृह' कहा जाता है। अब अगले 15 दिनों तक मंदिर के मुख्य गर्भगृह में त्रिमूर्ति के दर्शन नहीं हो सकेंगे। इस दौरान राजवैद्य की देखरेख में भगवान का गुप्त उपचार किया जाएगा और उन्हें केवल जड़ी-बूटियों (काढ़े) और फलों का भोग लगाया जाएगा।
रथयात्रा 2026: जानिए महत्वपूर्ण तिथियां
भगवान के बीमार होने से लेकर रथयात्रा के लौटने तक का पूरा कार्यक्रम इस प्रकार है:
- 14 जुलाई 2026 (नेत्रोत्सव): 15 दिनों के एकांतवास के बाद भगवान पूरी तरह स्वस्थ होकर 'नवयौवन रूप' में भक्तों को दोबारा दर्शन देंगे।
- 15 जुलाई 2026 (उभा यात्रा): इस दिन रथयात्रा में शामिल होने वाले तीनों मुख्य रथों—नंदीघोष, तालध्वज और दर्पदलन की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी।
- 16 जुलाई 2026 (रथयात्रा का शुभारंभ): महाप्रभु जगन्नाथ अपने भाई-बहन के साथ रथों पर सवार होकर अपनी मौसी के घर 'गुंडिचा मंदिर के लिए प्रस्थान करेंगे।
- 24 जुलाई 2026 (बहुड़ा यात्रा): नौ दिनों तक गुंडिचा मंदिर में रहने के बाद भगवान की मुख्य मंदिर की ओर 'उल्टी रथयात्रा यानी घर वापसी होगी।
- 25 जुलाई 2026 (सुना बेषा): इस दिन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा जी को करोड़ों रुपये के भव्य स्वर्ण आभूषणों से सजाया जाएगा, जिसे देखने के लिए भारी भीड़ उमड़ती है।
महाप्रभु के रथों की भव्यता और खासियत
जगन्नाथ रथयात्रा में तीनों भाई-बहनों के रथ बेहद खास और निर्धारित माप के अनुसार लकड़ी से तैयार किए जाते हैं
रथ का नाम ऊंचाई पहियों की संख्या ध्वज का रंग
नंदीघोष-भगवान जगन्नाथ 45 फुट 16 पहिये लाल और पीलातालध्वज
भगवान बलभद्र 45.6 फुट 14 पहियेलाल और हरा/नीलादर्पदलन
देवी सुभद्रा 44.6 फुट 12 पहिये लाल और काला
