वॉशिंगटन। यूएस प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने बोल्ड फ़ैसलों से दुनिया का ध्यान खींचा है। ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर उन देशों की एक लिस्ट पब्लिश की है, जहां से स् में इमिग्रेंट्स सरकारी मदद पर बहुत ज़्यादा डिपेंडेंट हैं। मज़ेदार बात यह है कि इस लिस्ट में भारत के पड़ोसी देशों के नाम तो हैं, लेकिन भारत का नाम इस लिस्ट में कहीं नहीं है।
यह 'वेलफेयर लिस्ट' क्या है?
डोनाल्ड ट्रंप ने 'इमिग्रेंट वेलफेयर रिसीपिएंट रेट्स बाय कंट्री ऑफ़ ओरिजिनÓ टाइटल के तहत लगभग 120 देशों के स्टैटिस्टिक्स पब्लिश किए हैं। यह लिस्ट उन देशों की है, जिनके नागरिक स् सरकार के फ़ूड, हेल्थ और फ़ाइनेंशियल मदद प्रोग्राम से सबसे ज़्यादा फ़ायदा उठाते हैं, बजाय इसके कि वे स् आने के बाद अपने पैरों पर खड़े हों।
पड़ोसी देशों की क्या हालत है?
ट्रंप के शेयर किए गए डेटा के मुताबिक, भारत के पड़ोसी देश स् के खजाने पर भारी बोझ डाल रहे हैं:
- भूटान: 81.4% (सबसे ज़्यादा मदद पाने वाला देश)
- बांग्लादेश: 54.8%
- पाकिस्तान: 40.2%
- नेपाल: 34.8%
- चीन: 32.9%
दूसरी तरफ, इस लिस्ट में भारत का नाम न होना यह साबित करता है कि स् में रहने वाले भारतीय नागरिक सरकारी मदद पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि स् की इकॉनमी में उनका अहम योगदान है।
भारत का जि़क्र क्यों नहीं है?
प्यू रिसर्च सेंटर के डेटा के मुताबिक, इंडियन अमेरिकन कम्युनिटी अमेरिका की सबसे अमीर और सबसे ज़्यादा पढ़ी-लिखी कम्युनिटी में से एक है। भारतीय परिवारों की सालाना औसत इनकम लगभग $1,51,200 है, जो किसी भी दूसरी इमिग्रेंट कम्युनिटी से कहीं ज़्यादा है। ज़्यादातर भारतीय ढ्ढञ्ज, फार्मास्यूटिकल और इंजीनियरिंग सेक्टर में ऊंचे पदों पर काम कर रहे हैं। पैसे के मामले में काबिल होने की वजह से, भारतीय नागरिकों को सरकारी मदद की ज़रूरत नहीं है। इस लिस्ट को जारी करने के पीछे ट्रंप का मकसद साफ है। वह स् के इमिग्रेशन सिस्टम को बदलना चाहते हैं और उन्होंने उन देशों पर बैन लगाने का इशारा किया है जो यूएस पर आर्थिक बोझ डाल रहे हैं। इसमें भारत का नाम न होने को दुनिया भर में भारतीय समुदाय की इमेज को बड़ा बढ़ावा देने के तौर पर देखा जा रहा है।
