भारत-नीदरलैंड साझेदारी को नई मजबूती, पीएम मोदी ने अफस्लुइटडिज्क बांध का किया दौरा

 


हेग। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीदरलैंड के प्रधानमंत्री महामहिम रॉब जेटेन के साथ देश की प्रमुख जल प्रबंधन संरचना अफस्लुइटडिज्क बांध का दौरा किया। यह दौरा जल प्रबंधन, जलवायु सहनशीलता और सतत अवसंरचना के क्षेत्र में दोनों देशों की साझा प्राथमिकताओं और सहयोग को दर्शाता है।


जल प्रबंधन में वैश्विक मॉडल है अफस्लुइटडिज्क


अफस्लुइटडिज्क नीदरलैंड की सबसे महत्वपूर्ण इंजीनियरिंग संरचनाओं में से एक है। लगभग 32 किलोमीटर लंबा यह बांध उत्तरी सागर से बड़े भूभाग की सुरक्षा करता है और साथ ही मीठे पानी के संरक्षण और जल प्रबंधन में अहम भूमिका निभाता है। यह संरचना बाढ़ नियंत्रण और भूमि पुनर्ग्रहण का वैश्विक उदाहरण मानी जाती है।


भारत की कल्पसर परियोजना से जोड़ा गया अनुभव


इस दौरे के दौरान अफस्लुइटडिज्क और भारत की महत्वाकांक्षी कल्पसर परियोजना के बीच समानताओं पर भी चर्चा हुई। गुजरात में प्रस्तावित कल्पसर परियोजना का उद्देश्य खंभात की खाड़ी में एक विशाल मीठे पानी का जलाशय विकसित करना है, जिसमें ज्वारीय ऊर्जा उत्पादन, सिंचाई और परिवहन सुविधाओं को एकीकृत किया जाएगा। इसी संदर्भ में भारत के जल शक्ति मंत्रालय और नीदरलैंड के बुनियादी ढांचा एवं जल प्रबंधन मंत्रालय के बीच तकनीकी सहयोग के लिए एक आशय पत्र पर हस्ताक्षर का स्वागत किया गया।


जल तकनीक में सहयोग की बड़ी संभावना


दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि नीदरलैंड की उन्नत जल अभियांत्रिकी विशेषज्ञता और भारत की बड़े पैमाने पर परियोजनाओं को लागू करने की क्षमता मिलकर एक मजबूत साझेदारी का आधार बन सकती है। यह दौरा दोनों देशों के बीच जल क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग को और गहरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह यात्रा भारत-नीदरलैंड संबंधों में नवाचार, सतत विकास और जल प्रबंधन सहयोग को नई गति देने वाली साबित हुई है।

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