सुप्रीम कोर्ट बोला-अरावली में रोक के बाद भी अवैध खनन, रोकने के लिए एक्सपर्ट कमेटी बनाएंगे


-इससे ऐसे हालात बनेंगे, जिन्हें सुधार नहीं सकेंगे

नई दिल्ली/ जयपुर। सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को अरावली पहाडिय़ों पर सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि रोक बावजूद भी अवैध खनन चल रहा है। इससे ऐसे हालात बनेंगे, जिन्हें सुधार नहीं सकेंगे। सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने कहा कि खनन रोकने के लिए विशेषज्ञों की एक एक्सपर्ट कमेटी गठित करेगा। कोर्ट ने राजस्थान सरकार से गारंटी ली कि अरावली क्षेत्र में किसी भी तरह का खनन नहीं होने दिया जाएगा।

बेंच: पहले जारी अंतरिम आदेश जारी रहेगा।

सीजेआई: कुछ तरह की अवैध गतिविधियां अब भी जारी हैं। अवैध खनन से ऐसे हालात बन सकते हैं, जिन्हें सुधारा नहीं जा सकेगा।

सीजेआई: नई रिट याचिकाएं दाखिल न करें। हमें पता है कि ये याचिकाएं क्यों दायर की जा रही हैं।

 वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल (हस्तक्षेप याचिकाकर्ता की ओर से): हम अरावली का इतिहास जानते हैं। इसकी परिभाषा के पीछे विज्ञान होना चाहिए।

सीजेआई: हमें अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों की जरूरत है। सभी लोग नाम सुझाएं। हम चरणबद्ध तरीके से एक्सपट्र्स की टीम बनाएंगे।

कपिल सिब्बल: कृपया 30 मिनट की प्रारंभिक सुनवाई हो। हिमालय और अरावली जैसी पर्वतमालाओं को परिभाषित नहीं किया जा सकता। इनमें टेक्टोनिक मूवमेंट होते रहते हैं।

एक अन्य वकील: हम कोर्ट के सुओ मोटो आदेश का स्वागत करते हैं। हमने किसानों के साथ जमीनी स्तर पर काम किया है, जियो-टैगिंग भी की है।

सीजेआई: 29 दिसंबर 2025 के आदेश के संदर्भ में, कोर्ट के सामने एक व्यापक नोट और अहम सवाल रखे जाएंगे, ताकि सही फैसला लिया जा सके।

सीजेआई: राजस्थान सरकार की ओर से के.एम. नटराजन ने कहा है कि राज्य तुरंत सुनिश्चित करेगा कि प्रदेश में कोई अवैध खनन न हो।

सीजेआई: कपिल सिब्बल की ओर से दायर अंतरिम आवेदन मंजूर किया जाता है।

कोर्ट ने पहले छोटी पहाडिय़ों पर खनन का आदेश दिया, फिर वापस लिया था

सुप्रीम कोर्ट ने 20 नवंबर को जारी आदेश में 100 मीटर से छोटी पहाडिय़ों पर खनन के आदेश दिए थे। जिससे पूरे देश में 100 मीटर की परिभाषा को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। 29 नवंबर को अपने ही आदेश पर रोक लगा दी थी। मामले की जांच के लिए एक्सपर्ट कमेटी गठित करने के निर्देश देते हुए केंद्र और अरावली के चार राज्यों (राजस्थान, गुजरात, दिल्ली और हरियाणा) को भी नोटिस जारी कर इस मुद्दे पर जवाब मांगा था।

अरावली पर्वतमाला को संरक्षण करना महत्वपूर्ण

सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा- यह कोई प्रतिद्वंद्वी मुकदमा नहीं है, बल्कि अरावली पर्वतमाला का संरक्षण करना उद्देश्य है। पीठ ने कहा- 29 दिसंबर 2025 के आदेश में स्वत: संज्ञान लेते हुए जिन पॉइंट को रेखांकित किया था। उन्हें देखते हुए अरावली की परिभाषा से जुड़े वैज्ञानिक, पर्यावरणीय, भूवैज्ञानिक एवं विधिक पहलुओं की पुन: समीक्षा के लिए स्वतंत्र विशेषज्ञ निकाय की आवश्यकता हो सकती है।

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