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सुनने की क्षमता में कमी से इन बीमारियों का खतरा


वैसे तो हर बीमारी सेहत के लिए खतरनाक होती है, लेकिन एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक सुनने की क्षमता में कमी आपको नई मुसीबत में डाल सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, सुनने की क्षमता में गिरावट बुजर्गों की मेमरी को कमजोर कर सकती है। डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनियाभर में करीब 36 करोड़ लोग सुनने की बीमारी से जूझ रहे हैं। जिनमें से एक-दसवां हिस्सा बच्चों का है। अमेरिका के ब्रिघैम ऐंड वूमंज़ अस्पताल में इस संबंध में एक रिसर्च की गई। इस रिसर्च में 10,107 पुरुषों को शामिल किया गया, जिनकी उम्र 62 वर्ष थी। रिसर्च में सामने आया कि जिन पुरुषों के सुनने की क्षमता में गिरावट नहीं आई थी, उनकी तुलना में सुनने की क्षमता में हल्की गिरावट वाले पुरुषों में 30 फीसदी सोचने व समझने की क्षमता कम हुई है।
वहीं दूसरी ओर से सुनने की क्षमता में मध्यम गिरावट वाले 42 फीसदी सोचने व समझने की क्षमता कम हुई। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सुनने की क्षमता में गिरावट से जहां बुजुर्गों की याददाश्त में कमी और डिमेंशिया का खतरा रहता है, बच्चों में इसके कारण बोलने की क्षमता और दिमागी विकास में बाधा आ सकती है। भारत में सुनने की क्षमता में कमी को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि जन्मजात बहरापन में बहुत समय बाद बीमारी का पता चलता, लेकिन नवजात बच्चें को अगर लंबे समय तक पीलिया, मेनिंजाइटिस रहता है तो उसे नजरअंदाज न करें। इससे नवजात शिशु की सुनने की क्षमता में मध्यम व गंभीर स्तर की कमी आ सकती है।  डॉक्टरों का कहना है कि हीयरिंग लॉस के कारण होने वाली किसी भी जटिलता से बचने के लिए हीयरिंग एड, कोक्लियर इम्पलांट, दवाइयों और करेक्टिव सर्जरी जैसे उपाय जल्द से जल्द उठाने चाहिए। ताकि इस तरह की समस्या को समय रहते दूर किया जा सके। 

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