भारत में प्राइवेट जेट का बढ़ता इस्तेमाल; इन प्राइवेट चार्टर्ड प्लेन का बिजऩेस कैसे चलता है?



बारामती। महाराष्ट्र के डिप्टी चीफ मिनिस्टर अजीत पवार का आज सुबह एक प्लेन क्रैश में दुखद निधन हो गया। वह आने वाले जि़ला परिषद चुनावों के लिए प्रचार करने के लिए मुंबई से प्राइवेट प्लेन में बारामती आ रहे थे, तभी यह हादसा हुआ। बताया जा रहा है कि हादसा इसलिए हुआ क्योंकि पायलट बारामती एयरपोर्ट पर उतरते समय रनवे को साफ़ नहीं देख पाया था। इस बीच, इस घटना के बाद प्राइवेट चार्टर्ड एयरक्राफ्ट (प्राइवेट जेट) एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं।


भारत में प्राइवेट जेट का बढ़ता इस्तेमाल

पिछले कुछ सालों में भारत में प्राइवेट जेट का इस्तेमाल काफ़ी बढ़ा है। इसके पीछे मुख्य कारण बिजऩेसमैन की बढ़ती डिमांड, समय की बचत और चुनाव के समय नेताओं द्वारा इस्तेमाल माना जाता है। देश में हर साल औसतन 7 नए प्राइवेट जेट ऑपरेशन में आते हैं।

प्राइवेट जेट इंडस्ट्री कितनी बड़ी है?

इंडल्ज ग्लोबल के अनुसार, भारत में अभी 168 प्राइवेट जेट हैं। 2016 में यह संख्या 144 थी। यानी 8 सालों में 54 जेट बढ़े हैं। अगर चार्टर्ड एयरक्राफ्ट को भी शामिल कर लें, तो देश में इनकी कुल संख्या 400 से ज़्यादा है। तो, 2016 में यह संख्या 328 थी।


एसबीएस एविएशन के मुताबिक, 2024 में भारत में कुल चार्टर्ड एयरक्राफ्ट का बिजऩेस $274 मिलियन (लगभग 25 बिलियन) का था। इस बिजऩेस के 2029 तक दोगुना होने की उम्मीद है। ज़्यादातर प्राइवेट जेट बिजऩेसमैन के पास होते हैं, और चुनाव के मौसम में पॉलिटिकल लीडर और धार्मिक नेता भी इनका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करते हैं।


एक प्राइवेट जेट की कीमत कितनी होती है?

सेफ बाय एवीएशन के मुताबिक, एक एवरेज प्राइवेट जेट की कीमत लगभग 3 लाख प्रति घंटा है। यह कीमत एयरक्राफ्ट के साइज़, तय की गई दूरी और सुविधाओं पर निर्भर करती है।


भारत में प्राइवेट जेट सिस्टम कैसे काम करता है?

1) डीजीसीए की परमिशन ज़रूरी

प्राइवेट जेट का ऑपरेशन शुरू करने से पहले डायरेक्टरेट जनरल ऑफ़  सिविल एविएशन में रजिस्टर होना ज़रूरी है। डीजीसीए की परमिशन के बिना इसे उड़ाया नहीं जा सकता।


2) सभी सरकारी टैक्स का पेमेंट ज़रूरी है


प्राइवेट जेट को कोई टैक्स छूट नहीं दी जाती है। दिल्ली हाई कोर्ट ने भी 2023 में एक केस में साफ़  किया था कि चूंकि प्राइवेट जेट से आम नागरिक को सीधे फायदा नहीं होता है, इसलिए छूट देने का सवाल ही नहीं उठता।


3) मेंटेनेंस और पार्किंग के नियम


प्राइवेट जेट का मेंटेनेंस सीएआर-एम और सीएआर-145 नियमों के हिसाब से होता है। पार्किंग का इंतज़ाम डीजीसीए करता है और मालिकों को इसके लिए फीस देनी होती है। इसका मकसद फ़्लाइट की सुरक्षा पक्का करना है।


4) एटीसी कोऑर्डिनेशन और रूट मैप


डीजीसीए से परमिशन मिलने के बाद, जेट को  एयर ट्रैफिक कंट्रोल से जोड़ा जाता है। फ़्लाइट से पहले पूरा रूट मैप जमा करना होता है। उसके बाद ही फ़्लाइट को मंज़ूरी मिलती है।


5) लाइसेंस वाले पायलट और सेफ़्टी चेक

प्राइवेट जेट को सिफऱ् ऑफि़शियल लाइसेंस वाले पायलट ही उड़ा सकते हैं। मालिकों को पायलट के बारे में जानकारी देना ज़रूरी है। समय-समय पर सेफ्टी चेक किए जाते हैं, ताकि फ्लाइट में कोई दिक्कत न हो।

---------

एक टिप्पणी भेजें

और नया पुराने

Recent in Sports