सोनम रघुवंशी: अगर सोनम मेरे सामने आई, तो मैं उसे मार डालूंगा; बहू को बेल मिलने पर राजा की मां फूट-फूट कर रोईं




मेघालय। राजा रघुवंशी मर्डर केस के मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को बेल मिल गई है। राजा रघुवंशी और सोनम की शादी 11 मई, 2025 को हुई थी। 20 मई, 2025 को दोनों हनीमून के लिए मेघालय गए थे। राजा 23 मई को अचानक गायब हो गया। राजा रघुवंशी की लाश 2 जून को मिली। इसके बाद सोनम ने अपने पति की हत्या की साजि़श रचने की बात कबूल की, और उसे 9 जून, 2025 को गिरफ्तार कर लिया गया।


सोनम पर अपने बॉयफ्रेंड राज कुशवाहा की मदद से हत्या करने का आरोप है। राज कुशवाहा सोनम के पिता के लिए काम करता था। इस मामले में सोनम समेत कुल 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। सोनम को ज़मानत मिलने की बात सुनकर राजा की माँ उमा रघुवंशी फूट-फूट कर रोने लगीं। उनका दर्द अब गुस्से में बदल गया था और कांपती आवाज़ में उन्होंने कहा, अगर सोनम मेरे सामने आई, तो मैं उसे मार डालूँगी।


उमा रघुवंशी ने कहा कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद उन्हें ज़मानत कैसे मिल गई। मुझे कानून पर पूरा भरोसा था, लेकिन अब मुझे लग रहा है कि कानून ने ही मेरी आँखों पर पट्टी बाँध दी है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस केस में पैसे का बड़ा खेल हुआ और सोनम के परिवार वाले आपस में मिले हुए थे। हालांकि उन्होंने दावा किया कि ट्रांज़ैक्शन शिलॉन्ग तक पहुंचा, लेकिन इन आरोपों की कोई ऑफिशियल पुष्टि नहीं हुई है।


उमा रघुवंशी ने पुलिस के तरीके पर भी नाराजग़ी जताई। उन्होंने कहा कि शुरू में पुलिस ने सपोर्ट किया, लेकिन बाद में वे पीछे हट गए। उन्होंने आगे कहा, अगर आरोपी लड़का होता, लड़की नहीं, तो शायद उसे इतनी जल्दी बेल नहीं मिलती। उन्होंने आगे कहा कि वह इस फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट जाएंगी और तब तक लड़ती रहेंगी जब तक उनके बेटे को इंसाफ नहीं मिल जाता। वह मांग कर रही हैं कि आरोपी को मौत की सज़ा दी जाए।


राजा के पिता अशोक रघुवंशी ने भी इस फैसले पर नाराजग़ी जताई है और कहा है कि कानून से भरोसा उठ गया है। वहीं उनके भाई सचिन रघुवंशी ने अपना गुस्सा जाहिर किया और जमकर भड़ास निकाली। सचिन ने कहा, मैंने फिल्मों में सुना था कि कानून की आंखों पर पट्टी बंधी होती है, लेकिन आज मुझे यकीन हो गया। अगर किसी को जल्दी बेल चाहिए तो उन्हें शिलांग चले जाना चाहिए। परिवार ने अपना गुस्सा जाहिर किया। बेल ऑर्डर के मुताबिक, गिरफ्तारी के दौरान आरोपी को साफ जानकारी नहीं दी गई थी कि उसे किस सेक्शन के तहत गिरफ्तार किया जा रहा है। डॉक्यूमेंट्स में एक ऐसी धारा का जिक्र था जो थी ही नहीं, जबकि मर्डर से जुड़ी धारा का तो जिक्र ही नहीं था।

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