शुक्रवार, 21 फ़रवरी 2020

राष्ट्रीय किसान मेले में कृषि विश्वविद्यालय का मंडप होगा आकर्षण का केन्द्र

नवीन अनुसंधान, आधुनिक प्रौद्योगिकी एवं नवाचारी तकनीकों का होगा प्रदर्शन

रायपुर। कृषि एवं जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा 23 से 25 फरवरी तक ग्राम तुलसी-बाराडेरा में आयोजित होने वाले तीन दिवसीय राष्ट्रीय कृषि मेले में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर द्वारा राज्य के किसानों की बेहतरी के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं, कार्यक्रमों एवं गतिविधियों को प्रदर्शित किया जाएगा। विश्वविद्यालय के मंडप में कृषि विश्वविद्यालय में किये जा रहे अनुसंधान कार्यों, नवीन किसानोपयोगी तकनीकों, विश्वविद्यालय द्वारा विकसित विभिन्न फसलों की नवीन किस्मों, कृषि यंत्रों एवं उपकरणों, खाद्य प्रसंस्करण प्रविधियों तथा नवाचारों की झलक देखने को मिलेगी। यहां कृषि की उन्नत तकनीकों एवं प्रविधियों का जीवंत प्रदर्शन भी किया जाएगा। यहां विश्वविद्यालय के विभिन्न कृषि विज्ञान केन्द्रों के मार्गदर्शन में संचालित किसान उत्पादक संगठनों एवं स्व-सहायता समूहों द्वारा उत्पादित सामग्रियों का विक्रय भी किया जाएगा।
कृषि विज्ञान केन्द्र कोरिया के स्टॉल में दुग्ध प्रसंस्करण तकनीक का प्रदर्शन
राष्ट्रीय किसान मेला में कृषि विज्ञान केन्द्र कोरिया के मार्गदर्शन में गठित कोरिया एग्रो प्रोड्यूसिंग कंपनी लिमिटेड का स्टाल लगाया जाएगा। इंदिरा गाँधी कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित कृषि विज्ञान केंद्र कोरिया के तकनीकी मार्गदर्शन में गठित तथा भारत सरकार से पंजीकृत किसान उत्पादक संगठन ''कोरिया एग्रो प्रोडूसिंग कंपनी लिमिटेडÓÓ द्वारा क्रियान्वित दुग्ध उत्पादक समूहों व जिले के अन्य दुग्ध उत्पादकों से प्रति दिन 100 से 150 लीटर दूध का संग्रहण किया जाता है। इस संग्रहित दूध से घी, खोवा एवं पनीर आदि उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। कृषि विज्ञान केंद्र कोरिया में स्थापित दुग्ध प्रसंस्करण एवं मूल्य वर्धन इकाई में प्रति दिन 500 लीटर दूध का प्रसंस्करण किया जाता है। ''कोरिया एग्रो प्रोडूसिंग कंपनी लिमिटेडÓÓ के किसान उत्पादक संगठन द्वारा उत्पादित दुग्ध पदार्थों का विक्रय शासकीय एवं अशासकीय संस्थानों से जोड़कर विपणन किया जा रहा है। वर्ष 2018-19 में कृषि विज्ञान केन्द्र, कोरिया के मार्गदर्शन में गठित किसान उत्पादन संगठन ''कोरिया एग्रो प्रोड्यूसर कम्पनीÓÓ के दुग्ध उत्पादक संगठन थ्प्ळ श्थ्ंतउंते प्दबवउम ळतवनचश् द्वारा प्रायोगिक तौर पर कृषि विज्ञान केन्द्र के तकनीकी मार्गदर्शन में ।.2 दुग्ध संग्रहण कर 125 किलो घी, 100 किलो खोवा व 150 किलो पनीर तैयार कर स्थानीय स्तर पर विक्रय किया गया। वर्तमान में कृषि विज्ञान केन्द्र के माध्यम से ।.2 दुग्ध का संग्रहण किसान उत्पादक संगठन द्वारा किया जाता है तथा हर माह 85 से 100 किलो देसी घी का उत्पादन किया जा रहा है। संगठन द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य दुग्ध महासंघ मर्यादित देवभोग, रायपुर को विपणन हेतु देसी घी एवं वसा रहित दूध उपलब्ध कराया जा रहा है।
मात्र डेढ़ हजार रूपये लागत का इनक्यूबेटर
इंदिरा गाधी कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित कृषि विज्ञान केंद्र कोरबा के स्टॉल में वहां के स्थानीय कृषक श्री मनमोहन यादव द्वारा निर्मित कम लागत के इनक्यूबेटर को प्रदर्शित किया जाएगा। ग्राम लखनपुर के प्रगतिशील कृषक श्री मनमोहन यादव ने महज डेढ़ हजार रूपये की लागत से अंडे सेने हेतु किफायती इनक्यूबेटर बनाया है। महज 12वीं की शिक्षा प्राप्त करने वाले कृषक श्री मनमोहन यादव वर्ष 2014 में कृषि विज्ञान केन्द्र, कोरबा के संपर्क में आए और थर्माकोल के डिब्बे का उपयोग कर 35 अंडे सेने की क्षमता वाली इनक्यूबेटर का ईजाद किया मुर्गी पालकों के लिए वरदान साबित हो सकता है। किफायती इनक्यूबेटर कम लागत का होने के साथ-साथ आकार में छोटे होने के कारण इसे एक स्थान से दूसरे स्थान पर आसानी से लाया-लेजाया जा सकता है, इसे छोटे स्थान पर भी रखा जा सकता है, इसके उपयोग से बिजली की खपत होती है, इसका संचालन एक व्यक्ति द्वारा किया जा सकता है।
इनक्यूबेटर में एक बार में 35 अंडे को सेने का कार्य किया जा सकता है। इनक्यूबेटर से 21 दिनों के भीतर अंडे से चूजे प्राप्त किया जा सकता है। श्री मनमोहन यादव ने प्रारंभ में थर्माकोल के डिब्बे का उपयोग कर इनक्यूबेटर का निर्माण किया। इसके पश्चात उन्होंने अंडे की क्षमता को बढ़ाने के लिये पुरानी खराब फ्रिज का उपयोग किया, जिसकी क्षमता 120 अंडो की है जिसके निर्माण लगभग 3000 रूपये की लागत आती है। श्री यादव ने इसी माडल को प्लाई बोर्ड से बनाकर लगभग 900 अंडे सेने वाली इनक्यूबेटर बनाया जिसकी अनुमानित लागत 30,000 से 35,000 रूपये रही। व्यावसायिक स्तर पर मुर्गी पालकों के लिये यह इनक्यूबेटर बहुत ही उपयोगी है।

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