-कच्चे तेल का सोर्स रहे इस देश में अनिश्चित राजनीतिक स्थिति ने भारत और दुनिया में तनाव बढ़ा दिया
नई दिल्ली। यूएस ने वेनेजुएला के खिलाफ़ मिलिट्री एक्शन लिया है और उसके प्रेसिडेंट निकोलस मादुरो को हिरासत में ले लिया है। इस एक्शन से ग्लोबल जियोपॉलिटिकल अस्थिरता पैदा हुई है। इसकी वजह से, ग्लोबल तेल मार्केट पर इसका बुरा असर पडऩे की संभावना है। कच्चे तेल का सोर्स रहे इस देश में अनिश्चित राजनीतिक स्थिति ने भारत और दुनिया में तनाव बढ़ा दिया है।
महंगाई का खतरा
वेनेजुएला ने 2025 में हर दिन 900,000 बैरल तेल का प्रोडक्शन किया। अगर यह सप्लाई रुकती है, तो दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमत ज़रूर बढ़ेगी। अगर तेल इंपोर्ट से अपनी ज़्यादातर ज़रूरतें पूरी करने वाले देशों को महंगा तेल खरीदना पड़ता है, तो इससे देश में महंगाई बढ़ सकती है। इसमें भारत भी शामिल है।
भारत 10वां सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना -
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ के बाद, वेनेजुएला संकट अब भारत के लिए एक नया सिरदर्द बन सकता है। 2013 में, भारत के कुल तेल इंपोर्ट में वेनेजुएला का हिस्सा 10त्न था। 2020 में, यह हिस्सा गिरकर 3.6त्न हो गया। हालांकि, बाद में, 2025 में, वेनेजुएला भारत का 10वां सबसे बड़ा तेल सप्लायर बन गया। पिछले साल, भारत ने वहां से 22 मिलियन बैरल तक तेल खरीदा था। हालांकि, अमेरिका के इस कदम से अब यह सप्लाई चेन रुक सकती है।
भारत और वेनेजुएला के बीच तेल के व्यापार के अलावा फार्मास्यूटिकल्स, मशीनरी और टेक्सटाइल इंडस्ट्री में भी बड़े संबंध हैं। भारत ने हाल ही में वहां जान बचाने वाली वैक्सीन भेजी हैं और डिजिटल सहयोग पर भी एग्रीमेंट साइन किए हैं। अगर इस देश पर स् का असर बढ़ता है, तो इसका भारत के साथ भविष्य के व्यापार और पॉलिसी पर बड़ा असर पड़ सकता है।
