मंगलवार, 18 फ़रवरी 2020

सच छिपाती है मोदी सरकार: कांग्रेस

नई दिल्ली। कांग्रेस ने कहा है कि मोदी सरकार हमेशा सच छिपाने का प्रयास करती है और इस बार आर्थिक आंकड़ों से जुड़े तथ्य छिपाने के साथ ही वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की भारत यात्रा के दौरान रास्ते में पडऩे वाली गरीबों की झोंपड़ी छिपाने के लिए दीवार बना रही है। कांग्रेस प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने मंगलवार को यहां संवाददाताओं से कहा कि यह सरकार सच्चाई को कभी स्वीकार नहीं करती और वह सब कुछ छुपाना चाहती है। सरकार बराबर गलत आंकड़े देकर सच्चाई पर पर्दा डालने का प्रयास करती है लेकिन सच्चाई जमीन पर होती है जिसे छिपाया नहीं जा सकता। ऐसा लगता है कि सरकार में बैठे कुछ लोगों के लिए छिपम-छिपाई पसींदीदा खेल बन गया है। यह खेल इन दिनों सुर्खियों में है क्योंकि देश में 40 साल में सबसे कम खपत देखने को मिल रही है। उन्होंने कहा कि देश में बेरोजगारी का आकंड़ा छिपाया गया, लोगों की आय में नौ साल में सबसे कम वृद्धि हुई और यह आंकड़ा भी छुपाया जा रहा है। देश के नागरिकों की 40 साल में पहली बार खपत घटी है और यदि खपत घटती है तो इसका सीधा मतलब है कि देश में गरीबी बढ़ी है। सरकार खुद कह रही है कि महंगाई बढ़ गयी है और उत्पादन घट रहा है। लोग पहले की तुलना में अब कम खरीद कर पा रहे हैं। यह सच्चाई है जो किसी डाटा से ज्यादा स्पष्ट है और जमीनी हकीकत बयां है।
प्रवक्ता ने कहा कि सरकार सिर्फ आर्थिक डाटा ही नहीं छिपा रही है बल्कि वह गरीबी पर भी पर्दा डालने का भी प्रयास कर रही है और इसका ताजा उदाहरण गुजरात का अहमदाबाद बन गया है जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की भारत यात्रा के दौरान 'नमस्ते ट्रम्प कार्यक्रमÓ कार्यक्रम आयोजित किया जाना है। राष्ट्रपति ट्रम्प जिस रास्ते से आएंगे उस रास्ते पर दीवार बनाई जा रही है ताकि देश की गरीबों वह नहीं देख पाएं और असलियत को दीवार के पीछे छिपाया जा सके। दीवार लगाकर छिपाने का माडल गुजरात का नहीं रहा है और न ही देश के किसी के हिस्से का रहा है लेकिन मोदी सरकार सब कुछ छिपाना चाहती है। उन्होंने कहा कि सरकार ने देश के संगठित और असंगठित क्षेत्र को बर्बाद कर दिया है। संगठित क्षेत्र को वस्तु एवं सेवाकर-जीएसटी और असंगठित क्षेत्र को नोटबंदी के फैसले ने बर्बाद किया है। आंकड़ों को छिपाकर सरकार सच्चाई पर पर्दा नहीं डाल सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार को आंकड़े छिपाने की बजाए उस पर सदन से सड़क तक चर्चा करनी चाहिए।

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