CM योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को कहा कि न्याय, समता और बंधुता भारतीय संविधान की आत्मा



लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को कहा कि न्याय, समता और बंधुता भारतीय संविधान की आत्मा हैं और इन्हीं मूल्यों के आधार पर देश की विधायिका समाज को दिशा देने का कार्य करती है।  मुख्यमंत्री ने यह बात लखनऊ में आयोजित अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए कही। श्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश की राजधानी इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय आयोजन की साक्षी बनी है।उन्होंने कहा कि जो लोग इस सम्मेलन से सीधे जुड़े हैं, वे अपने अनुभवों के माध्यम से इसकी गंभीरता और उपयोगिता को महसूस कर रहे हैं, जबकि अन्य लोग मीडिया के जरिए इसकी जानकारी प्राप्त कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने सम्मेलन में शामिल सभी पीठासीन अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह मंच केवल संवाद का अवसर नहीं है, बल्कि यह तय करने का भी माध्यम है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं का उपयोग कैसे किया जाए और वे किस दिशा में आगे बढ़ें। मुख्यमंत्री ने कहा कि न्याय कैसे प्राप्त किया जाए, इसका मार्ग विधायिका तय करती है, क्योंकि वही ऐसे कानूनों का निर्माण करती है जो समाज के प्रत्येक वर्ग को न्याय दिलाने में सहायक होते हैं।

उन्होंने कहा कि विधायिका समतामूलक समाज की स्थापना का माध्यम है। उन्होंने कहा कि बंधुता का अर्थ यह है कि सहमति और असहमति के बावजूद हम सब एक साथ आगे बढ़ते हैं और लोकतांत्रिक मर्यादाओं का सम्मान करते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सशक्त विधायिका ही सशक्त लोकतंत्र की आधारशिला है और ऐसे आयोजनों से देश में बेहतर संसदीय परंपराओं को मजबूती मिलती है।

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