बुधवार, 1 जनवरी 2020

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ऑर्बिटर के बगैर लांच होगा चंद्रयान- 3, लैंडर व रोवर रहेंगे साथ: के सिवन

नई दिल्ली। इसरो   प्रमुख के सिवन   ने बुधवार को अहम जानकारी साझा करते हुए बताया कि चंद्रयान 3  प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल गई है। उन्होंने बताया, 'इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। इसके लिए चार लोगों को चुन लिया गया है। इन चारों को ट्रेनिंग के लिए रूस भेजने की योजना है। उन्होंने बताया, 'हमने चंद्रयान-2   पर अच्छी तरक्की की हालांकि हम लैंडिंग में सफल नहीं हो सके, अभी भी ऑर्बिटर काम कर रहा है। यह अगले सात सालों तक काम करेगा और हमें डाटा उपलब्ध कराएगा।Ó बेंगलुरु स्थित इसरो मुख्यालय में चेयरमैन के सिवन ने बताया कि चंद्रयान-3 में लैंडर और रोवर तो होंगे लेकिन ऑर्बिटर नहीं होगा। सितंबर में चंद्रयान-2 मिशन के जरिए ऑर्बिटर को सफलतापूर्वक स्थापित किया गया था। यह वैज्ञानिक आंकड़ा पृथ्वी पर भेज रहा है। हालांकि चंद्रमा की सतह पर हार्ड लैंडिंग के बाद रोवर को स्थापित नहीं किया जा सका। इस मिशन का लक्ष्य चंद्रमा का दक्षिणी ध्रुव है जहां पहले कोई चंद्रयान नहीं गया। ऐसा माना जाता है कि यहां क्रेटर्स के तौर पर पानी है। इसरो ने उम्मीद जताई थी कि बर्फ के तौर पर वहां मौजूद पानी की पुष्टि करेंगे जो इसने वर्ष 2008 में अपने मिशन में पहली बार खोजा था। केवल अमेरिका, रूस और चीन अब तक चंद्रमा की सतह पर पहुंचे हैं। पिछले साल बीजिंग ने एक मिशन किया था जो असफल रहा वहीं इजरायल का भी स्पेसक्राफ्ट सफल लैंडिंग नहीं कर सका। इससे पहले केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने भी इस बात की जानकारी दी थी। हालांकि इसके बारे में उन्होंने ज्यादा विवरण नहीं दिया था। उन्होंने बताया कि चंद्रयान 2 की तुलना में कम लागत के साथ चंद्रयान 3 लांच किया जाएगा। साथ ही उन्होंने चंद्रयान-2 को 'निराशाजनक  बताने की बात को गलत करार दिया। उनके अनुसार, चंद्रमा की सतह पर उतरने वाला भारत का यह प्रयास असफल नहीं रहा क्योंकि इससे काफी कुछ सीखने को मिला है। अभी तक किसी भी देश ने पहले प्रयास में मंजिल हासिल नहीं की। उन्होंने कहा कि चंद्रयान-2 के अनुभवों और मौजूदा बुनियादी सुविधाएं चंद्रयान -3 के लागत को कम करेगा। हालांकि उन्होंने इस नए मिशन के लिए निश्चित तारीख बताने से इंकार कर दिया। 

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