सदन में स्थगन: धान खरीदी में कुप्रबंधन से सरकार को 4600 करोड़ का नुकसान: डॉ. चरणदास महंत



रायपुर । विधानसभा में विपक्ष ने धान खरीदी केन्द्रों में चूहों के द्वारा धान खाने को लेकर स्थगन प्रस्ताव पेश किया गया लेकिन अध्यक्षीय आसंदी ने इसे अस्वीकार कर दिया। इस स्थगन प्रस्ताव में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने राज्य सरकार के द्वारा धान खरीदी केन्द्रों में कुप्रबंधन और धान खरीदी की वजह से सरकार को 4600 करोड़ के नुकसान की बात कहीं। वहीं पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने आरोप लगाते हुए कहा कि साय सरकार धान खरीदी में पूरी तरह नाकाम रही। इसके बाद विपक्षी सदस्यों ने जमकर नारेबाजी करते हुए गर्भगृह में पहुंच गए। उसके बाद आंसदी ने विपक्षी सदस्यों को निलंबित कर दिया। वहीं विपक्ष की ओर से कई सदस्यों ने नारे बाजी की और चूहे को न्याय दिलाने की मांग करते हुए नारेबाजी करते हुए सदन से बाहर निकल गए। 

विधानसभा परिसर में पत्रकारों से चर्चा करते हुए डॉ. चरण दास महंत ने कहा कि प्रदेश के लाखों किसानों ने कठीन परिश्रम करके धान उपार्जन किया है और सरकार उस धान को खरीदने में असफल रही हैं। जिस धान को खरीदी करके उर्पाजन करने के बाद जिस धान को सुरक्षित रखना चाहिए वहां इन्होंने रखने का प्रयास किया लेकिन प्रदेश भर के जिन खरीदी केन्द्रों में धान रखा गया है वहां धान कम पाया गया और बताया जा रहा है कि धान चूहे खा गए है या सड़ा हुआ पाया गया है। इस तरह हमारे सोने के रूप में ठोस धान जिसको हमने संग्रहित कराया गया था उसको इन्होंने चूहों के नाम पर बर्बाद कर दिया।


 जो धान कम पाया गया है उसको खाने के लिए 60 करोड़ चूहों की जरूरत पड़ती। इसमें निश्चित रूप से भ्रष्टाचार हुआ है। चूहे के नाम पर ये सब लोग छत्तीसगढ़ के बजट को, जनता को धोखा दे रहे हैं। ये ऑटसोर्सिंग वाला चूहा कौन हैं? इसकी जॉच करने की जरूरत है। इतने बड़े भ्रष्टाचार को लेकर हमने सदन में स्थगन लाया है लेकिन सरकार ने गोलमोल जवाब दिया है, मंत्री के जवाब में मजबूरी है गलत जानकारी देते है और अधिकारियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। मंत्री पूरी तैयारी से आते नहीं है। अधिकारी सही जानकारी देते नहीं है। हमारी मांग है कि इसकी गंभीरता से जांच कराने की आवश्यकता है। 

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