लग्जऱी कार और 55 लाख, 'मैडम कलेक्टर' का पर्दाफ़ाश; नौकरी के नाम पर युवाओं से ठगी



बरेली।  बरेली की गलियों की एक लड़की का एक सपना था, जो देश के लाखों युवाओं की आँखों में है। आईएएस बनने का सपना, जिसके लिए लोग अपनी जान जोखिम में डालते हैं। उसने वही किया। उसने आठ साल किताबों, नोट्स, कोचिंग और मॉक टेस्ट में बिताए, लेकिन सफल नहीं हुई। जब वह  पीएससी एग्जाम क्रैक नहीं कर पाई, तो उसने अपनी एक नई पहचान बनाई। उसने झूठ बोलना शुरू कर दिया कि वह एक एसडीएम है। धीरे-धीरे, यह एसडीएम मैडम लोगों के बीच 'मैडम कलेक्टरÓ के नाम से मशहूर हो गई। इसके बाद एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है।


वह एक महंगी लग्जऱी एसयूवी में घूमने लगी, वीआईपी स्टाइल में, एक सरकारी अधिकारी की तरह और बहुत ज़्यादा कॉन्फिडेंस के साथ। उसकी एंट्री किसी फिल्म के सीन से कम नहीं थी। एसयूवी रुकती, दरवाज़ा खुलता और 'मैडमÓ बाहर निकलतीं। आस-पास के लोग इज्ज़त से खड़े हो जाते। कुछ सैल्यूट करते, तो कुछ रास्ता साफ़ करते। लोग बिना सवाल पूछे उस पर भरोसा करने लगे। सबको लगता था कि उसके सामने बैठी महिला के पास सिस्टम चलाने की पावर, पहुँच और काबिलियत है।


लोगों में डर पैदा किया

धीरे-धीरे, उसके बैंक अकाउंट में पैसे बढ़ते गए। उसने अपनी नॉलेज का इस्तेमाल करके नकली पहचान बनाई। यह कहानी है बरेली के बारादरी पुलिस स्टेशन के तहत ग्रीन पार्क कॉलोनी की रहने वाली विप्रा की। विप्रा ने 2012 से 2020 तक सिविल सर्विसेज़ एग्जाम की तैयारी की थी।  पीएससी में फेल होने के बाद विप्रा ने पहले खुद को एसडीएम और फिर गजरौला में पोस्टेड एडीएम एफआर बताकर लोगों में डर पैदा किया।

सरकारी नौकरी दिलाने का लालच

विप्रा का तरीका बहुत चालाक था। वह पहले युवाओं से दोस्ती करती, फिर उन्हें सरकारी नौकरी का लालच देती। उसकी बातों और सरकारी शान-शौकत से इम्प्रेस होकर कई लोग उसके जाल में फंस गए। उन्होंने नौकरी की उम्मीद में उसे लाखों रुपये दिए। इसके लिए विप्रा ने पूरा सिस्टम तैयार किया था। लखनऊ में सरकारी ऑफिस के पास के पोस्ट ऑफिस से अपॉइंटमेंट लेटर और दूसरे सरकारी डॉक्यूमेंट कूरियर किए जाते थे। इससे पीडि़तों को यकीन हो जाता था कि उनके डॉक्यूमेंट सच में सरकारी डिपार्टमेंट से आए हैं। 5 लाख 21 हज़ार रुपए ऐंठ लिए

भरोसा और पक्का करने के लिए उसने पीडि़तों में से एक के अकाउंट में 'सैलरीÓ के तौर पर 17 हज़ार रुपए भी ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद युवक को पूरा यकीन हो गया कि उसे नौकरी मिल गई है और सैलरी भी मिलनी शुरू हो गई है। मामला तब सामने आया जब किला इलाके के मुशाहिद नाम के युवक ने शिकायत दर्ज कराई। मुशाहिद ने उसे कंप्यूटर ऑपरेटर की नौकरी दिलाने के बहाने 5 लाख 21 हज़ार रुपए ऐंठ लिए थे। काफी समय बाद जब उसे नौकरी नहीं मिली तो उसे एहसास हुआ कि उसके साथ ठगी हुई है।

खातों में मिले 55 लाख रुपए

इस ऑपरेशन में पुलिस ने विप्रा, शिखा और दीक्षा को गिरफ्तार किया है। उनके पास से एडीएम लिखी एक लग्जरी कार बरामद की गई है। इसके अलावा 10 से ज़्यादा चेक बुक, दो लैपटॉप, कई मोबाइल फोन और अलग-अलग बैंक अकाउंट में जमा करीब 55 लाख रुपए बरामद किए गए हैं। पुलिस ने इन सभी अकाउंट को फ्रीज कर दिया है। पुलिस मामले की आगे जांच कर रही है।

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