राजधानी में 'डिजिटल अरेस्ट' का झांसा, आरटीओ एजेंट से 17.15 लाख की ठगी



रायपुर। राजधानी रायपुर में साइबर अपराधियों ने 'डिजिटल अरेस्ट' का भय दिखाकर एक आरटीओ एजेंट से 17 लाख 15 हजार रुपए की ठगी कर ली। आरोपियों ने खुद को मुंबई एटीएस का अधिकारी बताकर टिकरापारा निवासी शरद कुमार तिवारी और उनके परिवार को करीब 24 घंटे तक वीडियो कॉल पर निगरानी में रखा और अलग-अलग किश्तों में रकम ट्रांसफर करा ली। मामले में शिकायत के बाद पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

ऐसे रची साजिश

जानकारी के अनुसार, शरद कुमार तिवारी को एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को मुंबई एटीएस का अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके आधार कार्ड और बैंक खाते का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर अपराध में हुआ है। गिरफ्तारी से बचने और जांच में सहयोग के नाम पर उन्हें लगातार वीडियो कॉल पर बने रहने के निर्देश दिए गए। आरोपियों ने गिरफ्तारी का डर दिखाते हुए पीडि़त और उनके परिवार को मानसिक दबाव में रखा। इस दौरान बैंक खातों की जानकारी हासिल कर अलग-अलग ट्रांजेक्शन के माध्यम से कुल 17.15 लाख रुपए ट्रांसफर करा लिए गए।

परिवार को भी किया डिजिटल अरेस्ट

साइबर ठगों ने परिवार के अन्य सदस्यों को भी वीडियो कॉल में शामिल कर लिया और किसी से संपर्क न करने तथा घर से बाहर न निकलने की चेतावनी दी। लगातार धमकियों और निगरानी के कारण परिवार पूरी तरह सहम गया और आरोपियों के निर्देशों का पालन करता रहा।

शिकायत के बाद जांच शुरू

ठगी का अहसास होने पर शरद कुमार तिवारी ने टिकरापारा थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने धोखाधड़ी और आईटी एक्ट की धाराओं में मामला दर्ज कर बैंक खातों और कॉल डिटेल के आधार पर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।

पुलिस की अपील

पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अज्ञात कॉल पर खुद को पुलिस, सीबीआई या एटीएस का अधिकारी बताने वाले व्यक्तियों से सतर्क रहें। किसी भी जांच एजेंसी द्वारा फोन या वीडियो कॉल के माध्यम से 'डिजिटल अरेस्ट' नहीं किया जाता और न ही बैंक खातों की गोपनीय जानकारी मांगी जाती है।

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