Friday, 6 September 2019

आफत वाली बारिश से 4 की मौत, 22 मकान ढहे


  •  निचली बनी तालाब, नदी नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ा 

जगदलपुर ।  बस्तर जिले में पिछले तीन दिनों से रूक-रूक कर हो रही आफत वाली बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। रात में हुई भारी बारिश से 4 लोगों की मौत हो गई और शहर में लगभग 22 मकान क्षतिग्रस्त हो गये । निचली बस्तियों के घरों में पानी भर गया। इंद्रावती नदी का जल स्तर खतरे के निशान से दो मीटर नीचे बह रहा है।
अधिकारिक जानकारी के अनुसार बीती रात को हुई भारी बारिश से बस्तर कल्ेाक्टर बंगले की चारदीवारी ढह जाने से मां बेटे की मौत हो गयी। बताया गया कि कलेक्टर बंगले की दीवार गिर जाने से दीवार के नजदीक बना एक मकान क्षतिग्रस्त हो गया और घर में सो रहे मां चंद्रिका बघ्ेाल, बेटा विष्णु बघेल दोनों की मौके पर ही मौत हो गयी। इसी  तरह शहर के  अनुकूल वार्ड में दीवार गिरने से घर में सो रहे एक महिला सोनवती की मौत हो गयी। वहीं जगदलपुर  के समीपस्थ गांव मालगंाव के पास तेज बहाव में किसान सोनूराम बघ्ेाल बह गया जो अब तक लापता है।
जगदलपुर शहर की निचली बतिस्यो पूरी तहर जलमग्र हो गयी हंै। शहर में लगभग बाईस से अधिक मकान क्षतिग्रस्त हो गये हैं। लोगों के घरों में पानी भर गया है। जिससे लोगों का जीना दुश्वार हो गया है। जिला प्रषासन ने निचली बस्तियों में राहत शिविर  प्रांरभ किया है। इंद्रावती नदी पर बने उड़ीसा के खातीगुड़ा बांध से पानी छोड़े जाने से दोपहर तक इंद्रावती नदी का जल स्तर खतरे के निशान से उपर पहुंच जायेगा। शहर जगदलपुर के साथ  ही साथ आसपास का गंाव टापू बन गया है। शहर के  अंदर जल भराव होने के कारण वार्ड भी टापू की शक्ल में तब्दील हो गए हैं।
शहर में शहीद पार्क, धरमपुरा रोड, गीदम रोड, संजय मार्केट के समीप हनुमान मंदिर चौक में पानी भरने से लोगों को आवाजाही में परेशानी हुई।  इंद्रावती नदी में जलस्तर बढऩे से सहायक नाला गोरियाबहार में बैक वॉटर के कारण बाढ़ आने से लालबाग-हाटगुड़ा मार्ग बंद है।
नालियों में कचरा जमने के चलते बारिश होते ही नाली का पानी सड़कों में जमा हो गया। इसके चलते राहगीरों को और दुपहिया वाहन चालकों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। शहर के नयापारा, कोर्ट तिराहा, धरमपुरा रोड, ओल्ड नरेन्द्र टाकिज रोड, मेडिकल कालेज रोड, शहीद पार्क तिराहा, हनुमान मंदिर चौक, बस स्टैण्ड रोड समेत कई मार्गो में सड़क के उपर घुटनों तक पानी जमा हो गया। निचली बस्तियों में घर के भीतर पानी घुसने से रहवासियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।  

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