ईरान-यूएस युद्ध में जॉर्जिया मेलोनी किसकी तरफ हैं? इटली के प्रधानमंत्री ने खुद कहा



इटली। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई पर हमले के बाद अमेरिका और ईरान के बीच शुरू हुआ टकराव अब और तेज़ हो गया है। इस युद्ध के बैकग्राउंड में, दुनिया की राजनीति में अलग-अलग देशों की भूमिकाएँ सामने आने लगी हैं। इसमें अब इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने भी अपनी बात साफ कर दी है। मेलोनी ने कहा है कि इटली युद्ध में कोई मिलिट्री हिस्सा नहीं लेगा, बल्कि हमारी प्राथमिकता बातचीत से रास्ता निकालना होगी।


मेलोनी ने क्या कहा? 

प्रधानमंत्री मेलोनी ने बुधवार को अपनी कैबिनेट से कहा कि इटली ईरान के साथ युद्ध में शामिल नहीं है और न ही होगा। यह बढ़ता हुआ झगड़ा इंटरनेशनल कानून के संकट का हिस्सा है। उन्होंने विपक्ष से भी इटली के फायदे के लिए सरकार के साथ एकजुट होने की अपील की। मेलोनी ने यह भी याद दिलाया कि इटली ने कतर और ओमान के साथ मिलिट्री दखल से बचने के साथ-साथ तेहरान के साथ डिप्लोमैटिक रिश्ते बनाए रखने के लिए काम किया था। सरकार युद्ध की वजह से बढ़ती फ्यूल की कीमतों पर भी नजऱ रख रही है। उन्होंने मुनाफाखोर कंपनियों पर एक्स्ट्रा टैक्स लगाने की भी चेतावनी दी।


चीन क्या कहता है? -

दूसरी ओर, चीन ने इस झगड़े पर सावधानी से रिएक्ट किया है। चीन ने इलाके में तनाव कम करने के लिए अपने शांतिपूर्ण रुख को दोहराया है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने बुधवार को कहा, चीन खाड़ी देशों पर हमलों का समर्थन नहीं करता है और आम लोगों और गैर-सैन्य जगहों पर अंधाधुंध हमलों की निंदा करता है। प्राथमिकता मौजूदा स्थिति को दुश्मनी और संघर्ष में बदलने से रोकना है। उन्होंने कहा कि चीन तनाव कम करने और इलाके में शांति स्थापित करने की कोशिश करता रहेगा।

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