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जीएसटी दरें घटने के बावजूद मकान सस्ता नहीं होने की चेतावनी दे रहे हैं डिवेलपर्स


 नई दिल्ली। अंडर-कंस्ट्रक्शन मकानों पर जीएसटी की दरों में भारी कटौती के बावजूद इनकी कीमतों में बहुत ज्यादा गिरावट की उम्मीद नहीं की जा रही है। इनपुट टैक्स क्रेडिट से वंचित रियल एस्टेट सेक्टर ने जहां सीमेंट और स्टील जैसे इनपुट मटीरियल पर जीएसटी की ऊंची दरों पर चिंता जताई है, वहीं अब तक उपलब्ध क्रेडिट के 1 अप्रैल को लैप्स होने से पहले कैरी फॉरवर्ड करने की मांग की है।
पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स ऐंड इंडस्ट्री की ओर से रियल एस्टेट में इनपुट क्रेडिट की विसंगतियों पर गुरुवार को आयोजित एक कॉन्फ्रेंस में इंडस्ट्री ने शीर्ष अधिकारियों से कहा कि अगर ये मुद्दे हल नहीं हुए, तो आम ग्राहक को सस्ते मकान दिलाने की कोशिशें रंग नहीं लाएंगी। काउंसिल की पिछली बैठक में अंडर-कंस्ट्रक्शन मकानों पर जीएसटी दरें बिना क्रेडिट के 5त्न और अफोर्डेबल हाउसिंग पर 1त्न कर दी गईं थीं। यानी कच्चे माल की खरीद पर चुकाए गए टैक्स का क्रेडिट नहीं मिलेगा।
उद्योग के प्रतिनिधियों ने कहा कि लागत के सबसे बड़े हिस्से सीमेंट पर जीएसटी रेट 28त्न है। अगर क्रेडिट नहीं मिलेगा तो बिल्डर इसका बोझ ग्राहक पर डालेंगे। मेट्रो और नॉन-मेट्रो शहरों के लिए अफोर्डेबल हाउसिंग की डेफिनिशन पर भी सवाल उठाए गए और कहा गया कि दिल्ली-मुंबई में 45 लाख में 60 वर्गमीटर तक मकान देना मुश्किल है।
सीबीआईसी के मेंबर जॉन जोसेफ ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था अंतिम नहीं है और जीएसटी को तर्कसंगत बनाने का काम चलता रहेगा। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में अगर टैक्स कलेक्शन में स्थिरता आती है तो हायर स्लैब में और कटौती हो सकती है। उन्होंने दावा किया कि जीएसटी लागू होने के डेढ़ साल के भीतर करीब 90त्न वस्तुएं प्री-जीएसटी रिजीम के लोअर रेट तक आ गई हैं। रियल्टर्स ने अनुमान लगाया कि नॉन-अफोर्डेबल सेग्मेंट में करीब 13,000 करोड़ की इन्वेंटरी पड़ी है। उन्होंने पुराने क्रेडिट के लिए 5 साल के विंडो की मांग की। 

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