गुरुवार, 13 फ़रवरी 2020

अधिकांश महिलायें और युवा ऑनलाइन मिलने वाले लोगों करते हैं भरोसा

नई दिल्ली। किफायती इंटरनेट की उपलब्धता से जहां स्मार्टफोन मनोरंजन का प्रमुख माध्यम बन गया है वहीं ऑनलाइन डेटिंग ऐप की भी लोकप्रितया बढऩे लगी और इसके जरिये मिलने वाले अनजान लोगों पर न:न सिर्फ युवा बल्कि अधिकांश महिलायें भी भरोसा करती हैं। उपभोक्ता साइबर सुरक्षा क्षेत्र की कंपनी नॉर्टनलाइफलॉक इंक ने गुरूवार को इंडिया डिजिटल वैलनेस रिपोर्ट के दूसरे संस्करण को जारी किया। इसको शहरों में रहने वाले 1500 भारतीय वयस्कों के ऑनलाइन सर्वे के आधार पर तैयार की गई। रिपोर्ट में, अलग-अलग यूजऱ वर्ग में, ऑनलाइन डेटिंग ऐप की लोकप्रियता और किस तरह किफायती डेटा की उपलब्धता ने स्मार्टफोन को मनोरंजन का प्रमुख माध्यम बना डाला है, विषय पर प्रकाश डाला गया है। रिपोर्ट के अनुसार इसमें सर्वे में शामिल 40 फीसदी प्रतिभगी डेटिंग ऐप पर मिलने वाले लोगों से असल जिंदगी में मिले बगैर भी उनके साथ अपनी निजी जानकारी साझा करने को लेकर किसी प्रकार की दुविधा में नहीं होते। इसमें शामिल 66 प्रतिशत महिलाओं और 63 प्रतिशत युवाओं को लगता है कि ऑनलाइन मिलने वाले लोग भरोसेमंद होते हैं। कंपनी ने रिपोर्ट का हवाला देते हुूये कहा " इससे संकेत मिला है कि भारतीय पुरुष और महिलाएं ऑनलाइन डेटिंग को लेकर काफी खुली सोच रखते हैं। करीबी रिश्ते की अपनी तलाश में हर दस प्रतिभागियों में से चार प्रतिभागी ऑनलाइन डेटिंग ऐप का इस्तेमाल करते हैं। महानगरों में रहने वाले करीब 55 फीसदी प्रतिभागियों ने ऑनलाइन डेटिंग को चुनने के पीछे करीबी रिलेशनशिप होती है। टियर 1 शहरों में रहने वाले लगभग 68 फीसदी प्रतिभागियों और टियर 2 शहरों के 21 फीसदी प्रतिभागियों ने क्रमश कैजुअल डेटिंग और शारीरिक अंतरंगता की चाहत को प्रमुख कारण बताया। रिपोर्ट के अनुसार अधेड़ उम्र के 65 फीसदी प्रतिभागी कैजुअल डेटिंग के लिए ऑनलाइन डेटिंग का इस्तेमाल करते हैं जबकि युवा पीढ़ी के 63 फीसदी ने करीबी रिलेशनशिप के लिए इसे चुनने का कारण बताया। नॉर्टनलाइफलॉक इंडिया के निदेशक ऋतेष चोपड़ा ने कहा कि स्मार्टफोन और डेटा के लगातार किफायती होने से लोंगों की ऑनलाइन जिंदगी पर काफी असर पड़ा है। भारतीय पुरुष और महिलाएं ऑनलाइन डेटिंग की संकल्पना को लेकर काफी खुली सोच रखने लगे हैं। लेकिन लोगों को अपने डिजिटल फुटप्रिंट को लेकर काफी सचेत रहने की जरूरत है, क्योंकि साइबर अपराधियों के लिए नकली पहचान बनाकर यूजरों को ठगना या ऑनलाइन प्लेटफार्मों पर उपलब्ध व्यक्तिगत डेटा का दुरुपयोग करना आसान हो गया है।

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