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शराब के धंधे में मशगूल जिम्मेदारों ने कर दी बचकानी चूक, बच्चों ने पढ़ाई छोड़ कलेक्टोरेट तक किया पैदल मार्च


 गोकुलनगर में विरोध के बाद काठाडीह में खुला मयखाना

रायपुर। पहले तो आबकारी गाइड लाइन को महकमा फॉलो नहीं कर रहा। तय कीमत से ज्यादा में शराब बेचकर मुनाफा कमाने वाले वसूलीबाजों पर नियंत्रण ही नहीं कर पाए हैं। शराब की कमाई में मशगूल महकमें ने गोकुलनगर शराब दुकान स्कूल के चंद कदम दूर संचालित करती रही। नशे में चूर नशेडिय़ों से जब स्कूल के बच्चों पर बुरा असर पडऩे लगा तब भी विभाग नहीं चेता। मजबूरन स्कूली बच्चों संग पालकों को धरना-प्रदर्शन करना पड़ा। खबर छपते ही तब जाकर महकमा और विभागीय मंत्री की नींद टूटी और स्कूल से शराब दुकान तत्काल स्थानांतरित करने का भरोसा दिलाया गया। गोकुलनगर स्कूल के पास वाली दुकान शिफ्ट भी करने का निर्देश जिम्मेदार अधिकारियों को दे दिया गया। आखिरकार दुकान गोकुलनगर स्कूल के पास से काठाडीह स्थानांतरित कर दी गई। पूरा सैटअप लग गया और मयखाने में नशेडिय़ों की भीड़ भी जुटने लगी। तब जाकर खुलासा हुआ कि शराब दुकान शिफ्ट करने वालों ने गोकुलनगर स्कूल के बच्चों के विरोध के बाद उसे काठाडीह में भी एक स्कूल के समीप ही धंधा करने लगे हैं।
खबर लगते ही और नशेडिय़ों से संभावित खतरे को देखते हुए पूरी स्कूल के बच्चे पालकों संग फिर आंदोलन की राह पर हैं। इस बार गोकुलनगर के नहीं काठाडीह के स्कूली बच्चों ने उक्त शराब दुकान स्कूल से दूर लेजाने के लिए पढ़ाई छोड़कर पैदल कलेक्टोरेट तक मार्च किया। मंगलवार को काठाडीह के स्कूली बच्चों व स्थानीय लोगों ने भी इस शराब दुकान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कलेक्टोरेट कार्यालय पहुंच कर आज दोपहर प्रदर्शनकारी बच्चों व परिजनों ने शराब दुकान स्कूल से कहीं अन्यत्र ले जाने व बंद करने की मांग की है।
फिर आबकारी मंत्री लखमा का वादा
स्कूली बच्चों के फिर पैदल मार्च और प्रदर्शन की खबर लगते ही आबकारी मंत्री कवासी लखमा ने नाराजगी जाहिर करते हुए जिम्मेदारों से दो दिवस के भीतर अन्यत्र शराब दुकान स्थानांतरित करने का फरमान दिया है। बता दें कि मंत्री ने गोकुलनगर से भी दुकान शिफ्ट करवाई थी तब जाकर दुकान काठाडीह शिफ्ट हुई है। अब एक बार फिर मंत्री लखमा ने दो दिनों में दुकान यहां की स्कूल से भी दूर शिफ्ट करने को कहा है।
स्कूल हो या मंदिर नशे का धंधा पहले
नियमतया स्कूल, कॉलेज या शिक्षण संस्थानों से तय दूरी पर सिर्फ राजधानी रायपुर में ही नहीं बल्कि प्रदेश के हर बड़े जिलों में शराब दुकान संचालित की जा रही हैं। इतना ही नहीं कई बड़े मंदिरों, धार्मिक स्थलों से भी चंद कदम की दूरी पर मयखाना चल रहा है। इससे जहां धार्मिक भावनाएं भी आहत हो रही हैं तो वहीं स्कूल-कॉलेज में पढऩे वाले छात्र-छात्राओं पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता है। फिर भी मुनाफे का यह धंधा भावनाओं पर भारी पड़ रहा है।

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