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शुक्रवार, 22 मई 2020

जैव विविधता से हमारी पारिस्थितिकीय तंत्र का निर्माण होता है:आनंदीबेन


लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने शुक्रवार को कहा कि जैव विविधता से हमारी पारिस्थितिकीय तंत्र का निर्माण होता है, जो एक-दूसरे के जीवन यापन में सहायक होते हैं। श्रीमती पटेल ने आज राजभवन से अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर लखनऊ विश्वविद्यालय एवं जैव विविधता बोर्ड उत्तर प्रदेश के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ई-संगोष्ठी 'हमारा समाधान प्रकृृति में हैंÓ का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि जैव विविधता पृथ्वी पर पाई जाने वाली जीवों की विभिन्न प्रजातियों को कहा जाता है। भारत अपनी जैव विविधता के लिए विश्व विख्यात है। उन्होंने कहा कि भारत 17 उच्चकोटि के जैव विविधता वाले देशों में से एक है तथा पूरे विश्व की जैव विविधता में भारत की 7 प्रतिशत भागीदारी है।
राज्यपाल ने कहा कि भारत की भौगोलिक स्थिति देशवासियों को विभिन्न प्रकार के मौसम प्रदान करती है। भारत में 17 कृषि जलवायु जोन हैं, जिनसे अनेक प्रकार के खाद्य पदार्थ प्राप्त होते हैं। देश के जंगलों में विभिन्न प्रकार के नभचर, थलचर एवं उभयचर प्रवास करते हैं। इनमें रहने वाले पक्षी, कीट एवं जीव जैव विविधता को बढ़ाने में सहायक होते हैं। प्रकृति मनुष्य एवं जीव जन्तुओं के जीवन के प्रारम्भ से अंत तक के लिये खाने-पीने, रहने आदि सभी की व्यवस्था उपलब्ध कराती है। मनुष्य खेती कर भूमि से अपने भोजन के लिए अन्न एवं सब्जियां उगाता है तथा अस्वस्थ होने पर प्रकृति प्रदत्त औषधियों से उपचार करता है। उन्होंने कहा कि हमारा देश वैदिक काल से ही अपनी औषधीय विविधता के लिए प्रसिद्ध रहा है। अथर्ववेद में औषधीय पौधे एवं उनके प्रयोग का उल्लेख मिलता है। इसी तरह रामायण में भी बरगद, पीपल, अशोक, बेल एवं आंवले का उल्लेख मिलता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में कोविड-19 से बचाव के लिए क्लोरोक्विन दवा का प्रयोग कई देशों द्वारा किया जा रहा है। इसका सबसे ज्यादा उत्पादन एवं निर्यात भारत द्वारा पूरे विश्व में किया जा रहा है। इस दवा का प्रयोग मलेरिया बीमारी के लिए होता है। यह चिनकोना पेड़ से प्राप्त होता है।
श्रीमती पटेल ने कहा कि हम सबको मिलकर जैव विविधता के प्रयोग को बढ़ावा देना चाहिए और अधिक से अधिक वन, बगीचे, औषधीय पौधे एवं वृक्षों को लगाना चाहिए। इससे हमारे आस-पास के जैव विविधता में बढ़ोत्तरी होगी और पर्यावरण की गुणवत्ता में भी सुधार होगा। इससे पहले उन्होंने राजभवन से ही लखनऊ विश्वविद्यालय परिसर में महिला सामुदायिक प्रसाधन केन्द्र का ई-शिलान्यास किया और विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित न्यूजलेटर (द कोरस) तथा लखनऊ शहर के जैव विविधता सूचकांक (इण्डेक्स) का लोकार्पण भी किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 आलोक कुमार राय सहित आबूधाबी, इस्रराइल, साउथ अफ्रीका, यूएसए, फ्रांस, जापान और ब्राजील जैसे आठ देशों के विषय विशेषज्ञ भी ऑनलाइन उपस्थित थे।
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