-सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्शन कमीशन से सवाल किए
नई दिल्ली। स्पेशल इंटेंसिव रिव्यू प्रोसेस में संदिग्ध नागरिकता के आधार पर कितने वोटरों के नाम हटाए गए? सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को इलेक्शन कमीशन से पूछा और इस बारे में जानकारी देने को कहा। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि इलेक्शन कमीशन ने वोटर लिस्ट से नाम हटाने की सिफऱ् तीन कैटेगरी बताई हैं - मौत, डुप्लीकेशन और माइग्रेशन। बेंच ने कमीशन के सीनियर एडवोकेट राकेश द्विवेदी से पूछा, हम नाम हटाने के प्रोसेस की असलियत जानना चाहते हैं। क्या डाउटफुल सिटिजऩशिप के आधार पर नाम हटाने की कोई कैटेगरी है?
इलेक्शन कमीशन ने अधिकारियों से सवाल किए -
इलेक्शन कमीशन की तरफ से सीनियर एडवोकेट द्विवेदी ने बेंच से कहा कि वह जानकारी लेंगे और इस बारे में कोर्ट को बताएंगे। उन्होंने कहा कि इलेक्शन कमीशन सिफऱ् वोटर रजिस्ट्रेशन तक ही सिटिजऩशिप तय कर सकता है। वह किसी को देश से बाहर नहीं भेज सकता या यह तय नहीं कर सकता कि किसी के पास इंडिया में रहने का वीज़ा है या नहीं। पिटीशनर एनजीओ एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉम्र्स की तरफ से वकील प्रशांत भूषण ने कहा इसमें कोई शक नहीं है कि वोट देने के लिए नागरिकता ज़रूरी है। लेकिन, क्या इलेक्शन कमीशन के पास नागरिकता तय करने का अधिकार है? यह मुख्य सवाल है।
इलेक्टोरल रोल से बाहर किए गए नाम पब्लिक किए जाएं -
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को इलेक्शन कमीशन को निर्देश दिया कि केरल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के बाद पब्लिश हुई इलेक्टोरल रोल से बाहर किए गए लोगों के नाम पब्लिक किए जाएं, ताकि प्रभावित वोटर ऑब्जेक्शन उठा सकें। साथ ही, चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने इलेक्शन कमीशन से कहा है कि वह इन नामों पर ऑब्जेक्शन फाइल करने की डेडलाइन दो हफ्ते बढ़ाने पर विचार करे। इस बीच, इलेक्शन कमीशन की तरफ से वकील ने कहा है कि डेडलाइन बढ़ाने के मुद्दे पर विचार किया जाएगा। बेंच ने केरल में किए गए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन प्रोसेस को चुनौती देने वाली कई पिटीशन पर सुनवाई की।
