खामेनेई की सत्ता खतरे में है! ईरान में लोग सड़कों पर उतरे?


- देश भर में सरकार के खिलाफ़ विरोध प्रदर्शन लगातार चौथे दिन भी जारी


तेहरान। बांग्लादेश और नेपाल की तरह, ईरान में भी बदलाव की हवा चल रही है। देश भर में सरकार के खिलाफ़ विरोध प्रदर्शन लगातार चौथे दिन भी जारी हैं, और ये विरोध प्रदर्शन अब हिंसक रूप लेते दिख रहे हैं। सड़कों पर उतरे नागरिक सीधे ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ नारे लगा रहे हैं। इन विरोध प्रदर्शनों में युवाओं और महिलाओं की बड़ी संख्या में भागीदारी देखी गई है, और इसे 2022 में महसा अमिनी की मौत के बाद शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद सबसे बड़ा जन आंदोलन माना जा रहा है।


दक्षिणी ईरान में फ़ार्स प्रांत के फासा शहर में प्रदर्शनकारियों ने एक सरकारी बिल्डिंग में घुसने की कोशिश की। फासा में गवर्नर ऑफिस का गेट तोडऩे की भी कोशिश की गई। इसके अलावा, खुज़ेस्तान प्रांत के रामहोर्मोज़ शहर में लोकल गवर्नरशिप पर कब्ज़ा करने की खबरें हैं। कुछ जगहों पर सरकारी ऑफिसों में आग लगाने की कोशिशों की भी खबरें हैं।


यह भी बताया गया है कि असदाबाद शहर में सुरक्षा बलों के ढ्ढक्रत्रष्ट बासिज फोर्स के एक बेस पर हमला किया गया। इन घटनाओं ने सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।


लोग सड़कों पर क्यों उतरे?


यह विरोध राजधानी तेहरान से शुरू हुआ। सबसे पहले दुकानदारों ने विरोध में अपनी दुकानें बंद कर दीं। ईरानी करेंसी रियाल, स् डॉलर के मुकाबले अब तक के सबसे निचले स्तर पर आ गई है, जिससे महंगाई आसमान छू रही है। इससे आम आदमी का जीना मुश्किल हो गया है, और यही इन विरोधों का मुख्य मुद्दा बन गया है। इसके बाद, ये विरोध पूरे देश में फैल गए। तेहरान में जहां स्टूडेंट्स ने प्रदर्शन किया, वहीं इस्फ़हान, यज़्द और ज़ंजन में यूनिवर्सिटी और एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन में भी नाराजग़ी ज़ाहिर की गई।


महंगाई ने कमर तोड़ दी है


ईरान की इकॉनमी इस समय गंभीर संकट में है। मौजूद जानकारी के मुताबिक, दिसंबर में देश की महंगाई दर 42.2 परसेंट तक पहुंच गई थी। पिछले साल खाने-पीने की चीज़ों और ज़रूरी चीज़ों की कीमतों में करीब 72 परसेंट की बढ़ोतरी हुई है। दवाओं और हेल्थ सर्विसेज़ की कीमतों में 50 परसेंट तक की बढ़ोतरी हुई है। सबसे बड़ी बात यह है कि ईरानी रियाल स् डॉलर के मुकाबले करीब 1.42 मिलियन रियाल के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया है। इस स्थिति के कारण गुस्साए नागरिक सड़कों पर उतर आए हैं और कई शहरों में मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकानें बंद कर दी गई हैं।

सरकार की क्या भूमिका है?


ईरान सरकार ने कहा है कि उसने इन विरोध प्रदर्शनों पर संयमित रुख अपनाया है। सरकार की प्रवक्ता फ़तेमेह मोहजेरानी ने बताया कि, "सरकार शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों का सम्मान करती है। हम संविधान द्वारा दिए गए शांतिपूर्ण तरीके से इक_ा होने के अधिकार को मान्यता देते हैं। लोगों की आवाज़ सुनना सरकार का कर्तव्य है।" हालांकि, सरकार ने यह भी साफ़ कर दिया है कि किसी भी हालत में हिंसा और अव्यवस्था बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


खामेनेई की सत्ता को खतरा?


पूरे देश में हो रहे विरोध प्रदर्शनों से एक ज़रूरी सवाल उठता है: क्या अयातुल्ला अली खामेनेई की सत्ता सच में खतरे में है? मौजूदा हालात में, सत्ता में तुरंत बदलाव की उम्मीद कम है। क्योंकि ईरान पर न सिफऱ् सरकार का कंट्रोल है, बल्कि रिवोल्यूशनरी गार्ड, सुरक्षा तंत्र और धार्मिक संस्थाओं का भी कंट्रोल है। फिर भी, सरकार को एक गंभीर राजनीतिक और सामाजिक चुनौती का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि बिजऩेसमैन, स्टूडेंट और आम नागरिक एक साथ सड़कों पर उतर रहे हैं।

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