बुधवार, 1 अप्रैल 2020

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भिलाई संयंत्र में रेल पटरियों के उत्पादन में भारी वृद्धि


नयी दिल्ली।  भारतीय रेलवे की 260 मीटर लंबी रेल पटरियों की मांग को पूरा करने के प्रयासों में जुटे भिलाई इस्पात संयंत्र ने वित्त वर्ष 2019-20 में 12.85 लाख टन यूटीएस 90 प्राइम रेल का उत्पादन किया है जो न केवल एक रिकार्ड है बल्कि इससे पिछले वर्ष की तुलना में 30 प्रतिशत अधिक है।

स्टील अथारिटी आफ इंडिया (सेल) के भिलाई संयंत्र ने वित्त वर्ष 2018-19 में 9.85 लाख टन यूटीएस 90 प्राइम रेल का उत्पादन किया था। यह संयंत्र अपने रेल एवं स्ट्रक्चरल मिल और नयी एवं आधुनिक यूनिवर्सल रेल मिल में पिछले छह दशक से अधिक समय से भारतीय रेलवे के लिए विश्व स्तरीय रेल पटरियों का उत्पादन कर रहा है। यह संयंत्र दुनिया की सबसे लंबी सिंगल पीस 130 मीटर रेल पटरी का निर्माण कर रहा है।

वित्त वर्ष 2019-20 में यूनिवर्सल रेल मिल ने 2018-19 के मुक़ाबले 46 प्रतिशत वृद्धि दर्ज करते हुए 5.38 लाख टन यूटीएस 90 प्राइम रेल का कुल उत्पादन किया है, जो पिछले वित्त वर्ष में 3.69 लाख टन था। रेल और स्ट्रक्चरल मिल ने इस वित्त वर्ष में 21 प्रतिशत वृद्धि दर्ज करते हुए यूटीएस 90 प्राइम रेल का 7.47 लाख टन उत्पादन किया जो 2018-19 में 6.16 लाख टन था।

यूटीएस 90 प्राइम रेल के कुल उत्पादन में 260 मीटर पैनल रेल का हिस्सा 2018-19 के 48प्रतिशत से बढ़कर 52 प्रतिशत हो गया है। वित्त वर्ष 2019-20 में लांग रेल का कुल उत्पादन पिछले वित्त वर्ष के 4.68 लाख टन के मुक़ाबले बढ़कर 6.66 लाख टन रहा, जिसमें 42 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

सेल अध्यक्ष अनिल कुमार चौधरी ने कहा कि हम भारतीय रेलवे की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। सेल और भारतीय रेलवे पिछले 60 सालों से मिलकर देश को गति देने का कर काम रहे हैं। हम भारतीय रेल की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए लगातार पटरियों का उत्पादन बढ़ा रहे हैं, खासकर लांग रेल का उत्पादन बढ़ाने पर ज़ोर दे रहे हैं।” सेल की 260 मीटर रेल पैनल से पटरियों के बीच में वेल्डेड जोड़ों की संख्या कम करने में महत्वपूर्ण मदद मिलती है, जिससे न केवल सुरक्षा में इजाफ़ा होता है बल्कि गति भी बढ़ती है।

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