नई दिल्ली। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की हालिया चार दिवसीय भारत यात्रा ने दोनों देशों के रणनीतिक रिश्तों को एक नई ऊंचाई दी है। विश्लेषकों और कॉरपोरेट जगत के विशेषज्ञों के अनुसार, रुबियो ने इस दौरे का इस्तेमाल 'क्वाड' सहयोग को मजबूत करने और नई दिल्ली को यह स्पष्ट भरोसा दिलाने के लिए किया कि ट्रंप प्रशासन के लिए इंडो-पैसिफिक (हिंद-प्रशांत) क्षेत्र आज भी सबसे बड़ी रणनीतिक प्राथमिकता है। अमेरिकी विदेश मंत्री के रूप में मार्को रुबियो की यह पहली भारत यात्रा थी, जिसे कूटनीतिक हलकों में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अपनी इस यात्रा के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बैठकें कीं। इसके साथ ही उन्होंने भारत में आयोजित 'क्वाड' विदेश मंत्रियों की बैठक में भी हिस्सा लिया।
'सही समय पर हुआ दौरा, अहम मोड़ पर भारत-अमेरिका संबंध'
वैश्विक रक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञ और जनरल एटॉमिक्स ग्लोबल कॉरपोरेशन के सीईओ डॉ. विवेक लाल ने इस यात्रा को 'बेहद सामयिक और सही समय पर उठाया गया कदम' बताया है। डॉ. लाल ने कहा, यह दौरा दोनों देशों के लिए अपनी साझा रणनीतिक दिशा तय करने और सुरक्षा वार्ताओं को आगे बढ़ाने का एक बेहतरीन मौका है।"* उन्होंने रेखांकित किया कि भारत-अमेरिका संबंध अब एक 'अहम मोड़' पर पहुंच चुके हैं, जहां दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग, महत्वपूर्ण द्विपक्षीय समझौते और संयुक्त सैन्य अभ्यासों में लगातार रिकॉर्ड बढ़ोतरी हो रही है। उन्होंने आने वाले समय में रक्षा और अंतरिक्ष (स्श्चड्डष्द्ग) के क्षेत्र में सहयोग की अपार संभावनाओं पर भी जोर दिया।
क्वाड को मिली नई ऊर्जा और रफ्तार
भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के रणनीतिक समूह 'क्वाड' को लेकर भी इस दौरे से सकारात्मक संकेत निकले हैं। डॉ. विवेक लाल के मुताबिक, इस साझेदारी में एक बार फिर नई ऊर्जा और रफ्तार देखने को मिल रही है। उन्होंने कहा, क्वाड में जो नई ऊर्जा वापस आई है और जिन ठोस नतीजों पर बात हो रही है, उससे आने वाले समय में इस समूह को और ज्यादा मजबूती मिलेगी। उन्होंने साफ किया कि 'कॉमन ऑपरेटिंग पिक्चर' (साझा संचालन परिदृश्य), समुद्री निगरानी और सुरक्षा सहयोग इस महत्वपूर्ण साझेदारी के मुख्य स्तंभ बने रहेंगे।
दौरे के मुख्य रणनीतिक संदेश
ट्रंप प्रशासन की प्राथमिकता:अमेरिका ने स्पष्ट किया कि वैश्विक उथल-पुथल के बीच भी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को लेकर उसकी नीतियों में कोई बदलाव नहीं आएगा।
मजबूत होता रक्षा गठबंधन: हिंद महासागर और इंडो-पैसिफिक में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने के लिए भारत-अमेरिका रक्षा तकनीक और खुफिया जानकारी साझा करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
क्वाड का विस्तार: केवल सुरक्षा ही नहीं, बल्कि तकनीक, स्पेस और क्रिटिकल सप्लाई चेन में भी क्वाड देश मिलकर काम करेंगे।
