तृणमूल के सामने किला बचाने की चुनौती; बीजेपी का फोकस सत्ता की ओर बढऩे पर...

-वोट शेयर बढ़ाने पर फोकस, क्या ममता पिछली 215 सीटों तक पहुंच सकती हैं?

कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मुकाबला अब साफ़ तौर पर दो हिस्सों में बंट गया है। तृणमूल कांग्रेस इस बार अपना किला बचाने की बड़ी चुनौती का सामना कर रही है, जबकि मुख्य विपक्षी पार्टी बीजेपी सत्ता के करीब पहुंचने के लिए ठोस रणनीति बना रही है। चुनाव की पूरी तस्वीर अब 'सत्ता बचाने और सत्ता पर कब्ज़ा करने' की सीधी लड़ाई में बदल गई है।


 यह सीधा मुकाबला इस बंगाल चुनाव को हाल के दिनों के सबसे अहम और ऐतिहासिक चुनावों में से एक बना रहा है। 2021 के चुनावों में तृणमूल और बीजेपी  के बीच दोहरे मुकाबले की तस्वीर साफ नहीं थी, लेकिन नतीजों ने साबित कर दिया कि असली लड़ाई इन्हीं दो पार्टियों के बीच थी। कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियां अपनी पहचान नहीं बना पाईं। पॉलिटिकल एक्सपट्र्स के मुताबिक, 2026 का चुनाव बंगाल की पॉलिटिक्स के लिए एक अहम पड़ाव हो सकता है। 

एक तरफ तृणमूल कांग्रेस अपने मजबूत जनादेश को बनाए रखने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी तरफ  बीजेपी ममता बनर्जी के असर को कम करके बेहतर करने और सत्ता के करीब आने की कोशिश कर रही है। यह चुनाव सिर्फ सीटों का नहीं है, यह राज्य में पॉलिटिकल बैलेंस बदल सकता है। यह चुनाव तय करेगा कि बंगाल में रीजनल दबदबे वाला मॉडल जारी रहेगा या नेशनल लेवल पर विस्तार की पॉलिटिक्स को अपनाया जाएगा।

इस साल का मुकाबला अलग क्यों है?

बंगाल की पॉलिटिक्स में कई पार्टियों के बीच मुकाबले की लंबी परंपरा रही है। शुरुआत में लेफ्ट पार्टियों का दबदबा रहा, फिर तृणमूल कांग्रेस का उदय हुआ, लेकिन 2026 में पहली बार तस्वीर साफ तौर पर दोतरफा लड़ाई की है। 2011 के बाद पहली बार सत्ताधारी तृणमूल के पास बीजेपी जैसा मजबूत परसेंटेज था, जो करीब 38' तक पहुंच गया था। अगर इस बार यह बढ़ता है, तो बीजेपी की सीटें काफी बढ़ सकती हैं। अब सत्ता परिवर्तन की बात सिर्फ एक संभावना तक सीमित नहीं है, बल्कि सीधे चुनाव की मुख्य चर्चा का हिस्सा बन गई है।

क्या बीजेपी सत्ता की ओर बढ़ेगी?

राजनीतिक ताकत:

 लोकल नाराजगी को नेशनल मुद्दों से जोडऩे की स्ट्रैटेजी बीजेपी की स्ट्रैटेजी बनी रहेगी। 

सेंट्रल लीडरशिप: ऐसा लगता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह बंगाल के लिए जोरदार कैंपेन करेंगे। 

संगठन: बीजेपी ने अपने संगठन को बूथ लेवल तक स्थायी रूप से बढ़ाया है। बंगाल में भी यही स्ट्रैटेजी बनाई गई है। 

कैंपेन का मुद्दा: भ्रष्टाचार बनाम विकास के मुद्दे को तेज करने की संभावना। क्या सगिन बीजेपी के लिए फायदेमंद है? 2016 और 2021 दोनों चुनावों में 40 से ज़्यादा सीटों पर जीत का अंतर 5 हज़ार वोटों से कम था। इसलिए, सिफऱ् 2 से 5 परसेंट वोटों का स्विंग भी कुछ नतीजे पलट सकता है।

पिछले चुनाव से तृणमूल के लिए बड़ी चुनौती

15 साल सत्ता में रहने के बाद, लोकल लेवल पर नाराजग़ी बढ़ती दिख रही है। भ्रष्टाचार के आरोप: टीचर भर्ती और नगर पालिकाओं से जुड़े मुद्दों की वजह से पार्टी की इमेज खराब हुई। इस पर तृणमूल ने 74 एमएलए के टिकट काट दिए। ताकत: महिला और माइनॉरिटी वोटरों पर मज़बूत पकड़, साथ ही बूथ लेवल तक मज़बूत ऑर्गेनाइज़ेशनल नेटवर्क।

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